रविवार , मई 16 2021 | 06:22:58 AM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / कोरोना से बचने के लिए खुद को करें लॉक या लॉकडाउन के लिये रहें तैयार

कोरोना से बचने के लिए खुद को करें लॉक या लॉकडाउन के लिये रहें तैयार

– सारांश कनौजिया

कोई भी लॉकडाउन नहीं चाहता, न सरकारें और न ही लोग। इसके बाद भी देश के कम से कम 8 राज्यों में लॉकडाउन जैसे कड़े नियम लागू किये जाने की संभावना तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे प्रतिदिन बढ़ने वाले कोरोना संक्रमण के मामले हैं। आज पूरे देश में 1.85 लाख नये केस आये हैं और यह आंकड़ा कहां जाकर रुकेगा, इस बारे में अभी कोई नहीं कह सकता है। पिछले वर्ष जब 1 लाख कोरोना मरीज प्रतिदिन नहीं आये थे, तब चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था, फिर अब कड़े नियम क्यों नहीं लागू होने चाहिए? कड़े नियम लागू होने से बचने के लिये हमें स्वनियंत्रण करना होगा, जो हम नहीं कर रहे हैं। फिर क्या किया जाना चाहिए?

जब भारत में प्रतिदिन कोरोना के मामले 1 लाख को पार कर गये, तभी से लॉकडाउन की संभावना बढ़ने लगी थी। उद्योग जगत हो या इसमें काम करने वाले कर्मचारी या फिर छोटे व्यापारी, सभी ने कहा कि लॉकडाउन लगा तो वो बर्बाद हो जायेंगे। पिछले साल आमदनी नहीं हुई, इस साल भी ऐसा हुआ तो भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। उनका मानना है लॉकडाउन लगने पर कोरोना से अधिक मौतें भुखमरी के कारण होंगी। यदि केंद्र और राज्य सरकारों ने ध्यान नहीं दिया, तो कुछ प्रदेशों में ऐसा हो सकता है। लेकिन पिछले साल हमने देखा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने अपनी क्षमता के अनुसार लोगों को खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने का प्रयास किया। कई लोगों व गैर सरकारी संस्थाओं ने भी आगे बढ़कर इस क्षेत्र में काम किया। कुछ स्थानों पर भोजन न मिलने के कारण हो सकता है किसी की मृत्यु हुई हो, लेकिन यह अपवाद स्वरुप ही होगा।

कुल मिलाकर हमने पिछले साल यह देख लिया कि कोरोना के कारण पैदा होने वाली खाद्य पदार्थों से जुड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। यह हो सकता है कि जो लोग लाखों-करोड़ों रुपये अपने रहन-सहन पर खर्च करते हैं, उन्हें आवश्यक धन न मिले। लेकिन यदि सब मिलकर प्रयास करेंगे, तो कोरोना के कारण लगने वाले कड़े नियमों से पैदा होने वाले खाद्य संकट से किसी की भी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु नहीं होगी। यदि हम सबने कोरोना प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया होता, तो शायद आज हमें कड़े नियमों या लॉकडाउन की बात नहीं करनी पड़ती। अभी भी समय है यदि हम स्वनियंत्रण लागू कर स्वयं को लॉक कर लें और घरों से अत्यंत आवश्यक होने पर ही कोरोना प्रोटोकॉलों का पालन करते हुये निकलें, तो लॉकडाउन की संभावना को टाला जा सकता है।

महाराष्ट्र में जो नियम लागू किये गए हैं, वो बहुत हद तक अनलॉक 1 जैसे ही हैं। अभी ये नियम अगले 15 दिनों के लिये लगाये गए हैं, इस कड़ाई का असर दिखने में भी एक सप्ताह तक का समय लग जायेगा। इस बार जो लोग कोरोना संक्रमित निकल रहे हैं, उनमें से ज्यादातर में प्रारंभिक कोरोना से लक्षण नहीं दिखायी देते, जबकि टेस्ट में वो कोरोना पॉजिटिव निकलते हैं। इसलिये चिंता और अधिक है। हम सभी लापरवाही कर रहे हैं, जो कोरोना को बढ़ा रहा है। जब कोई कोरोना संक्रमण से गंभीर बीमार हो जाता है, तो हमारे परिजन परेशान होते हैं। यही चिंता यदि कोरोना गाइडलाइन पालन करने के लिये की होती, तो बहुत से लोगों को बचाया जा सकता था।

कुछ लोगों का कहना है कि यदि सबको वैक्सीनेट कर दिया जाये, तो कोरोना संक्रमण कम हो जायेगा। विचार अच्छा है किंतु क्या यह व्यवहारिक है? इसका उत्तर है नहीं। पूरे विश्व की वैक्सीन यदि भारत को ही दे दी जाये, तो भी हमारे पास दोनों डोज जितनी वैक्सीन नहीं होगी। इसके अलावा वैक्सीन लगाने के लिये मेडिकल स्टाफ की जरुरत होती है। वर्तमान समय में बड़े स्तर पर मेडिकल स्टाफ कोरोना मरीजों की देखभाल में लगा है। कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित हैं। ऐसे में हमारे पास पूरे देश को एक साथ कोरोना रोधी वैक्सीन लगाने के लिये पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी नहीं हैं। केंद्र सरकार ने रुसी वैक्सीन को मंजूरी दी है। अगले कुछ दिनों में और कई वैक्सीनों को आपात प्रयोग की अनुमति देने पर विचार चल रहा है। लेकिन इसे धरातल में उतारने के लिये एक माह तक का समय लग सकता है। ऐसे में तब तक बचाव ही उपचार है। यह हम सभी को समझना ही होगा।

कई राज्यों में स्थिति खराब है, इसके बाद भी राज्य सरकारें लॉकडाउन या इसी प्रकार के कड़े नियमों को लागू करने से बच रही हैं। कई प्रदेशों के उच्च न्यायालयों ने इस पर चिंता व्यक्त की है। इलाहबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को 2 से 3 सप्ताह के लॉकडाउन पर विचार करने को कहा है। यह सिर्फ इसलिये है क्योंकि हम स्वयं को लॉक नहीं करना चाहते हैं, ऐसे में लॉकडाउन ही एक मात्र विकल्प बचता है।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

मोदी ने किसान निधि की किस्त देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना पर जताई चिंता

नई दिल्ली (मा.स.स.). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को किसान सम्मान निधि स्कीम की 8वीं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *