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यदि हम पाकिस्तानी होते, तो क्या होता कोरोना काल में

– सारांश कनौजिया

भारत में आज भी कई लोग सत्ता परिवर्तन के लिये या शांति की तलाश में पाकिस्तान चले जाते हैं। कभी तन से तो कभी मन से। ऐसा विचार रखने वालों में एक सम्प्रदाय विशेष के लोग अधिक हैं। फिलहाल पूरा विश्व कोरोना महामारी से ग्रसित है। विपक्षी दलों सहित नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के आलोचक वर्तमान स्थिति के लिए भारत सरकार को दोषी बता रहे हैं। क्या वास्तविकता ऐसी ही है? या फिर वर्तमान परिस्थिति में हम बेहतर हैं। वैसे तो तुलना अपने से बेहतर स्थिति वाले देश से की जानी चाहिए किंतु क्योंकि कई लोग पाकिस्तान की स्थिति को भारत से बेहतर मानते हैं, इसलिये इस लेख में दोनों देशों में क्या अंतर है और क्या समानता, इस बारे में अपने विचार रख रहा हूं।

कुल कोरोना संक्रमितों के मामले में भारत इस समय विश्व में दूसरे नंबर पर आ चुका है। वहीं पाकिस्तान 31वें नंबर पर है। इस लिहाज से देखें तो पाकिस्तान भारत से अच्छी स्थिति में लगता है, लेकिन भारत और पाकिस्तान की जनसंख्या की तुलना किये बिना किसी परिणाम पर पहुंचना ठीक नहीं होगा। भारत की आबादी 139 करोड़ है, तो वहीं पाकिस्तान की जनसंख्या मात्र 22 करोड़। चीन जिसकी आबादी हमसे लगभग 5 करोड़ अधिक है, वहां पहले चरण में कोरोना को नियंत्रित करने के लिये हजारों की संख्या में शव जलाये गए थे, जबकि वहां शवों को दफनाने की परंपरा है। यदि गंभीर मरीजों की बात करें, तो भारत में लगभग 9000 क्रिटिकल मरीज है, जबकि पाकिस्तान में 4200 के लगभग। हमारे यहां 26 करोड़ लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी से भी अधिक है। पाकिस्तान ने अभी तक 1.08 करोड़ लोगों के ही टेस्ट किये हैं। जहां भारत अपनी आबादी के 19 प्रतिशत लोगों की टेस्टिंग करवा चुका है, वहीं पाकिस्तान ने लगभग 5 प्रतिशत लोगों का ही कोरोना टेस्ट करवाया है। ऐसे में यदि वहां टेस्टिंग ठीक से हो तो कोरोना से संक्रमित लोगों का सही आंकड़ा सामने आ सकता है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बहुत बुरी स्थिति है। हिन्दू बहू-बेटियों का अपहरण आम बात है। इसलिये इस अल्पसंख्यक आबादी को कोरोना से बचाने के लिये कोई कदम उठाया जा रहा होगा, इसकी संभावना नहीं है। जबकि वहीं भारत में चाहें वो टेस्टिंग हो या फिर कोरोना रोधी वैक्सीन लगाने का कार्यक्रम संप्रदाय या विचार देखे बिना काम किया जा रहा है। जितनी वैक्सीन उत्तर प्रदेश को मिलती हैं, उतनी ही वैक्सीन महाराष्ट्र को। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या अधिक है, लेकिन महाराष्ट्र में संक्रमण अधिक। इसलिये उपलब्ध वैक्सीनों का वितरण ऐसा है। भारत सरकार ने रुसी वैक्सीन को भी अनुमति दे दी है। संभावना है कि अगले एक सप्ताह के अंदर यह वैक्सीन भी लगना शुरु हो जायेगी। इसके बाद वैक्सीन की कमी कुछ हद तक दूर की जा सकेगी। भारत स्थिति को नियंत्रित करने के लिये लगातार प्रयास कर रहा है। तो वहीं पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र से दान की वैक्सीनों पर निर्भर है। चीन ने जो वैक्सीन उसे दी है, उस पर पाकिस्तानी नागरिकों को विश्वास नहीं है। दूसरा चीन की वैक्सीन बहुत कम संख्या में पाकिस्तान को मिली है। वह इनके सहारे अपनी पूरी आबादी को वैक्सीनेट नहीं कर सकता। उसके पास इसके लिये कोई प्लान नहीं है।

पाकिस्तान में रहने वाले अधिकांश मुस्लिम हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि पाकिस्तानी मुस्लिमों के लिये भी वहां की सरकार कुछ विशेष विचार नहीं कर रही, तो फिर भारत से पाकिस्तान गये मुजाहिर मुस्लिमों का क्या हाल होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। वहां अहमदिया मुस्लिमों पर जुर्म करना गर्व का विषय माना जाता, ऐसे में उन्हें कोरोना होने पर आवश्यक उपचार या वैक्सीन मिलेगी, ऐसा लगता तो नहीं है। इसलिये हम भारत में हैं, तो कोरोना से लड़ने की उम्मीद बची हुई है। हालात खराब हैं, शायद बहुत खराब, लेकिन फिर भी यह बुरा दौर निकल जायेगा, इसकी आशा की जा सकती है। पाकिस्तान में जहां न वैक्सीन है न उपचार के लिए आवश्यक संसाधन वहां से तो हम बहुत अच्छे हैं ही। इसलिये भगवान का धन्यवाद करें कि आप भारत में हैं, पाकिस्तान में नहीं।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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