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प्रसपा नेता ने पत्रकार से बात में देनदारी की स्वीकार, बाद में उसी पर लगाया बकाये का आरोप

कानपुर (मा.स.स.). अपने भतीजे अखिलेश यादव से शिवपाल ने अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) का गठन किया था। इस राजनीतिक दल ने कोई विशेष प्रगति नहीं की, लेकिन शिवपाल यादव के नेताओं ने लोगों को पैसा देने का वादा कर मुकरना अभी से शुरु कर दिया है।

घटना प्रसपा की कानपुर देहाद इकाई से जुड़ी हुई है। यहां प्रसपा मीडिया प्रभारी आकाश प्रजापति ने वरिष्ठ पत्रकार संजय सक्सेना को विज्ञापन प्रकाशित करने के लिये सहमति प्रदान की। उनसे कहा कि विज्ञापन प्रकाशित होते ही समाचार पत्र की प्रति लेकर आने पर उन्हें तुरंत भुगतान हो जायेगा। उन्हें प्रकाशित विज्ञापन वाला समाचार पत्र उपलब्ध कराये एक वर्ष से कहीं अधिक हो गया है।  नेता जी पीड़ित पत्रकार से बात करने में पहले देनदारी स्वीकार कर रहे थे, लेकिन जब बात बाहर आ गई, तो उलटा प्रसपा कानपुर देहात के अध्यक्ष विनोद प्रजापति दावा कर रहे हैं कि पत्रकार पीड़ित नहीं है, बल्कि आरोपी नेता के ही उन पर पैसे बकाया हैं, जिसे वो दे नहीं रहे हैं।

मातृभूमि समाचार के पास आरोपी प्रसपा नेता आकाश प्रजापति और पीड़ित पत्रकार संजय सक्सेना की कॉल रिकॉर्डिंग है, जिसमें स्पष्ट रूप से आकाश यह स्वीकार कर रहा है कि उसको विज्ञापन के पैसों का भुगतान करना है। साथ ही वह यह भी कह रहा है कि कोरोना के कारण वो पैसा नहीं दे पाया। वहीं एक दूसरी कॉल रिकॉर्डिंग में विनोद प्रजापति यह कह रहे हैं कि आकाश के पास पैसे नहीं हैं, जब वो पैसे नहीं दे रहा था, तो उसके विज्ञापन छपे ही क्यों?

इस संबंध में जब मातृभूमि समाचार ने शिवपाल यादव की पार्टी के कानपुर देहात अध्यक्ष विनोद प्रजापति से बात की तो उन्होंने पीड़ित पत्रकार पर ही आरोप लगा दिया कि उन्होंने आकाश से पैसे उधार लिए थे, अब विज्ञापन के पैसे काटकर बाकी वापस करने चाहिए, लेकिन संजय ऐसा नहीं कर रहे हैं, उल्टा उनकी पार्टी को ही बदनाम कर रहे हैं. पीड़ित पत्रकार के द्वारा जो कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गयी है, वो इसके उलट ही कहानी बयान कर रही है।

जब शिवपाल यादव के पास कोई ताकत नहीं है, तब यह हाल है। यदि अगले साल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उनके कुछ नेता विधानसभा पहुंच गए, तो पत्रकारों और आम जनता के लिए मुश्किल समय हो सकता है।

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