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चीन कभी नहीं ले सकता भारत की जगह : नेपाल

काठमांडू (मा.स.स.). नेपाल में नेपाली कांग्रेस की सरकार है। शेर बहादुर देउबा को पीएम बने 13 अगस्त को एक महीने हुए हैं। इससे पहले केपी शर्मा ओली पीएम थे। उनके पीएम रहते भारत-नेपाल के बीच संबंधों में खटास आई थी। अब नेपाली कांग्रेस ने भारत और चीन को लेकर कहा है कि चीन एक ‘स्पेशल’ पड़ोसी के रूप में भारत की जगह नहीं ले सकता। पार्टी ने लिम्पियाधुरा-कालापानी-लिपुलेख मसले को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया है। हाल ही में पीएम देउबा ने अपने गठबंधन के सहयोगियों से मिलकर साझा न्यूनतम कार्यक्रम शुरू किया है। नेपाल ने पिछले साल लिम्पियाधुरा-कालापानी-लिपुलेख इलाके को अपने मानचित्र में जोड़ते हुए इस क्षेत्र पर अपना दावा किया था।

एक मीडिया रिपोर्ट मुताबिक नेपाल के पूर्व वित्त राज्य मंत्री और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदय शमशेर राणा ने कहा है नेपाल ‘पड़ोसी पहले’ के सिद्धांत पर काम करता रहेगा। इसके साथ ही और देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखेगा। उन्होंने कहा है, ‘नेपाल को बीजिंग की ज़रूरत है और चीन हमारा अच्छा पड़ोसी रहा है लेकिन भारत स्पेशल है। चीन, भारत की जगह नहीं ले सकता।’ उन्होंने आगे कहा कि पीएम देउबा को मसलों को बेहतर से हल करना होगा क्योंकि वह एक नाजुक गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। देउबा को गठबंधन सहयोगियों को साथ लेते हुए भारत के साथ-साथ चीन के साथ स्थिर संबंध बनाए रखना होगा। नेपाल को लेकर भारत का कहना है कि नेपाल, भारत के लिए स्ट्रेटजिक महत्व रखता है। बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा है कि नई दिल्ली, काठमांडू के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को प्रतिबद्ध है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक भारत बड़े स्तर पर नेपाल के विकास में सहयोग कर रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, जल संसाधन, शिक्षा, ग्रामीण और सामुदायिक विकास आदि को लेकर जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।

कोरोना वायरस महामारी के बाद नेपाल को इकॉनमी को फिर से ट्रैक पर लाने के लिए भारत के साथ की  ज़रूरत है। नेपाली कांग्रेस के सत्ता में आते ही चीनी सरकारी मीडिया ने कहना शुरू कर दिया था कि नेपाली कांग्रेस का रुख भारत की ओर रहने वाला है। हालांकि ग्लोबल टाइम्स ने कहा था कि नेपाल और चीन के संबंध मजबूत बने रहेंगे। नेपाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के निदेशक भास्कर कोइराला बताते हैं कि भारत-नेपाल संबंधों के लिए भविष्य उज्ज्वल है।

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