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गरीब पाकिस्तान की खरबपति सेना

इस्लामाबाद (मा.स.स.). पाकिस्तान की सेना है, जिसके पास भरपूर दौलत है. यहां तक कि दो साल पहले वर्ल्ड बैंक ने कह दिया था कि सेना को बजट में अपना हिस्सा घटाना चाहिए ताकि आम लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें. सैन्य और राजनैतिक ताकत के मामले में पाकिस्तान आर्मी अपने देश में काफी ताकतवर मानी जाती है. लेकिन ये ताकत इतने तक ही सीमित नहीं, पाकिस्तान की सेना के पास अकूत दौलत भी है. इसपर मीडिया में बहुत बार सवाल उठे लेकिन सेना के इस देश में काफी ताकतवर होने के कारण बात दब गई.

क्वार्ट्ज.कॉम के अनुसार ये आर्मी साल 2016 में ही 50 से ज्यादा व्यापारिक संस्थानों की मालिक बन चुकी थी, जिसकी कीमत 20 बिलियन डॉलर से भी कहीं ज्यादा थी. ये कीमत अब और ऊपर जा चुकी है. पेट्रोल पंप, इंडस्ट्रिअल प्लांट, बैंक, स्कूल-यूनिवर्सिटी, दूध से जुड़े उद्योग, सीमेंट प्लांट और यहां तक कि सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली बेकरीज भी सेना के हिस्से हैं. देश के आठ बड़े शहरों में हाउसिंग प्रॉपर्टी में भी सेना का सबसे बड़ा शेयर है. पाकिस्तान में सेना के हिस्से में आए ज्यादातर बिजनेस चैरिटी के नाम पर चलते हैं और उनकी टैग लाइन में कहीं न कहीं इसका जिक्र रहता है कि ये सेना द्वारा चल रहे हैं इसलिए ज्यादा ईमानदारी से काम करते हैं. सीधे सेना के जनरल इन उद्योगों से जुड़ते हैं ताकि शक की कोई गुंजाइश न रहे.

अमीर होने के बाद भी सेना अपनी कमाई का सीधा स्त्रोत और कुल कमाई बताने से बचती रही. डेलीओ.इन के अनुसार इस बात का कोई पक्का डाटा नहीं है कि सेना को बिजनेस से कितना मुनाफा हो रहा है. साल 2007 में सैन्य मामले की जानकार डॉ आयशा सिद्दीका ने कहा था कि आर्मी के पास 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत का बिजनेस है. यही डाटा साल 2016 में पाकिस्तानी संसद ने भी दिया. इससे साफ है कि कॉर्पोरेट में बदल चुकी पाक सेना अपने बिजनेस प्रॉफिट को छिपाकर रखना चाहती है. इसके अलावा यहां आर्मी लगातार बजट में भी बड़ा हिस्सा मांगती रही. साल 2018 में कुल बजट का लगभग 21 प्रतिशत पाक सेना के पास गया. इसके बाद का डाटा स्पष्ट नहीं दिया गया. माना जा रहा है कि सेना का बजट में हिस्सा लेना भी देश में गरीबी की एक वजह है. यहां तक कि साल 2019 में खुद वर्ल्ड बैंक को कहना पड़ा था कि पाकिस्तान को अपना सैन्य बजट कुछ कम करना चाहिए.

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