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चीन ने ऑस्‍ट्रेलिया को बताया अमेरिकी कुत्‍ता

बीजिंग (मा.स.स.). चीनी नौसेना के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऑस्‍ट्रेलिया के महाविनाशकारी परमाणु पनडुब्‍बी बनाने के ऐलान से ड्रैगन का सरकारी मीडिया आगबबूला हो गया है। चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के मुखपत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स ने अपने संपादकीय लेख में ऑस्‍ट्रेलिया को अमेरिका का पालतू ‘कुत्‍ता’ करार दिया है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि हम ऑस्‍ट्रेलिया को सलाह देंगे कि अगर वह परमाणु पनडुब्‍बी या किलर मिसाइलें हासिल भी कर लेता है तो उसके पास चीन को धमकाने के लिए ताकत नहीं है।

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा, ‘यह मायने नहीं रखता है कि ऑस्‍ट्रेलिया किस तरह से खुद को हथियारों से लैस करता है, वह अभी भी अमेरिका का एक पालतू कुत्‍ता है। उसने कहा कि ऑस्‍ट्रेलिया ने एकतरफा अमेरिका का पक्ष लेकर खुद को चीन का दुश्‍मन बना लिया है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि अमेरिका ऐतिहासिक रूप से गठबंधन सिस्‍टम बढ़ाता रहा है। ऑस्‍ट्रेलिया निश्चित रूप से चीन को लक्ष्‍य करके ही गश्‍त लगाने के लिए परमाणु पनडुब्‍बी खरीद रहा है।

चीनी अखबार ने कहा, ‘अगर ऑस्‍ट्रेलिया इसकी वजह से चीन को उकसाने का साहस करता है या सैनिक रूप से कोई गलती करता है तो चीन निश्चित रूप से बिना दया के दंडित करेगा।’ उसने कहा कि संभवत: ऑस्‍ट्रेलिया के सैनिक दक्षिण चीन सागर में जान गंवाने वाले पहले सैनिक होंगे। चीन के सरकारी भोंपू का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ऑस्‍ट्रेलिया ने अरबों डॉलर की परमाणु पनडुब्‍बी खरीदने का फैसला किया है।

यही नहीं ऑस्‍ट्रेलिया ने चीन की चुनौती का सामना करने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका के साथ आने का फैसला किया है। ये तीनों देश आपस में अडवांस्ड डिफेंस टेक्नॉलजी शेयर करेंगे। इसमें सबसे बड़ा फायदा ऑस्ट्रेलिया का होता दिख रहा है क्योंकि उसे परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी बनाने की क्षमता पहली बार मिल सकेगी। इस रक्षा मसौदे को Aukus नाम दिया गया है जिसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वॉन्टम टेक्नॉलजी से लेकर साइबर टेक्नॉलजी तक शामिल होगी।

ऑस्ट्रेलिया पहले से ही, अमेरिका, भारत और जापान के साथ क्वॉड समूह में शामिल है। उसने पहले फ्रांस के साथ 2016 में 12 पनडुब्बियों के लिए समझौता भी किया था लेकिन अब उसे रद्द कर दिया गया है। ब्रिटेन और अमेरिका के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत से परेशान है। बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलिया के PM स्कॉट मॉरिसन ने संयुक्त बयान जारी करते हुए नई साझेदारी का ऐलान किया।

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