मंगलवार , मई 18 2021 | 03:28:51 AM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / आधुनिक भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण होगा मजदूरों का योगदान

आधुनिक भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण होगा मजदूरों का योगदान

– सारांश कनौजिया

मजदूरों को कई स्थानों पर श्रमिक कहकर भी संबोधित किया जाता है। क्योंकि इनका श्रम ही इनकी ताकत है और यही श्रम इनकी हमारे समाज में आवश्यकता को बनाए हुये है। यदि आज के उद्योगों की बात करें, तो वहां काम करने वाले लोगों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है। एक जो उद्योगपति या उच्च पदों पर नियुक्त व्यक्ति हैं और दूसरा मजदूर। हमने यहां उद्योगों में काम करने वाले लगभग सभी लोगों को मजदूर ही कहा है, इसका कारण आगे लेख में स्पष्ट करने का प्रयास करुंगा। किंतु यहां इसका उल्लेख करने का मात्र एक ही लक्ष्य है। क्या आज भी बिना मजदूरों के कोई उद्योगपति अपना उद्योग चला सकता है? उत्तर न में ही होगा। विदेशों में मजदूरों की आवश्यकता कम है, लेकिन वहां भी इनका महत्व अधिक है। इस लेख को भारत पर ही केंद्रित रखते हुये भारतीय इतिहास और वर्तमान में मजदूरों की स्थिति और उनके महत्व को आप सबके सामने रखना चाहता हूं।

जब भारत गुलाम था, तो उस समय मजदूर मजबूर जरुर था, लेकिन उसका बहुत अधिक महत्व भी था। बंधुआ मजदूरी का अभिषाप था, लेकिन यह मजदूर के महत्व की भी दर्शाती थी। हर किसी संपन्न व्यक्ति को अपना काम कराने के लिये मजदूरों की आवश्यकता थी। अंग्रेजों के शासनकाल में भी यह बंधुआ मजदूरी जारी रही। देश स्वतंत्र हुआ, तो धीरे-धीरे श्रमिकों को उनके अधिकार मिलने लगे। एक समय तो ऐसा आ गया कि लोगों को लगा यदि सरकारी नौकरी मिल जाये, तो पूरा जीवन और आगे की एक पीढ़ी भी तर जायेगी। लोग सरकारों के लिये श्रम करने को बहुत बड़ी उपलब्धि मानने लगे थे। आज भी सरकारी मजदूरी करना उपलब्धि माना जाता है। हालांकि युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब प्राइवेट उद्योगों में श्रम करना अधिक लाभदायक मानता है। इसका एक कारण बड़े उद्योगों द्वारा अपने श्रमिकों को दी जाने वाली सुविधाएं हैं। यदि आपमें कोई विशेष गुण है, तो कंपनियां आपको इतनी सुविधाएं दे देंगी कि आप सरकारी नौकरी की तरफ देखना भी ठीक नहीं समझेंगे।

अभी तक जो कुछ भी मैंने लिखा, अब समय उसको विस्तार देने का है। आज मजदूर दिवस है, इसे कुछ लोग श्रमिक दिवस भी कहते हैं। श्रमिक का अर्थ सामान्यतः ऐसे लोगों से माना जाता है, जो दूसरों के लिये श्रम करते हैं। इस अनुसार वो सभी लोग जो दूसरों के लिये काम करते हैं, वो श्रमिक या मजदूर हुये। इसे दूसरे तरीके से भी समझने का प्रयास करते हैं। भारत सरकार ने मजदूरों के लिये तीन श्रेणियां बनायी हैं। अनस्किल्ड लेबर, सेमी स्किल्ड लेबर और स्किल्ड लेबर। मजदूर या श्रमिक दिवस मनाने की परंपरा जिस लेबर के लिये शुरु हुई थी, उसे अनस्किल्ड या सेमी स्किल्ड में रखा गया है। स्किल्ड लेबर सामान्यतः वो लोग होते हैं, जिनको अपने अधिकारियों के आदेशों का पालन करना होता है। उनके पास उद्योगों की योजनाओं का निर्धारण करने की शक्ति नहीं होती। वो स्वयं कोई निर्णय नहीं लेते। इस प्रकार से किसी भी उद्योग में काम करने वाले अधिकांश लोग श्रमिक ही हैं। सिर्फ उसके निवेशकों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को छोड़कर।

मजदूर दिवस जिस लेबर के लिये मनाया जाता है, आज कई स्थानों पर उसकी जगह मशीनों ने ले ली है और अनस्किल्ड लेबर की मांग बहुत कम हो गयी है। इसके बाद भी आधुनिक भारत के निर्माण में इनकी जरुरत बनी हुई है। जो सेमी स्किल्ड लेबर आज काम कर रहा है, उसमें से कई ऐसे हैं, जिन्होंने काम करते-करते उस क्षेत्र में योग्यता हासिल की और सेमी स्किल्ड लेबर बन गये। जिन मशीनों का हम उपयोग कर रहे हैं, वो अधिकांश स्थानों पर इन्हीं मजदूरों के द्वारा चलायी जा रही हैं। इसलिये मशीनों के आने के बाद भी इन मजदूरों की भूमिका भारतीय उद्योग जगत में कम नहीं हुई है, बल्कि और बढ़ गयी है। क्योंकि कोई भी कंपनी एक बार यदि किसी मजदूर को प्रशिक्षित करके उसे सेमी स्किल्ड लेबर बना देती है, तो वो उसे छोड़ना नहीं चाहती, इसका कारण उस मजदूर जैसी योग्यता का दूसरा व्यक्ति मिलना मुश्किल होता है।

सेमी स्किल्ड लेबर अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं करता, सिर्फ आदेशों का पालन करना ही उसका कार्य होता है। स्किल्ड लेबर को श्रम के साथ-साथ अपनी बुद्धि का भी आंशिक प्रयोग करना होता है। तीनों प्रकार के लेबर मिलकर ही किसी उद्योग की नींव रखते हैं, जो दिखायी नहीं देती, लेकिन उसके बिना बड़े-बड़े उद्योग खड़े नहीं हो सकते। जब वर्तमान मोदी सरकार ने कुछ नये क्षेत्रों को प्राइवेट उद्योगों के लिये खोलने का निर्णय लिया, तो प्रश्न उठा कि इन उद्योगों के पास अनुभव नहीं है। इसका उत्तर देते हुये उद्योगपतियों ने कहा कि हमारे पास ऐसे लोग हैं, जो आवश्यक उत्पादों का निर्माण बहुत अच्छी प्रकार से जानते है। उनका इशारा इन तीनों प्रकार के मजदूरों की ओर ही था। इसका तात्पर्य यह है कि मशीनी युग में भी भारतीय उद्योगपति किसी भी नये क्षेत्र में कदम रखने के लिये तैयार हैं, तो उसका कारण मशीने नहीं, आधुनिक भारत का निर्माण करने में सक्षम मजदूर हैं।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

मनुष्य के साहस व संकल्प के सामने बड़े-बड़े पर्वत तक टिक नहीं पाते : साध्वी ऋतम्भरा

नई दिल्ली (मा.स.स.). ‘हम जीतेंगे-पाज़िटीविटी अनलिमिटेड’ श्रृंखला के चौथे दिन श्री पंचायती अखाड़ा – निर्मल …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *