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सुप्रीम कोर्ट ने फिर किया स्पष्ट, विरोध के नाम पर नहीं कर सकते सार्वजनिक सड़कें ब्लॉक

नई दिल्ली (मा.स.स.). नोएडा और गाजियाबाद से दिल्ली के बीच धरना प्रदर्शन के दौरान बंद रास्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी नोएडा की रहने वाली महिला मोनिका अग्रवाल ने याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पिछले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों मे नोएडा से दिल्ली जाने की परेशानी और गाजियाबाद के कौशांबी में यातायात की अव्यवस्था पर संज्ञान लिया था।

इसके साथ ही कोर्ट ने नोएडा से दिल्ली जाने में 20 मिनट के बजाए दो घंटे लगने की शिकायत पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। इसके अलावा गाजियाबाद कौशांबी की यातायात अव्यवस्था पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली के उच्च अधिकारियों की नौ सदस्यीय कमेटी गठित करते हुए कमेटी से ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान मांगा था। दोनों ही मामलों में स्थानीय निवासी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। नोएडा निवासी महिला मोनिका अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई है कि नोएडा से दिल्ली जाना एक दु:स्वप्न जैसा है क्योंकि 20 मिनट में तय होने वाला रास्ता पार करने में दो घंटे लगते हैं। जबकि गाजियाबाद कौशांबी के मामले में कौशांबी अपार्टमेंट रेंजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और आशापुष्प विहार आवास विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

कोर्ट ने पिछले सुनवाई में कमेटी को ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार करके पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्लान तैयार करते समय सभी पहलुओं जैसे यातायात रेगुलेट करना और पब्लिक सर्विस वाहनों की पार्किंग के लिए निश्चत जगह चिन्हित करना भी शामिल है। कोर्ट ने कमेटी से अगली सुनवाई तक प्लान पेश करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि कौशांबी की यातायात समस्या सिर्फ गाजियाबाद या सिर्फ उत्तर प्रदेश की नहीं है इसमें पूर्वी दिल्ली नगर निगम को भी मिलकर काम करना होगा। आनंद विहार टर्मिनल पर दिल्ली परिवहन की बसों को भी देखने की जरूरत है। समग्र ट्रैफिक प्लान तैयार कर कोर्ट में पेश किया जाए।

सुनवाई के दौरान कौशांबी के निवासियों की ओर से ट्रैफिक की परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए कहा गया था कि इधर-उधर खड़े वाहनों और ट्रैफिक अव्यवस्था के कारण निवासी परेशान हैं। परेशानी के पांच बिंदु उठाए गए हैं। सर्विस रोड और अन्य सड़कों पर तिपहिया की पार्किंग रहना, पब्लिक सर्विस वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह न होना। यूपी परिवहन निगम की बसों के जमावड़े के कारण प्रदूषण होना, वाहनों में प्रेशर हार्नं बजना और कानून लागू करने वाले तंत्र के अनुपस्थित रहने से स्थानीय निवासियों और पैदल चलने वालों को परेशानी। हालांकि मामले में पहले से सुनवाई हो रही है और यूपी के विभिन्न प्रशासकों की ओर से भी योजना और पक्ष रखा गया था। एनजीटी ने भी आदेश दे रखे हैं। कोर्ट ने कहा कि एनजीटी के बताए उपायों को जारी रखना चाहिए लेकिन दिखाई देता है कि जमीनी स्तर पर ज्यादा बदलाव नहीं आया है।

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