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भारत और यूरोपीय यूनियन के निकट आने से चीन को हुई परेशानी

– सारांश कनौजिया

चीन में उइगर मुसलमानों के उत्पीड़न के मामले को यूरोपीय यूनियन समय-समय पर उठाता रहता है। नरेंद्र मोदी की सरकार भारत में बनने के बाद चीन को कई बार इस मोर्चे पर मात खानी पड़ी है। इसका असर चीन और यूरोपीय यूनियन के बीच होने वाले व्यापार पर भी पड़ा है। कोरोना संक्रमण के बीच भारत और यूरोपीय यूनियन के मध्य हुई शिखर वार्ता ने चीन को चिंता में डाल दिया है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के कारण बहुत अधिक दिक्कत है। चीन सहित विश्व के विभिन्न देशों ने भारत की ओर मदद के लिये हाथ बढ़ाये। भारत ने अन्य देशों से तो मदद ली, लेकिन भारतीय विदेश मंत्री के एक निर्णय ने चीन को लेकर भारत की नीति को स्पष्ट कर दिया। इस कारण चीन को डर है कि यदि भारत और यूरोपीय यूनियन के देशों में नजदीकी बढ़ी, तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा।

चीन हर जगह अपनी दादागिरी चलाना चाहता है। वह अपने अनुसार पूरी दुनिया को बदलना चाहता है, लेकिन ऐसा शतप्रतिशत कर पाना उसके लिये अभी तक तो संभव नहीं हो सका है। चीन ने यूरोपीय देशों पर भी अपना नियंत्रण करने के उद्देश्य से उसके पांच सांसदों पर प्रतिबंध लगा दिया। इससे नाराज यूरोपीय यूनियन ने चीन के साथ निवेश संधि की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। यद्यपि कुछ जानकार इसके पीछे जर्मनी सहित विभिन्न यूरोपीय देशों के आंतरिक राजनीतिक बदलावों को मुख्य कारण मान रहे हैं। दूसरे शब्दों में समझे तो सभी यूरोपीय देश चीन के साथ व्यपारिक रिश्तों को लेकर एकमत नहीं हैं, इस कारण यूरोपीय यूनियन और चीन के बीच मित्रता अधिक आगे नहीं जा पा रही है। भारत और यूरोपीय देशों के निकट आने से यह दरार खाई में बदल सकती है।

अमेरिका ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के द्वारा कोरोनारोधी वैक्सीन पर से पेटेंट अस्थायी रुप से हटाने का समर्थन कर दिया है। यूरोपीय देश जर्मनी इसके विरोध में है, तो अन्य देश फ्रांस इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है। यदि कोरोनारोधी वैक्सीन पर से पेटेंट के नियम हटा लिये जाते हैं, तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा। चीन ने पहले विश्व को कोरोना दिया और फिर सबसे जल्दी उसकी वैक्सीन बनाने का दावा भी किया। इसके अलावा कोरोना से लड़ने के लिये मेडिकल सामान का व्यापार भी चीन ने बड़ी मात्रा में किया। उस समय आरोप लगा था कि चीन ने अपना व्यापार बढ़ाने के लिये ही कोरोना वायरस फैलाया है। फिलहाल भारत के प्रयासों के कारण यदि पेटेंट नियमों में राहत दी जाती है, तो इससे चीन के कोरोना से जुड़े सामानों को कोई नहीं खरीदेगा। तकनीक साझा कर इनका उत्पादन अन्य देश सस्ते में कर सकेंगे। यूरोपीय यूनियन के देश इस पर अभी बंटे हुये भले ही दिख रहे हों, लेकिन भारत के द्वारा यूरोपीय यूनियन को साधने का जो प्रयास हुआ है, उसके बाद खुलकर बहुत कम ही देश इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे, ऐसा माना जा रहा है।

यूरोपीय यूनियन अपने यहां विदेशी कंपनियों के निवेश को लेकर नियम और कड़े करने जा रहा है। इससे चीन और भारत सहित विभिन्न निवेशक देशों के व्यापार पर असर पड़ेगा। लेकिन ज्यादा नुकसान चीन को होगा। चीनी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखकर इस प्रकार काम करती हैं कि उनको यूरोप में उन्हें लाभ तो मिले, लेकिन नुकसान न उठाना पड़े। इस कारण इन देशों की स्थानीय कंपनियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। जर्मनी सहित विभिन्न देश परेशान हैं। ऐसा माना जा रहा है कि विशेष रुप से चीन की व्यापारिक रणनीति को देखते हुये ही ये नियम बनाये जा रहे हैं। इसका असर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का प्रयास करने वाले भारत जैसे देशों पर अपेक्षाकृत बहुत कम पड़ेगा। ऐसे ही विभिन्न अवसर आये हैं, जब यूरोपीय यूनियन के निर्णयों ने चीन को बेचैन किया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में चीन की अध्यक्षता वाली सुरक्षा परिषद की एक बैठक का बहिष्कार किया था। इसकी वजह भारत-तिब्बत सीमा पर चीन के साथ चला आ रहा सैन्य गतिरोध बताया गया। ऐसे में चीन को डर है कि यदि भारत और यूरोपीय यूनियन के रिश्ते और अच्छे हुये, तो उसके रिश्ते प्रभावित होंगे।

यूरोपीय यूनियन के देशों से अपने संबंधों में और निकटता लाने के लिये भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन स्तरों पर काम कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देश अधिकांश अवसरों पर एक साथ ही नजर आते हैं, इसलिये भारत अमेरिका के साथ मिलकर यूरोपीय देशों को साधने का प्रयास कर रहा है। यूरोपीय यूनियन के साथ हाल ही में हुई शिखर वार्ता संबंधों में निकटता के प्रयास का दूसरा प्रकार है। तीसरे नरेंद्र मोदी यूरोपीय देशों से अलग-अलग भी संपर्क में हैं, जिसका लाभ भी भारत को मिलता रहा है। चीन के साथ भी यूरोपीय यूनियन की शिखर वार्ता हो सकती है। इसमें यूरोपीय देशों का क्या व्यवहार रहता है, वह तय करेगा कि भारत-यूरोप गठबंधन कितना प्रभावी है।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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