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आखिर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण को फंसाने की क्यों पड़ी जरुरत

– सारांश कनौजिया

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नायारायण को फंसाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। इस षडयंत्र को रचने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिये भारत के सबसे बड़े न्यायालय को दखल देना पड़ा है। मामला बहुत पुराना है। फिर भी अभी तक यह हल क्यों नहीं हो सका? इससे बड़ा सवाल यह है कि एक वैज्ञानिक को फंसाने की जरुरत ही क्यों पड़ी? क्या कोई था, जिसे बचाने के लिये पुलिस ने उन्हें फंसाया? या साजिश रची ही क्यों गयी थी? इस साजिश के सहारे पुलिस अधिकारी वास्तव में हासिल क्या करना चाहते थे? ऐसे बहुत से प्रश्न हैं, जिनके उत्तर आज तक नहीं मिले।

पुलिस किसी भी व्यक्ति को क्यों फंसाती है? मेरी समझ के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला पुलिस किसी पुराने मामले को समाप्त करना चाहती हो और उसे वास्तविक दोषी न मिल रहा हो। ऐसे में पुलिस एक कहानी बनाकर किसी व्यक्ति को ही मुख्य आरोपी बताकर सजा दिलवाने का प्रयास करती है। दूसरा कारण अधिक चिंताजनक है, इसमें किसी व्यक्ति को बचाने के लिये दूसरे व्यक्ति को आरोपी बता दिया जाता है। उसके विरुद्ध सारे सबूत भी पुलिस तैयार करती है। पहले कारण में पुलिस का लक्ष्य सिर्फ अनसुलझे मामलों की संख्या कम करना होता है। लेकिन दूसरे कारण में एक सुनियोजित साजिश होती है। इसमें भ्रष्टाचार होता है।

दोनों में से कारण कुछ भी हो, लेकिन यह एक गंभीर मामला है। इसमें एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक को फंसाने का प्रयास किया गया था। किसी अन्य व्यक्ति को भी फंसाया जा सकता था, लेकिन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारयण ही क्यों? क्या कुछ लोग ऐसे थे, जो श्री नारायण को इसरो में वैज्ञानिक के रुप में नहीं देखना चाहते थे। यदि हां, तो इसके पीछे का उनका उद्देश्य क्या था? क्या इसरो के अंदर ही किसी को नांबी नारायण से खतरा था या कोई देश विरोधी ताकत उनको रास्ते से हटाना चाहती थी? इसके अलावा यदि किसी को बचाने का प्रयास किया जा रहा था या कोई पुराना मामला बंद किया जाना था, तो उसका वास्तविक दोषी कौन था? भारत की महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारियां कौन बेच रहा था।

वैज्ञानिक नांबी नारायण से जुड़ा मामला 1994 का है। उस समय के केरल के कांग्रेसी मुख्यमंत्री के. कुरुणाकरन को मामला तूल पकड़ने पर त्यागपत्र देना पड़ा था। ऐसा क्यों होता है कि देश विरोधी कई बड़ी साजिशों के तार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कांग्रेस से ही जुड़ते हैं। कांग्रेस के कई बड़े नेता जो गांधी परिवार से नहीं थे, रहस्मय तरीके से अपने सबसे अच्छे दौर में दुर्घटना का शिकार होकर मर जाते हैं। संजय गांधी एक मात्र ऐसे नेहरु-गांधी परिवार के व्यक्ति थे, जिनकी मृत्यु रहतस्मय तरीके से हुई थी। उस समय भी उनकी हत्या की आशंका व्यक्त की गई थी। इसलिये इसके पीछे कांग्रेस की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। यद्यपि उपरोक्त सभी आंकलन संभावनाओं के आधार पर व्यक्त किये गए हैं, जांच के बाद ही इनकी वास्तविकता सामने आयेगी।

मेरा मानना है कि कोर्ट के आदेश पर भारत की धरोहर नांबी नारायण को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों पर भले ही कार्रवाई हो जाये, लेकिन जब तक यह पता नहीं चलेगा कि इस साजिश के पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्या था? इतने बड़े वैज्ञानिक को ही क्यों फंसाने का प्रयास किया गया था? तब तक न्याय अधूरा रहेगा। वास्तविक दोषी कानून के लम्बे हाथों से दूर स्वतंत्रतापूर्वक घूमते रहेंगे। आशा है कि कोर्ट इस पर भी भविष्य में विचार करेगा।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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