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भाजपा के बागी प्रत्याशी लादूलाल ने लिया नाम वापस

जयपुर (मा.स.स.). राजस्थान की सहाड़ा सीट पर भाजपा के बागी लादूलाल पितलिया ने आखिर नाम वापस ले लिया।इसके पीछे भाजपा की ‘दबाव’ कूटनीति रही है जो कामयाब हो गई। असल में पितलिया का कर्नाटक में रेडिमेड कपड़ों का बड़ा कारोबार है। वहां BJP की ही सरकार है। कुछ दिनों से राजस्थान के साथ कर्नाटक के भाजपा नेता भी लादूलाल पर लगातार नाम वापसी के लिए दबाव बना रहे थे। नाम वापसी के साथ भाजपा ने राहत की सांस ली है। पिछली बार लादूलाल ने 30 हजार वोट हासिल कर लिए थे। इतने वोट जीत-हार में निर्णायक रहते हैं।

पितलिया ने नामांकन भरने से लेकर नाम वापस लेने तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। उनकी नाम वापसी के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने सहाड़ा से जीत सुनिश्चित होने का दावा किया है। नाम वापसी के बाद लादूलाल भाजपा के पक्ष में प्रचार करेंगे या नहीं, इस पर सबकी निगाह रहेगी। उनका नाम वापस कराना कितना जरूरी था, यह इसी से पता चलता है कि भाजपा ने इस काम की जिम्मेदारी कर्नाटक के राजस्व मंत्री आर. अशोक सहित कुछ विधायकों को सौंपी थी।

लादूलाल पि​तलिया के बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठानों पर छापों की चर्चाएं भी थीं। पितलिया का कथित ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह परिवार के हितों और सुरक्षा को देखते हुए नाम वापस लेने की बात कह रहे हैं। इसमें भाजपा के बड़े नेताओं के भारी दबाव की बात भी कह रहे हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया से जब इस बारे में पूछा गया तो दबाव की बात को सिरे से नकार दिया। हालांकि, ऑडियो पितलिया का है या नहीं? इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

पितलिया की नाम वापसी के बाद सतीश पूनिया ने भास्कर से कहा- लादूलाल पितलिया के नाम वापस लेने के साथ ही सहाड़ा में भाजपा की जीत तय हो गई है। पार्टी उनका पूरा मान-सम्मान रखेगी। उन्हें जिम्मेदारी देकर भी सम्मानित किया जाएगा। भाजपा की नैतिक रूप से जीत हुई है। पितलिया के फार्म भरने से जो लोग भाजपा को सहाड़ा में कमजोर प्रचारित कर रहे थे, उनकी जुबान पर भी ताला लग गया है।

पि​तलिया ने 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट मांगा था, लेकिन भाजपा ने रूपलाल को अपना उम्मीदवार बनाया था। तब नाराज होकर पितलिया ने पार्टी से बगावत करके निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और उन्हें 30 हजार वोट मिले थे। भाजपा का मानना है कि तब पितलिया की बगावत ही भाजपा की हार का कारण बनी थी। तब पार्टी से निष्कासित किए गए पितलिया को अभी 10 फरवरी को ही पार्टी में फिर से शामिल कराया गया था। पितलिया की घर वापसी के वक्त यह कहा गया था कि उनके आने से सहाड़ा उपचुनाव में पार्टी को फायदा होगा। अब बगावत के बाद पितलिया मान गए हैं।

लादूलाल पितलिया के मैदान से हटने से सहाड़ा में भाजपा की एक बड़ी चुनौती दूर हो गई है। भाजपा के रणनीतिकार पितलिया की नाम वापसी को बड़ी जीत मानकर चल रहे हैं। इससे भाजपा के कोर वोट बैंक में बिखराव रुक गया है। भाजपा के लिए वोटों में बिखराव को लेकर अब आरएलपी का उम्मीदवार चुनौती है। हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएएलपी के उम्मीदवार बद्रीलाल जाट भाजपा के वोटों में सेंध लगाने की कवायद में जुटे हैं। उनका फोकस यूथ वोटर्स पर है। बद्रीलाल जाट के भाई रूपलाल जाट 2018 का विधानसभा चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़े थे।

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