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पाकिस्तान की तरह ही तालिबान भी नहीं छोड़ सकता जम्मू-कश्मीर राग

– सारांश कनौजिया

तालिबान एक ओर जहां अफगानिस्तान की जमीन से किसी भी देश के विरुद्ध आतंकवाद न फैलने देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर पूरी दुनिया के आतंकवादियों को काबुल में बुला रहा है। जिस तरह पाकिस्तान खुद भले ही कंगाल हो जाये, लेकिन जम्मू-कश्मीर पर भ्रम फैलाना नहीं छोड़ता, उसी राह पर चलने का तालिबान ने भी निर्णय ले लिया है। अफगानिस्तान में रह रहे भारतीयों और हिन्दुओं की सुरक्षा के लिये यदि भारत सरकार को बात करनी है, तो उन्हें तालिबान के साथ ही करनी पड़ेगी। यह भारत सरकार की मजबूरी है। मैं इसे मजबूरी इसलिये कह रहा हूं क्योंकि जिस प्रकार पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ अत्याचार होने पर हमें न चाहते हुये भी इमरान खान सरकार से अपना विरोध दर्ज कराना पड़ता है, लगभग वही वातावरण अफगानिस्तान में भी बन चुका है।

आतंकी संगठन तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक साक्षात्कार में कहा कि तालिबान को जम्मू-कश्मीर के बारे में बोले का अधिकार है। उन्हें दुनिया में जहां भी मुसलमान हैं, उस जगह के बारे में बोलने का अधिकार है। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि पाकिस्तान भी कुछ इसी तरह की नीति पर चलता है। वह अपने आप को पूरी दुनिया के मुस्लिमों का ठेकेदार मानता है। वह जम्मू-कश्मीर के बारे में भ्रम फैलाता रहता है। भारतीय विपक्षी पार्टियों के द्वारा या मीडिया में भारत के किसी हिस्से में भी मुसलमानों से जुड़ी किसी दुर्घटना के बारे में बोला जाता है, तो पाकिस्तान उसे मुद्दा बनाने का प्रयास करता है। तालिबान ने भी जम्मू-कश्मीर का नाम लेकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह भी अब भारत के आंतरिक मामलों में इस्लाम के नाम पर हस्तक्षेप करने का प्रयास करता रहेगा।

पाकिस्तान की सरकार जैसी भी है, वहां की जनता के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि तालिबान ने हथियारों के बल पर सत्ता हासिल की है। अफगानिस्तान भुखमरी की बड़ी समस्या का सामना कर रहा है। सिर्फ तालिबानी आतंकवादियों के पास ही रोजगार है। तालिबान न्यूज चैनल के एंकर से बंदूक की नोक पर अपने पक्ष में समाचार पढ़वाता है। ऐसे जो लोग भी काम कर रहे हैं, उन्हें हमेशा डर रहता है कि एक गलती और तालिबानी आतंकी पूरे परिवार को दर्दनाक मौत दे सकते हैं। कुछ ऐसा ही पाकिस्तान में भी होता है, वहां सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाला कहां गायब हो जाता है, कोई नहीं जानता।

नया तालिबान और पाकिस्तान दोनों ही चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों पर कभी कुछ नहीं बोलते। यदि वे वास्तव में मुसलमानों के हमदर्द हैं, तो उन्हें उनके बारे में भी तो बोलना चाहिए। लेकिन तालिबानियों का भी पसंदीदा विषय जम्मू-कश्मीर है। पाकिस्तान भी स्वयं को आतंकवाद से पीड़ित दिखाता है और तालिबान के पास भी ऐसा करने के लिये एक नाम है आईएसआईएस – खुरासान। संभव है कि वह भी पाकिस्तान की तरह ही स्वयं को पीड़ित दिखाकर पूरे विश्व से सहानुभूति और मदद मांगे। लेकिन यदि किसी ने भी उसकी मदद की, तो उसे बदले में आतंकवाद ही मिलेगा, यह सभी को समझना होगा। भारत जहां जम्मू-कश्मीर को लेकर चिंतित है, तो वहीं विभिन्न मुस्लिम देशों को भी अंदेशा है कि तालिबान उनके लिये भी खतरा बन सकता है, इसीलिए तो तालिबान के सबसे अच्छे दोस्तों में से एक तुर्की भी उनकी सत्ता को मान्यता देने से बच रहा है। काश तालिबान का यह कश्मीरी राग, उसकी यह साजिश भारत के सभी मुसलमानों को भी समझ में आ जाये।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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