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चीनी वायरस पर पूरा विश्व भारतीय वैक्सीन से करेगा प्रहार

– सारांश कनौजिया

कोरोना वायरस चीन से फैला, यह सत्य पूरी दुनिया जानती है। किंतु एक संदेह अभी भी बना हुआ है। चीन के वुहान की लैब से जो वायरस निकला था, वो एक गलती थी या चीन की कोई साजिश। मैं ऐसा इसलिये कह रहा हूं क्योंकि विश्व के विभिन्न देशों के द्वारा जैविक या रासायनिक हथियारों का प्रयोग कोई नई बात नहीं है। सामान्यतः इसका परीक्षण बहुत सीमित दायरे में या दुश्मन पर किया जाता है। चीन अब भी कोरोना वायरस से परेशान है, इसलिये हो सकता है कि उसका इरादा किसी जैविक हथियार को बनाना ही हो, लेकिन लैब में हुई किसी चूक के कारण इसका परीक्षण सर्वप्रथम उसकी ही जनता पर हो गया। हमारे इस दावे के पीछे का आधार चीन के द्वारा सबसे पहले कोरोना वैक्सीन बना लेने की घोषणा करना है। चीन ने पहले वायरस बनाया और फिर सबसे कम समय में वैक्सीन बनाकर उसका तोड़ दुनिया को बेचने का प्रयास किया। शायद चीन को पहले से पता था कि इस प्रकार का कोई वायरस आ सकता है। यह जांच का विषय है। चीन ने पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के जांच दल को वीजा देने में देरी लगायी। इसके बाद जब वीजा दिया, तो उन्हें कोरोना प्रोटोकाल का हवाला देते हुए क्वारंटीन कर दिया। चीन ने कई क्षेत्रों में लॉकडाउन लगा दिया है, इसलिये उम्मीद कम है कि डब्ल्यूएचओ की टीम कभी वास्तविकता जान पायेगी।

चीन यदि ईमानदारी से कोरोना वैक्सीन दे देता तो भी गनीमत थी। जगह-जगह से शिकायत आ रही है कि चीन अपनी कोरोना वैक्सीन के ट्रायल की जानकारियां नहीं दे रहा है। कुछ देशों ने तो यहां तक शिकायत की कि चीन की वैक्सीन पानी से अधिक और कुछ नहीं है। चीन के सबसे अच्छे दोस्त और भारत को अपना दुश्मन मानने वाले पाकिस्तान को भी भारतीय वैक्सीन चाहिए है। यह दावा चैंकाने वाला लग सकता है, लेकिन यह सही है। पाकिस्तानियों को चीनी वैक्सीन पर यकीन नहीं है। पाकिस्तानी मीडिया की कई रिपोर्टों में जब पत्रकारों ने अपनी जनता से सवाल किया कि क्या हमें भारत से वैक्सीन मंगाना चाहिए, तो अधिकांश लोगों ने हां में उत्तर दिया। ज्यादातर पाकिस्तानियों का मानना है कि दोनों देशों की दुश्मनी अपनी जगह है, लेकिन यदि भारत ने कोई अच्छी चीज बनायी है, तो उसे मंगाने में कोई दिक्कत नहीं है।

चीन ने अपनी कोरोना वैक्सीन पाकिस्तान के साथ ही तुर्की, इंडोनेशिया, ब्राजील, सिंगापुर व इजिप्ट सहित कई देशों को बेची है। चीन की कोरोना वैक्सीन कितनी विश्वसनीय है, इसकी एक बानगी हमने ऊपर लेख में आपको बतायी है। यह चीनी कोरोना वैक्सीन कितनी विश्वसनीय है, इसके कुछ उदाहरण और आपके सामने रखना चाहूंगा। ब्राजील के कुछ नेताओं ने पहले कोरोना और फिर उसकी वैक्सीन को बेकार की बात कहा था। इसके बाद उन्हें कुछ समझ आयी और उन्होंने चीनी वैक्सीन का ऑर्डर दिया। चीनी कम्पनी सिनोवैक से ब्राजील ने 10 करोड़ कोरोना वैक्सीन खरीदने का करार किया। जब ब्राजील सरकार ने वहां इसका ट्रायल किया, तो पता चला कि चीनी वैक्सीन सिर्फ 50 प्रतिशत ही कारगर है। इन आंकड़ों से परेशान ब्राजील ने भारतीय कोवैक्सीन की 20 लाख डोज का ऑर्डर दिया। सिंगापुर ने चीनी कोरोना वैक्सीन के प्रयोग पर रोक लगा दी है। यही हाल चीनी कोरोना वैक्सीन लेने वाले अन्य देशों का भी है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने जब से भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट की कोरोना वैक्सीनों को मंजूरी दी है, तब से चीनी वैक्सीनों की तुलना भारतीय वैक्सीनों से होने लगी है। फाइजर और  माडर्ना की कोरोना वैक्सीनें भारतीय वैक्सीनों से मंहगी हैं। इसके अलावा फाइजर की कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों के कारण इस क्षेत्र में चीन का सीधा मुकाबला भारत से है। चीन को यही बात सबसे अधिक परेशान कर रही है। विश्व के विभिन्न देशों को चीन से अधिक भारत पर भरोसा है। कोरोना वैक्सीन के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

भारत अपनी जरुरतों को देखते हुए कोरोना वैक्सीन को निर्यात करने पर विचार कर सकता है। मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कोरोना वैक्सीन के निर्यात को किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित नहीं किया है। यही कारण है कि ब्राजील को भारतीय वैक्सीन मिल भी चुकी है। इसके अलावा भारत अपने पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान को शीघ्र ही कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करा सकता है। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार नेपाल ने भारत से 1.20 करोड़ कोरोना वैक्सीन की डोज मांगी है। भूटान ने सीरम इंस्टीट्यूट को 10 लाख डोज का ऑर्डर दिया है। म्यांमार ने भी सीरम इंस्टीट्यूट से कोरोना वैक्सीन के लिये करार किया है। बांग्लादेश ने कोविशील्ड की 3 करोड़ डोज मांगी है।

अंत में एक बात और कहना चाहता हूं। चीन भारतीय वैक्सीनों की इस बढ़ती हुई मांग का विरोध जिन तथ्यों पर कर रहा है। वे और कुछ नहीं बल्कि भारत में विपक्षी नेताओं के बयान है। चीन भारतीय वैक्सीन को बेकार साबित करने के लिये कांग्रेसी नेताओं शशि थरुर व सपा प्रमुख अखिलेश यादव आदि के बयानों का उल्लेख कर रहा है। इन नेताओं ने नरेंद्र मोदी और भाजपा का विरोध करने के चक्कर में देश का ही विरोध कर दिया, जिसके उदाहरण चीन रख रहा है। आज 16 जनवरी को भारत में कोरोना वैक्सीनेशन शुरु हो गया है। मेरा मानना है कि इसकी सफलता से भारतीय वैक्सीनों पर विश्व का विश्वास और बढ़ेगा तथा चीन के दुष्प्रचार को किनारे करते हुए कई अन्य देश भी भारतीय वैक्सीनों की मांग करेंगे।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं.

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