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जरुरी है अर्थहीन हो चुके कानूनों को हटाना : नरेंद्र मोदी

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नई दिल्ली (मा.स.स.). संविधान दिवस के मौके पर गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। गुजरात के केवड़िया में पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन दिया। इस मौके पर पीएम मोदी ने संविधान और कानून को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले को याद करते हुए हमले में मारे गए जवानों को याद किया। उन्होंने देशवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। केवड़िया में 80 वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के मान्य सत्र के समापन समारोह पर पीएम मोदी ने ये संबोधन दिया।

इस मौके पर पीएम मोदी ने संविधान को लेकर कहा कि हर नागरिक का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़े, ये संविधान की भी अपेक्षा है और हमारा भी ये निरंतर प्रयास है। ये तभी संभव है जब हम सभी अपने कर्तव्यों को, अपने अधिकारों का स्रोत मानेंगे, अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां बड़ी समस्या ये भी रही है कि संवैधानिक और कानूनी भाषा, उस व्यक्ति को समझने में मुश्किल होती है जिसके लिए वो कानून बना है। मुश्किल शब्द, लंबी-लंबी लाइनें, बड़े-बड़े पैराग्राफ, क्लॉज-सब क्लॉज, यानि जाने-अनजाने एक मुश्किल जाल बन जाता है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे कानूनों की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी उसको समझ सके। हम भारत के लोगों ने ये संविधान खुद को दिया है। इसलिए इसके तहत लिए गए हर फैसले, हर कानून से सामान्य नागरिक सीधा कनेक्ट महसूस करे, ये सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि समय के साथ जो कानून अपना महत्व खो चुके हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया भी आसान होनी चाहिए। बीते सालों में ऐसे सैकड़ों कानून हटाए जा चुके हैं।

इस मौके पर उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’  केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की जरूरत भी है। यह विकासात्मक कार्य को बाधित करता है और आप सभी इसके बारे में जानते हैं। हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और कार्यालय-धारक इस पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए केवल एक मतदाता सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। हम इन सूचियों पर समय और पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं?

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पूर्ण डिजिटलीकरण का समय यहां है। आम आदमी के पास हर सदन के कामकाज का डाटा होना चाहिए और देश के हर सदन के पास भी ऐसा डाटा होना चाहिए। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई आतंकी हमले को भी याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज की तारीख, देश पर सबसे बड़े आतंकी हमले के साथ जुड़ी हुई है। पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई पर धावा बोल दिया था। इस हमले में अनेक लोगों की मृत्यु हुई थी। कई देशों के लोग मारे गए थे।मैं मुंबई हमले में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

मोदी ने कहा कि आज मुंबई हमले जैसी साजिशों को नाकाम कर रहे, आतंक को एक छोटे से क्षेत्र में समेट देने वाले, भारत की रक्षा में प्रतिपल जुटे हमारे सुरक्षाबलों का भी वंदन करता हूं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित। राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए। हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि केवड़िया प्रवास के दौरान आपने सरदार सरोवर डैम की विशालता देखी है, भव्यता देखी है, उसकी शक्ति देखी है। लेकिन इस डैम का काम बरसों तक अटका रहा। आजादी के कुछ वर्षों बाद शुरु हुआ था, अभी कुछ वर्ष पहले ये पूरा हुआ। जनहित का ये प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा।

उन्होंने आगे कहा कि इसी बांध से पैदा हुई बिजली से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को लाभ हो रहा है। ये सब बरसों पहले भी हो सकता था। लेकिन बरसों तक जनता इनसे वंचित रही। जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्हें कोई पश्चाताप भी नहीं है। उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। हमें देश को इस प्रवृत्ति से बाहर निकालना है। आजादी के कुछ वर्षों बाद शुरु हुआ था, अभी कुछ वर्ष पहले ये पूरा हुआ। जनहित का ये प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा।

प्रधानमंत्री ने कोरोना के समय में चुनाव को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय में हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती दुनिया ने देखी है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव होना, समय पर परिणाम आना, सुचारु रूप से नई सरकार का बनना, ये इतना भी आसान नहीं है। हमें हमारे संविधान से जो ताकत मिली है, वो ऐसे हर मुश्किल कार्यों को आसान बनाती है। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि इस वैश्विक महामारी के दौरान भारत की 130 करोड़ से ज्यादा जनता ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है, उसकी एक बड़ी वजह, सभी भारतीयों का संविधान के तीनों अंगों पर पूर्ण विश्वास है। इस विश्वास को बढ़ाने के लिए निरंतर काम भी हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि अधिकारियों की अध्यक्षता के रूप में हमारे लोकतंत्र में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है। आप सभी, कानूनविद के रूप में, लोगों और राष्ट्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आप कार्यकारी, न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि संविधान के तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक सबकुछ संविधान में ही वर्णित है। 70 के दशक में हमने देखा था कि कैसे separation of power की मर्यादा को भंग करने की कोशिश हुई थी, लेकिन इसका जवाब भी देश को संविधान से ही मिला।

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं हर भारतीय नागरिक को संविधान दिवस की शुभकामना देना चाहता हूं। मैं संविधान बनाने में शामिल सभी सम्मानित व्यक्तियों को धन्यवाद देना चाहता हूं। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद और बाबा साहेब अंबेडकर से लेकर संविधान सभा के सभी व्यक्तित्वों को भी नमन करने का दिन है, जिनके अथक प्रयासों से देश को संविधान मिला है। आज का दिन पूज्य बापू की प्रेरणा को, सरदार पटेल की प्रतिबद्धता को प्रणाम करने का दिन है।

भारत आज अपना संविधान दिवस मना रहा है। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत के संविधान को अपनाया था। देश में 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू किया गया। 19 नवंबर, 2015 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नागरिकों के बीच संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने का फैसला लिया था।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक प्रसिद्ध समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ और न्यायविद थे और उन्हें भारतीय संविधान का जनक भी कहा जाता है। उन्हें 29 अगस्त, 1948 को संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। देश का संविधान, भारत सरकार के लिखित सिद्धांतों और उदाहरणों का समूह है जो मूलभूत, राजनीतिक सिद्धांतों, प्रक्रियाओं, अधिकारों, निर्देश सिद्धांतों, प्रतिबंधों और सरकार, देश के नागरिकों के कर्तव्यों को पूरा करता है।

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