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उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने 15 अगस्त पर फहराया तिरंगा

कानपुर (मा.स.स.). उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, कानपुर नगर व देहात के द्वारा संयुक्त रूप से ऑनलाइन न्यूज़ चैनल एसोसिएशन के साथ मिलकर यूनियन के कानपुर देहात अध्यक्ष अंकुर गुप्ता के किदवई नगर स्थित हिन्दुस्तान न्यूज एक्सप्रेस के कार्यलय पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया. ध्वजारोहण के उपरांत एक सगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार शिवा अवस्थी ने कहा कि पत्रकारिता जनहित में होनी चाहिए, तभी वह समाज के लिए लाभकारी होगी. मैं जब बुंदेलखंड में था, तब इस पूरे क्षेत्र की कई समस्याओं को मेरे द्वारा उठाया गया. उस समय कई लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी, लेकिन जब क्षेत्र में विकास होने लगा तो मुझे मेरे कार्य के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया. उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में डिजिटल न्यूज मीडिया को सबल बनाने पर भी बल दिया.  कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी.

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, कानपुर नगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मातृभूमि समाचार के संपादक सारांश कनौजिया ने कहा कि जब देश का विभाजन हुआ, तब हुई हिंसा के कारण हजारों लोगों की जान चली गई, लाखों लोग बेघर हो गए. इस विभाजन की विभीषिका के लिए दोषी कौन था, इस पर भी हमें विचार करना चाहिए. जिन्ना को मैं कट्टरवादी कहूंगा, उसके कट्टरवाद को बढ़ावा किसने दिया? इसके लिए कई लोग राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ को दोषी बताते हैं, लेकिन संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वयं कांग्रेसी थे. आरएसएस ने संगठन के रूप में स्वतंत्रता आन्दोलनों में भाग नहीं लिया, लेकिन उसके स्वयंसेवक सक्रिय थे. स्वयं डॉ. हेडगेवार कांग्रेस द्वारा 1920 के असहयोग आंदोलन और 1930 के जंगल सत्याग्राम में जेल गए थे. यह अलग बाद है कि कांग्रेस ने एक संगठन के रूप में सदैव तुष्टिकरण ही किया. 1921 में जब केरल के मोपला में खिलाफत आंदोलन के नाम पर दंगे हुए, तब उसमें हजारों हिन्दू मारे गए, सैंकड़ो हिन्दू महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किये गए. इस दंगे में अंग्रेजों को भी नुकसान हुआ. कांग्रेस शांत रही, लेकिन जैसे ही चौरी-चौरा की घटना हुई. कांग्रेस ने इसे हिंसा बताते हुए पूरा आंदोलन वापस ले लिया. कांग्रेस के लिए मोपला के दंगे हिंसा नहीं थी, लेकिन चौरी-चौरा हिंसा थी. उसकी इसी तुष्टिकरण की नीति ने कट्टरपंथियों को बढ़ावा दिया और देश का विभाजन हुआ.

यूनियन के महामंत्री और मातृभूमि समाचार के सह संपादक संजय सक्सेना ने कहा कि देश हमेशा अपने वीरों को याद रखेगा. कार्यक्रम संचालक अंकुर गुप्ता ने कहा कि न जाने कितने ही लोगों ने अपनी कुर्बानी दी है, तब जाकर हमें यह आजादी मिली है. कार्यक्रम में राजेश तिवारी, प्रदीप सचान, राजेन्द्र भगतानी, रमजान अली, जितेन्द्र गौतम, राजन, दिनेश चन्द्र शुक्ला, संदीप राज, संतोष यादव, अजय मिश्रा, जितेन्द्र सिंह, रोहित गौतम, प्रशांत पचौरी, हरि शरणम् बाजपेई आदि उपस्थित रहे |

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