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लव जिहाद : प्रेम या साजिश

– सारांश कनौजिया

आज कल अक्सर समाचारों में हम लव जिहाद के बारे में पढ़ते हैं। लगभग सभी मामलों में हिन्दू युवती के परिवार का आरोप होता है कि मुस्लिम युवक ने बहला-फुसलाकर हमारी पुत्री का धर्मांतरण कर उससे विवाह कर लिया। कुछ मामलों में युवती स्वयं सामने आकर उसके साथ हुए अत्याचार के बारे में बताती है। एक मुस्लिम युवक और हिन्दू युवती के विवाह को कुछ लोग अपना जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता के रूप में भी परिभाषित करते हैं, किन्तु क्या यह ठीक है? क्या वास्तव में ऐसा ही है जैसा बताया जाता है? युवती के माता-पिता उसकी स्वतंत्रता के अधिकार को छीन रहे थे? मेरा मानना है कि अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं है। मैं कुछ तथ्यों और उदाहरणों से अपनी बात रखना चाहता हूँ।

ऐसे मामले जिनमें मुस्लिम युवक, हिन्दू युवती से प्रेम संबंध बनाते हैं, उनमें से ज्यादातर मामलो में देखा गया है कि मुस्लिम युवक, युवती अथवा उसके परिवार अथवा दोनों से अपने संप्रदाय के बारे में छुपाकर हिन्दू नाम से सामने आते हैं। किसी भी संबंध की नींव सत्यता होती है। यहां तो पहले ही चरण में झूठ का सहारा लिया जा रहा है। इसके अलावा इस प्रकार के संबंध के पक्षधर कहते हैं कि प्रेम जाति या संप्रदाय नहीं देखता, वह तो सिर्फ आत्मीयता देखता है। यदि ऐसा है तो फिर युवती को नाम और धर्म बदलने के लिए क्यों बाध्य किया जाता है?

हिन्दू धर्म में सामान्यतः विवाह के बाद युवतियों का उप नाम बदलता है, नाम नहीं। इसके अतिरिक्त वो जिस धार्मिक मान्यता का पालन अपने घर में करती थीं, ससुराल में भी उसको मानने की पूरी स्वतंत्रता होती है। उदाहरण के लिए यदि कोई युवती विष्णु भक्त है और उसका विवाह शिव भक्त परिवार में हो जाता है, तो उसे वहां शिव भक्ति के साथ-साथ विष्णु भक्ति करने की भी पूरी स्वतंत्रता होती है। उसे विष्णु भक्ति से रोका नहीं जाता है। किन्तु इसके उलट जब कोई युवती किसी मुस्लिम युवक से विवाह करती है, तो उसे मानसिक रूप से अपना नाम, अपनी धार्मिक मान्यता सब कुछ बदलने के लिए विवश किया जाता है। ऐसा क्यों? मुस्लिम युवक से विवाह होने के बाद वो महिला इस्लाम और हिन्दू दोनों धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्यवहार क्यों नहीं कर सकती?

यहां एक और बात ध्यान में रखने की जरुरत है। जब एक महिला अपनी मान्यताओं को बदल लेती है, तो उसके आने वाले सभी वंशजों की मान्यता भी बदल जाती है। महाभारत में अभिमन्यु ने चक्रव्यू तोड़ने की अधिकांश विधि मां की कोख में ही सीख ली थी। आधुनिक विश्व के चिकित्सक भी मानते हैं कि गर्भावस्था में महिला के आस-पास का वातावरण जैसा होगा, उसकी संतान पर भी वैसा ही प्रभाव पड़ेगा। अर्थात यदि महिला ने हिन्दू मान्यताओं का पूरी तरह त्याग कर दिया, तो उसकी संतानों में भी हिन्दू मान्यता तनिक भी नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पूरा एक वंश हिन्दू मान्यता से दूर हो जायेगा। प्रेम में समर्पण होता है, त्याग होता है, लेकिन यहां तो सिर्फ हिन्दू महिला को ही त्याग करना पड़ता है, मुस्लिम पुरुष का क्या कोई दायित्व नहीं होता।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ हिन्दू युवतियों की मनोस्थिति ही बदली जाती है। यदि गलती से कोई मुस्लिम युवती किसी हिन्दू युवक से प्रेम करने लगती है, तो उसकी दो में से कोई एक शर्त होती है। पहली की हिन्दू युवक को मुस्लिम बनना होगा। यदि युवक ने किसी प्रकार अपने धर्म की रक्षा कर ली, तो मुस्लिम युवती की दूसरी शर्त होती है कि वो अपनी इस्लामिक मान्यताओं का त्याग नहीं करेगी। सामान्यतः उसकी यह शर्त हिन्दू युवक के द्वारा मान ली जाती है।

अपने लेख के दूसरे चरण में मैं कुछ उदहारण देना चाहता हूँ। अकेले उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद के 11 मामलों की जांच चल रही है, जिसमें मुस्लिम युवकों पर नाम बदलकर तथा धर्मान्तरण कर हिन्दू युवतियों से विवाह करने का  आरोप है। कानपुर में ही एक युवती से पहले मुस्लिम युवक ने विवाह किया। उसके बाद जब युवती के परिवार वालों ने उसके अपहरण की शिकायत पुलिस में की, तो वह सामने आई और उसने अपनी मर्जी से दो दिन तक रेलवे स्टेशन पर बिताने की बात कही। यदि उसने मुस्लिम युवक से विवाह कर लिया था, तो वह स्टेशन पर क्यों रुकी थी? वह उस मुस्लिम युवक के घर क्यों नहीं गई? इन प्रश्नों का उत्तर मिलना शेष है। कानपुर में ही एक अन्य घटना हुई, जिसमें मुस्लिम युवक पर कम से कम 10 हिन्दू युवतियों को अपने प्रेम जाल में फंसाने का आरोप लगा। इस दौरान उसने हिन्दू नाम रखा, मंदिर गया, सभी हिन्दू मान्यताओं का पालन किया।

ऐसा नहीं है कि इस प्रकार की घटनाएं सिर्फ कानपुर या उत्तर प्रदेश में ही हुई हैं। झारखण्ड के गुमला क्षेत्र में नाबालिग दलित युवती अचानक गायब हो गई। पिता का आरोप है कि उसका धर्मांतरण कर दिया गया है। यहां भी लव जिहाद का मामला बना। ऐसा नहीं है कि सिर्फ हिन्दू संगठन ही लव जिहाद का दावा करते रहे हैं। केरल के कैथलिक बिशप काउंसिल ने 2009 में दावा किया था कि राज्य की 4,500 लड़कियों को लव जिहाद में फंसाया गया है। 2014 में ब्रिटेन की सिख काउंसिल ने दावा किया था कि वहां भी लव जिहाद के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कई मामलों में इन सब के पीछे सिमी, पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया जैसे कट्टर इस्लामिक संगठनों के नाम सामने आने से यह स्पष्ट हो जाता है कि इसे प्रेम नहीं साजिश मानना चाहिए।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं.

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