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भारत में कोरोना की रिप्रोडक्शन दर ने बढ़ाई विशेषज्ञों की चिंता

नई दिल्ली (मा.स.स.). कोरोना की तीसरी लहर हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है। जी हां, ये हम नहीं एक्सपर्ट्स कह रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमैटिकल साइंस चेन्नई के प्रोफेसर सिताभ्र सिन्हा ने दावा किया है कि देश में कोरोना की रिप्रोडक्शन वैल्यू 1 पर पहुंच गई है। बता दें कि रिप्रोडक्शन वैल्यू (R-VALUE) से वायरस के प्रजनन दर को कैलकुलेट किया जाता है। सिन्हा के मुताबिक, देश में दूसरी लहर के दौरान 7 मई को 4 लाख से ज्यादा केस आए थे, तब देश में कोरोना की रिप्रोडक्शन वैल्यू 1 थी। आज एक बार फिर हम उसी डराने वाले आंकड़े पर आकर खड़े हो गए हैं। यानी अब संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और देश तीसरी लहर की चपेट में आने वाला है। अगर R-वैल्यू 1 से नीचे आ जाती है तो हम बहुत भाग्यशाली होंगे। यानी तब देश में केस घटने लगेंगे।

सिन्हा ने आगे बताया कि पूर्वोत्तर में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा को छोड़कर अन्य राज्यों में R-वैल्यू 1 से ज्यादा है। यानी असम, मिजोरम, नगालैंड और मेघालय में यह ज्यादा है। वहीं केरल, कर्नाटक, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय मामलों का बढ़ता ट्रेंड (टॉप 20 राज्यों में से एक्टिव केस के मामले में) चिंता का विषय है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी R-वैल्यू 1 के बहुत करीब है। यानी यहां भी केस बढ़ रहे हैं। सिन्हा ने कहा कि ज्यादा चिंता की बात यह है कि मुंबई और पुणे को छोड़कर सभी प्रमुख महानगरों में R-वैल्यू 1 से अधिक है। बता दें कि दूसरी लहर में इन्हीं दोनों शहरों से मिलने वाले रोजाना कोरोना के मरीज पूरे देश को डरा रहे थे।

देश में लगातार पांचवें दिन कोरोना के 40 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। AIIMS दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि देश में वायरस की प्रजनन दर (R-वैल्यू) बढ़ रही है जो चिंता का विषय है। डॉ. गुलेरिया ने बताया कि पहले वायरस की R वैल्यू 0.99 थी जो अब बढ़कर 1 हो गई है। वायरस के प्रजनन दर में बढ़ोतरी को लेकर सतर्क होने की जरूरत है। R-वैल्यू में बढ़ोतरी का मतलब है कि कोरोना संक्रमण व्यक्ति से संक्रमण फैलने की गति बढ़ गई है। ऐसे में देश के जिन क्षेत्रों में संक्रमण दर अधिक है वहां सख्ती के साथ पाबंदियों को लागू करने पर जोर देना होगा। डॉ. गुलेरिया बताते हैं कि खसरा और चिकनपॉक्स की R-वैल्यू 8 या इससे अधिक थी। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति 8 से अधिक लोगों को संक्रमित कर रहा था। अब कोरोना भी इसी राह पर है। महामारी की दूसरी लहर में हमने देखा है कि एक व्यक्ति के चलते पूरा का पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। ऐसा चिकनपॉक्स में होता था, डेल्टा वैरिएंट के कारण भी पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में आया था।

डेटा साइंटिस्ट्स के मुताबिक R फैक्टर, यानी रीप्रोडक्शन रेट। यह बताता है कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति से कितने लोग इन्फेक्ट हो रहे हैं या हो सकते हैं। अगर R फैक्टर 0 से अधिक है तो इसका मतलब है कि केस बढ़ रहे हैं। वहीं, R फैक्टर का 1.0 से कम होना या कम होते चले जाना केस घटने का संकेत होता है। इसे इस बात से भी समझ सकते हैं कि अगर 100 व्यक्ति इन्फेक्टेड हैं और वे 100 लोगों को इन्फेक्ट करते हैं तो R वैल्यू 1 होगी। पर अगर वे 80 लोगों को इन्फेक्ट कर पा रहे हैं तो यह R वैल्यू 80 होगी। देश में 9 मई से 11 मई के बीच R-वैल्यू करीब 0.98 रहने का अनुमान जताया गया था। यह 14 मई और 30 मई के बीच घट कर 0.82 पर आ गई। यह 15 मई से 26 जून के बीच गिर कर 0.78 हो गई। R-वैल्यू 20 जून से 7 जुलाई के बीच फिर से बढ़ कर 0.88 हो गई और 3 जुलाई से 22 जुलाई के बीच और बढ़ कर 0.95 हो गई। 2 अगस्त को इसके 1 पर पहुंचने की दावा किया गया।

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