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गोरखपुर में कोरोना के कप्पा वैरिएंट से पहली मौत

लखनऊ (मा.स.स). उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जून में भर्ती एक मरीज की जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच में जो रिपोर्ट आई है उसमे कप्पा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा प्लस के साथ-साथ कप्पा वैरिएंट ने भी तबाही मचाई थी। कप्पा वैरिएंट जिस मरीज में मिला था। उस मरीज की मौत जून माह में हो चुकी है। वह संतकबीर नगर जिले के उत्तरपाती गांव का रहने वाला था। उसकी उम्र 65 साल थी।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने इसकी जानकारी संतकबीर नगर जिले के सीएमओ को दे दी है। इसके बाद से उस मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री से लेकर उसके परिवार के सदस्यों की जानकारी विभाग इकट़्ठा करने में जुट गया है। संतकबीरनगर जिले में कोरोना के नए स्वरूप डेल्टा, डेल्टा प्लस और कप्पा मिलने की पुष्टि हो चुकी है। इनमें डेल्टा प्लस के एक मरीज की मौत भी हो चुकी है जबकि एमबीबीएस की छात्रा स्वस्थ्य हो चुकी है। इन सबके बीच कप्पा वैरिएंट की इंट्री ने विभाग को मुश्किलों में डाल दिया है। क्योंकि यह डेल्टा वायरस का ही बदला स्वरूप है, जो डेल्टा प्लस की तरह खतरनाक है। डेल्टा प्लस को भारत में वैरिएंट ऑफ कंर्सन घोषित किया गया है। जबकि कप्पा वैरिएंट को डब्लूएचओ ने वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित कर चुका है। इसकी वजह से शासन ने सभी मरीजों की पूरी जानकारी तलब की है। सा‌थ ही संबंधित जिले के सीएमओ को यह निर्देश ‌भी दिया गया है कि मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री से लेकर उनके परिवार के एक-एक सदस्यों की पूरी जानकारी इकट्ठा की जाए।

आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) की ओर से 30 मरीजों का जीनोम सीक्वेसिंग की जांच सात जुलाई को जारी की गई है। इनमें 27 मरीजों डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इन मरीजों का मिलान बीआरडी मेडिकल कॉलेज करने में जुट गया है। क्योंकि सारे मरीजों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में चल रहा था। कॉलेज प्रशासन अब यह जानने में जुट गया है कि डेल्टा वैरिएंट में कितने मरीजों की मौत हुई है और कितने मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। डॉ. अमरेश‌ सिंह ने बताया कि कप्पा वैरिएंट बी.1.617 वंश के म्यूटेशन से ही पैदा हुआ है, जो डेल्टा वैरिएंट के लिए भी जिम्मेदार है। बी.1.617 के एक दर्जन से ज्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं, जिनमें से दो खास हैं- ई484क्यू और एल452आर। इसलिए इस वैरिएंट को डबल म्यूटेंट भी कहा जाता है। जैसे-जैसे यह विकसित होता गया बी.1.617 की नई वंशावली तैयार होगी। बी.1.617.2 को डेल्टा वैरिएंट के नाम से जाना जा रहा है, जो कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके अन्य वंश बी.1.617.1 को कप्पा कहा जाता है।

वहीं माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि कप्पा वैरिएंट डेल्टा का ही बदला हुआ स्वरूप है। इस वैरिएंट के मिले मरीज की मौत जून माह में हो चुकी है। इसकी जानकारी कॉलेज प्रशासन को दे दी गई है। अब जून माह में भेजे गए सैंपल का इंतजार किया जा रहा है।

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