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डॉ. घनश्याम बादल को मिला हिंदी रत्न सम्मान

रुड़की (मा.स.स.). नगर के प्रतिष्ठित रचनाकार, कवि एवं लेखक डॉ घनश्याम बादल को अभिव्यक्ति ई प्रकाशन की ओर से हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान हेतु ‘हिंदी रत्न’ सम्मान से विभूषित किया गया है जबकि ‘मुक्तक लोक’ की ओर से उन्हें ‘वाग्देवी हिंदी सेवी’ सम्मान दिया गया है। ज्ञातव्य है कि घनश्याम बादल लगभग चार दशक से हिंदी लेखन एवं साहित्य सृजन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं और उन्होंने उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं हरियाणा में भी साहित्य सृजन में उल्लेखनीय योगदान किया है। उनकी बाल कविताओं की पुस्तकें ‘अट्टे बट्टे’ एवं ‘टप्पर टूं’  काफी चर्चित रही हैं

इसके अतिरिक्त भी उन्होंने आदर्श, सृजन एवं लक्ष्य पत्रिकाओं का संपादन भी किया है । उनके लेख देश के राष्ट्रीय एवं स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में बहुतायत के साथ प्रकाशित होते रहते हैं । वर्तमान में वें केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रुड़की में में कार्यरत हैं। अभिव्यक्ति के संपादक डॉ अनिल शर्मा ‘अनिल’ ने उन्हें बधाई देते हुए आशा व्यक्त की है कि भविष्य में भी वे और सक्रियता के साथ हिंदी के उत्थान में निरंतर योगदान करते रहेंगे। मुक्तक लोक के समन्वयक प्रोफेसर विश्वंभर नाथ शुक्ल ने लखनऊ से फोन करके  बधाई देते हुए उन्हें वाग्देवी हिंदी सेवी सम्मान  दिए जाने की सूचना देते हुए कहा कि उनकी निरंतर सक्रियता सराहनीय है तथा आने वाले समय में हिंदी साहित्य उनसे बहुत उम्मीदें रखता है।

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