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रजनीकांत और माता-पिता का अपमान कर तमिलनाडु का चुनाव जीतने का प्रयास करता विपक्ष

– सारांश कनौजिया

तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में अलग हैं। जयललिता और करुणानिधि के देहांत के बाद पहली बार पूरे प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। हाल के कुछ दशकों में डीएमके और एआईएडीएमके ही तमिलनाडु की सत्ता पर आसीन होते रहे है। इस बार भी मुख्यमंत्री इन्हीं दोनों पार्टियों में से किसी एक का होगा। राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस सहयोगी दलों की भूमिका में ही रहेंगे। इस कारण जहां एक ओर कांग्रेस तमिलनाडु पर अधिक ध्यान नहीं दे रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा अपने सबसे बड़े स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी सहित सभी बड़े नेताओं को मैदान में उतार चुकी है। इसकी वजह से विपक्षी दल डीएमके में बेचैनी है। उनकी यह घबराहट गैर जरुरी और विवादित बयानों के रुप में सामने आ रही है।

भाजपा तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ, तो कांग्रेस डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। डीएमके प्रमुख स्टालिन चुनाव जीतने के लिये कुछ भी करने को तैयार हैं, जो उनकी पार्टी ने आज तक नहीं किया था, वो भी। मंदिरों और हिन्दू मान्यताओं पर आघात करने के लिये प्रसिद्ध डीएमके अब मंदिरों के रखरखाव की बात कह रही है। उसके नेता मंदिर-मंदिर जा रहे हैं। यहां तक तो फिर भी ठीक माना जा सकता है। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सहित कई और विपक्षी दल भी ऐसा करते हैं, लेकिन डीएमके नेताओं के बयान सभी मर्यादाओं को तोड़ते नजर आते हैं।

रजनीकांत भारत के अभिनय जगत में एक जाना-माना नाम है। उनके अभिनय का एक अलग ही अंदाज है। तमिलाडु में तो रजनीकांत के प्रशंसक उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। ऐसे महान अभिनेता को दादा साहब फाल्के सम्मान दिये जाने का सभी को स्वागत करना चाहिए। लेकिन विपक्षी दलों को इसमें भी राजनीति नजर आ रही है। रजनीकांत पहले राजनीति में आना चाहते थे, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वो ऐसा नहीं कर सके। आरोप लगाया जा रहा है कि रजनीकांत के समर्थकों को अपने पाले में लाने के लिये भाजपा ने उन्हें यह सम्मान दिया है। रजनीकांत ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत 1975 में की थी। अर्थात उनके पास अभिनय का 45 वर्षों से भी अधिक का अनुभव है। जब उन्हें फिल्म शिवाजी के लिये 26 करोड़ रुपये दिये गए थे, तब वो एशिया के दूसरे और भारत के पहले सबसे अधिक भुगतान पाने वाले अभिनेता बन गये थे। रजनीकांत को पहले भी अभिनय जगत में उनके योगदान के लिए कई बार राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे में सिर्फ चुनाव जीतने के लिये रजनीकांत का विरोध करना कहीं डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को ही उलटा न पड़ जाये, उन्हें इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

डीएमके के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी को समय पूर्व अवैध संबंध से पैदा हुआ बताया था। उनके इस बयान से स्वयं डीएमके नेता भी सहमत नहीं थे। इस कारण राजा पर चुनाव आयोग ने 48 घंटे के लिये प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था। चौतरफा घिरने के बाद ए. राजा को माफी मांगनी पड़ी। ऐसा नहीं है कि ए. राजा सिर्फ इकलौते गैर जिम्मेदाराना बयान देने वाले नेता हैं। नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के चक्कर में डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगा दिया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की मृत्यु नरेंद्र मोदी की प्रताड़ना के कारण हुई। उदयनिधि के इस बयान से नाराज सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी और अरुण जेटली के बेटी सोनाली ने चुनाव प्रचार के लिये अपने माता-पिता के नाम का दुरुपयोग न करने की चेतावनी जूनियर स्टालिन को दी।

ऐसे अनेक बयान हैं, जो अपनी मर्यादा की सीमा को तोड़ते हुये नजर आते हैं। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद व्यक्तिगत प्रहार की परिपाटी अधिक बढ़ी है। राहुल गांधी अक्सर इस परंपरा के ब्रांड अंबेस्डर के रुप में दिखायी देते हैं, लेकिन किसी नेता के दिवंगत माता-पिता को बीच में लाना या उन पर अभद्र बयान देना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक और बात को गंभीर समस्या माना है। न्यायालय ने राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में निःशुल्क दिये जाने वाले उपहारों की घोषणा और उसके आधार पर मतदाताओं द्वारा मतदान करने को गलत बताया है। जनता को चुनाव जीतकर सत्ता में आने पर फ्री सामान अथवा सुविधा दिलाने का प्रलोभन नया नहीं है। इसका उपयोग सभी राजनीतिक दल करते रहे हैं। लेकिन जब से ऐसी ही चुनावी घोषणाएं कर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को सत्ता मिली है। तब से कई नेताओं ने इसे चुनावी जीत का फार्मूला मान लिया है। कोर्ट के कड़े एतराज के बाद भी तमिलनाडु या किसी अन्य प्रदेश में इसका कोई असर होगा, मुझे इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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