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ओ माय फ्रेंड गणेशा

– डॉ मोनिका ओझा खत्री

जीवन में आगे बढने के लिए माता-पिता के आशीर्वाद से विजय प्राप्त करने के लिए गणेश जी के आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। भगवान गणेश देवी पार्वती और भगवान शिव के बेटे है। है। ये बुद्धि और समृद्धि के भगवान है इसलिये इन दोनों को पाने के लिये लोग इनकी पूजा करते है। गणपति लोगों के जीवन से सभी बाधाओं और मुश्किलों को हटाते है साथ ही साथ उनके जीवन को खुशियों से भर देते है। कोई भी नया काम करने से पहले भारत में लोग भगवान गणेश की पूजा करते है। बच्चों के लिये सबसे प्यारे भगवान है। बच्चे प्यार से उन्हें दोस्त गणेशा कहते है। कोरोना संक्रमण के चलते भगवान गणेश इस बार ऑनलाइन ही दर्शन देंगे।

देश के सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहारों में गणेश चतुर्थी एक है। गणेश चतुर्थी इस बार दस सितम्बर को मनाई जारही है।  1893 में महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर  तिलक ने एक सार्वजनिक समारोह के रूप में महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की शुरूआत की। उनका एकमात्र ध्येय स्वतंत्रता संग्राम के संदेश को फैलाना और देश में एकता, देशभक्ति की भावना और विश्वास को प्रदान करना था। भगवान गणेश के जन्मोत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है।

हमारे देश में प्रत्येक घर में तब तक कोई शुभ काम पूरा नहीं माना जाता जब तक वहां भगवान गणेश की पूजा न हो। इसके पीछे मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इस दिन करने से फल अच्छा मिलता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता आती है।  कई लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने से भगवान गणेश खुश होते हैं और श्रद्धालूओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह दिन भगवान गणेश की पूजा, आदर और सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।

भगवान श्रीगणेश का हमारे जीवन में कितना धार्मिक महत्व यह इसी बात से समझा जा सकता है कि किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में उनका स्मरण किया जाता है। इसका कारण उनको भगवान शिव तथा अन्य देवताओं द्वारा दिया गया है वह वरदान है जो उनको अपने बौद्धिक कौशल के कारण मिला थाश्री गणेश चतुर्थी के दिन श्री विध्नहर्ता की पूजा- अर्चना और व्रत करने से व्यक्ति के समस्त संकट दूर होते है.चतुर्थी के दिन एक समय रात्री को चंद्र उदय होने के पश्च्यात चंद्र उदित होने के बाद भोजन करे तो अति उत्तम रहता है। तथा रात में चन्द्र को अर्ध्य देते समय नजरों को नीचे की ओर रखा जाता, इस दिन चन्द दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है।

कथानुसार एक बार मां पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसका नाम गणेश रखा। फिर उसे अपना द्वारपाल बना कर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गई। थोड़ी देर बाद भगवान शिव आए और द्वार के अन्दर प्रवेश करना चाहा तो गणेश ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया। इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश के सिर को काट दिया और द्वार के अन्दर चले गए। जब मां पार्वती ने पुत्र गणेश जी का कटा हुआ सिर देखा तो अत्यंत क्रोधित हो गई। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं ने उनकी स्तुति कर उनको शांत किया और भोलेनाथ से बालक गणेश को जिंदा करने का अनुरोध किया।

महामृत्युंजय रुद्र उनके अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को श्री गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। पार्वती जी हर्षातिरेक हो कर पुत्र गणेश को हृदय से लगा लेती हैं तथा उन्हें सभी देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद देती हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान देते हैं। चतुर्थी को व्रत करने वाले के सभी विघ्न दूर हो जाते हैं सिद्धियां प्राप्त होती हैं, किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी की स्मरण किया जाता है जिस कारण इन्हें विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता कहा जाता है ।

लेखिका वरिष्ठ साहित्यकार हैं

नोट : लेख में लेखक द्वारा व्यक्त विचारों से मातृभूमि समाचार का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

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