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विद्रोहियों ने मारे पाकिस्तानी सेना के 7 जवान

इस्लामाबाद (मा.स.स.). पाकिस्तान के लिए आतंकवादी गुटों का समर्थन करना अब भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। दक्षिणी वजीरिस्तान में विद्रोहियों के साथ हुई मुठभेड़ में पाकिस्तानी सेना के 7 जवान मारे गए। इस मुठभेड़ में पांच विद्रोहियों के मारे जाने की भी खबर है। पाकिस्तानी सेना के प्रॉपगैंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बयान जारी कर बताया कि इस इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान शुरू किया गया था।

आईएसपीआर ने कहा कि इस दौरान हुई गोलीबारी में 5 आतंकवादी मारे गए और 7 सैनिकों को भी जीवन का त्याग करना पड़ा। बयान में कहा गया है कि सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और अन्य आतंकवादी को खत्म करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों पर हमलों में तेजी आई है। इस महीने की शुरुआत में, क्वेटा के मस्तुंग रोड पर एक चेक पोस्ट के पास एक आत्मघाती हमले में फ्रंटियर कॉर्प्स के कम से कम चार अधिकारी शहीद हो गए थे और 18 अन्य घायल हो गए थे। पिछले हफ्ते उत्तरी वजीरिस्तान में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) हमले में पाकिस्तानी सेना के दो जवान मारे गए थे। आईएसपीआर ने कहा था कि सुरक्षा बल जिले के दोसल्ली इलाके में एक निकासी अभियान चला रहे थे, तभी आईईडी विस्फोट हुआ। अगस्त में, बलूचिस्तान के जियारत जिले में गाड़ी के बारूदी सुरंग से टकराने से तीन जवान मारे घए गए थे और कई घायल हो गए थे।

इस मुठभेड़ को लेकर अभी तक यह नहीं बताया गया है कि इन विद्रोहियों  का संबंध कौन से गुट के साथ था। दक्षिणी वजीरिस्तान के इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के अलावा इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के आतंकी भी सक्रिय हैं। इन दिनों पाकिस्तान में  हो रहे अधिकतर आतंकी हमलों में टीटीपी का हाथ बताया जा रहा है। वहीं, आईएसआईएस भी अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2014 में पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब ने टीटीपी की कमर तोड़कर रख दी थी। तब इसके आतंकी पाकिस्तान से भागकर अफगानिस्तान चले गए थे। अब पिछले कुछ साल से ये आतंकवादी वापस पाकिस्तान लौट आए हैं और लगातार हमले कर सेना और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई राज्यों में टीटीपी के हमलों के कारण पाकिस्तानी सरकार और सेना की नींद उड़ी हुई है।

पाकिस्तान सरकार ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को 2008 में ब्लैकलिस्ट किया था। टीटीपी ने पिछले 10 साल में पाकिस्तान में कई बड़े हमले किए हैं। इस आतंकवादी संगठन का सबसे बड़ा गढ़ इमरान खान का गृह राज्य खैबर पख्तूनख्वा है। हाल में ही टीटीपी के आतंकियों ने खैबर पख्तूनख्वा में चीन के इंजीनियरों की बस पर हमला कर 13 लोगों को मार दिया था। इतना ही नहीं, इस हमले से एक दिन पहले इसी राज्य में पाकिस्तानी सेना पर हमला कर उनके एक कैप्टन और एक जवान की हत्या कर दी थी।

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