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मुंबई में दरिंदगी से इंसानियत शर्मसार

– बाल मुकुन्द ओझा

देश में महिला सुरक्षा को लेकर किये जा रहे तमाम दावे खोखले साबित हुए है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक दिल दहला देने की लोमहर्षक और दरिंदगी की घटना ने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया है। दस साल बाद एक बार फिर मंबई के साकीनाका इलाके में 30 साल की युवती के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी हुई है। युवती के साथ रेप के बाद बर्बरता की गई है। दिल्ली की निर्भया की तरह मुंबई की निर्भया भी मौत की जंग में हार गयी। मुंबई में हुई रेप की इस घटना ने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित माने जाने वाले महानगर मुंबई में अब महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित होती जा रही हैं। पीड़िता महिला का ऑपरेशन किया गया है, लेकिन उसको नहीं बचाया जा सका। डॉक्टरों ने बताया है कि सरिया डालने के कारण महिला की आंत बाहर आ गई थी।

बताया जा रहा है कि साकीनाका में एक टेंपो के अंदर इस युवती के साथ पहले रेप किया गया और फिर उसपर हमला किया गया। यह घटना 2012 के ’निर्भया’ कांड की याद दिलाती है। घटना के कुछ ही घंटों के भीतर 45 साल के आरोपी मोहन चैहान को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है।  पुलिस के अनुसार महिला के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर डंडे से पीटा गया और आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।  प्रारंभिक जांच के अनुसार, उसके साथ बलात्कार किया गया और उसके निजी अंगों में लोहे की छड़ से हमला किया गया। आरोपी ने वहां से जाने से पहले उसे मरा हुआ समझकर सुनसान सड़क पर फेंक दिया। यह घटना उत्तर-पश्चिम मुंबई के साकीनाका इलाके के खैरानी रोड पर गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात को हुई और पुलिस ने शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे उसे खून से लथपथ बरामद किया।  पीड़िता को तुरंत घाटकोपर के बीएमसी के राजावाड़ी अस्पताल पहुंचाया।

मुंबई की शर्मनाक घटना ने देश को हिला कर रख दिया है। देश में हर 15 मिनट में एक बेटी दुष्कर्म का शिकार हो रही है। महिलाओं की सुरक्षा के तमाम दावों और वादों के बाद भी उनकी हालत जस की तस है। रोज दुष्कर्म, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और अत्याचार से रूबरू होती है हमारे देश की महिलाएं। विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी  संस्थाओं की रिपोर्टों का अध्ययन करने से पता चलता है कि देश में महिला सुरक्षा को लेकर किये जा रहे तमाम दावे खोखले साबित हुए है। देश  में यौन हिंसा के लगातार सामने आ रहे मामलों की वजह से महिलाओं के प्रति समाज के नजरिये पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

पिछले कुछ अर्से में महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार, छेड़छाड़ और शोषण जैसे अपराधों में तेजी आई है।  छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों में दर्ज होने वाले हाईप्रोफाइल मामले इसी का सबूत  हैं। ऐसा लगता है निर्भया से लेकर चंडीगढ़ तक के सफर में कहीं सुधार के लक्षण परिलक्षित नहीं हो रहे है। देश में एक बार फिर महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ के खिलाफ भारी आक्रोश के स्वर सुनाई देने लगे है। राजनीतिक दलों की कथनी और करनी से भी पर्दा उठने लगा है। महिलाओं के उत्पीड़नकर्ताओं के मन में सजा का भय ही नहीं है यही वजह है कि बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि हो रही है। महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती हिंसा की रोकथाम के लिये उठाये गए कदम कोई खास असर दिखाते नजर नहीं आ रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रतिदिन लगभग 50 बलात्कार के मामले थानों में पंजीकृत होते हैं। इस प्रकार भारत भर में प्रत्येक घंटे दो महिलाएं बलात्कारियों के हाथों अपनी अस्मत गंवा देती हैं, लेकिन आंकड़ों की कहानी पूरी सच्चाई बयां नहीं करती। बहुत सारे मामले ऐसे हैं, जिनकी थानों में  रिपोर्ट ही नहीं हो पाती। विश्व स्वास्थ संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रत्येक 54वें मिनट में एक औरत के साथ बलात्कार होता है।’ वहीं महिलाओं के विकास के लिए केंद (सेंटर फॉर डेवलॅपमेंट ऑफ वीमेन) अनुसार, ‘भारत में प्रतिदिन 42 महिलाएं बलात्कार का शिकार बनती हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 35वें मिनट में एक औरत के साथ बलात्कार होता है। कोर्ट की एक टिप्पणी के अनुसार भारतभूमि अब दुष्कर्मियों की भूमि में बदल गई, जहां हर 15 मिनट में एक दुष्कर्म होता है।

लेखक राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

नोट : लेख में लेखक द्वारा व्यक्त विचारों से मातृभूमि समाचार का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

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