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मन में छुपा है खुशियों का खजाना!

– डॉ० घनश्याम बादल

 एक था  राजा की  उसे धन से बहुत अधिक प्यार था और वह हर खुशी धन में ही तलाशता था इसी के चलते उसने भगवान वरदान मांग लिया था कि वह जिस चीज को भी छू ले वह  सोने की हो जाए । उसे लगता था कि उसके पास जब बहुत अधिक मात्रा में सोना होगा तो वह दुनिया के सबसे अमीर एवं खुश व्यक्ति होगा सोच के साथ उसने हर वस्तु को छूना शुरु कर दिया और उसके पास सोने का अपार भंडार इकट्ठा हो गया लेकिन उसे इतने सारे सोने ने खुशी के बजाय दुखी कर दिया।  क्योंकि  वह जिस भी वस्तु को छोटा वहीं सोने की हो जाती यहां तक कि उसकी अपनी बेटी सोने की मूर्ति में तब्दील हो गई, खाना छूते ही सोने का हो गया । इस कहानी से एक बात तो साफ है  कि संपन्नता का खुशी से कोई सीधा संबंध नहीं है । उससे क्षणिक खुशी मिल सकती है दुनिया भर में आपकी प्रतिष्ठा हो सकती है लेकिन आनंदअनुभूति का होना आवश्यक नहीं है।

अब खुशी है क्या ? किस आदमी को खुश रह सकते हैं ? कौन नाखुश है ? दरअसल खुशी अपने आप में एक सापेक्ष अनुभूति है । एक ही चीज होने पर या एक ही स्थिति होने पर एक व्यक्ति खुश हो सकता है और दूसरा दुखी। खुशी की कोई निश्चित परिभाषा बताना मुमकिन ही नहीं है ।  अब देखिए कबीर कहते हैं “आई मौज फकीर की, दिया जो झोपड़ा फूंक ” यानी किसी को अपनी संपत्ति को फूंक कर भी खुशी मिल सकती है। एक मनोवैज्ञानिक कहते हैं -“ख़ुशी एक अहसास हैं जो हमारे शरीर में स्पंदन, स्फूर्ति व जोश पैदा करने का काम करती है। आपने भी अहसास किया होगा कि जब कभी हम किसी अवसाद में डूबे होते हैं और अचानक हमें कोई अच्छा समाचार सुनने को मिलता है तो हमारे शरीर में तरंगे बहने लगती हैं और हमारे चेहरे पर ख़ुशी एक मुस्कान के रूप में दिखने लग जाती है।” तो कह सकते हैं कि जिसके होठों पर मुस्कान हो, चेहरे पर हंसी हो, वह खुश होगा लेकिन यहां भी किंतु परंतु हैं ।  यह मुस्कान व्यंग्य की भी हो सकती है किसी के दुखी होने पर भी किसी के होठों पर मुस्कान और आंखों में चमक दिख सकती है।  पर, क्या ऐसा व्यक्ति वास्तव में खुश है या हो सकता है ?  तो उत्तर भी स्पष्ट है कदापि नहीं ।

खुशी की कोई परिभाषा हो, या न हो किसी कसौटी  पर उसे हर कसा जा सके या न कसा जा सके मगर दुनिया ने एक दिन को‌ “हैप्पीनेस डे”  के रूप में मनाने की शुरुआत काफी पहले कर दी थी । आज यानी 20 मार्च को वही ‘हैप्पीनेस डे” है । जिसे हम अपनी भाषा में खुशी का दिन या आनंद दिवस अथवा प्रसन्नता दिवस भी कह सकते हैं । आइए एक नजर डालते हैं दुनिया भर में मनाए जा रहे वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर ।

हर साल  20 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस के रूप में मनाया जाता है ।  संयुक्त राष्ट्र ने संघ  दुनिया के सबसे गरीब राष्ट्रों में शुमार भूटान की पहल पर  2013  में यह दिवस घोषित किया था । भूटान सकल राष्ट्रीय उत्पाद के ऊपर सकल राष्ट्रीय आनंद की अवधारणा को लगातार महत्त्व देता रहा  है । भूटानलने  ही प्रसन्नता को मापने की अवधारणा शुरू की थी । एक रिपोर्ट के अनुसार यह  प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, स्वास्थ्य, सामाजिक सहयोग, आपसी विश्वास,  जीवन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता और उदारता जैसे मानकों पर तैयार की जाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस की अवधारणा भूटान की ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस संकल्पना पर आधारित है । वहां  20 मार्च को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है ताकि परिवार के लोग एक साथ रह सकें ।

इतिहास:

अंतर्राष्ट्रीय हैप्पीनेस डे की अवधारणा की कल्पना 2006 में संयुक्त राष्ट्र के न्यू वर्ल्ड ऑर्डर प्रोजेक्ट के सीईओ जयम इलियन ने की थी। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य विचार जनता के बीच एक मौलिक मानव अधिकार के रूप में खुशी को स्थापित करना है। यह संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों में से एक था पृथ्वी पर खुशी, स्वतंत्रता और मानव जाति की भलाई का जश्न मनाना। संयुक्त राष्ट्र द्वारा ख़ुशी के स्तर को छह कारकों से मापा जाता है. इसमें प्रति व्यक्ति आय, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता, भ्रष्टाचार को लेकर आम लोगों की सोच शामिल हैं। इसके अलावा सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव और प्रभावित करने वाली वजहों का भी अध्ययन किया जाता है। इसके अनुसार देशों को अंक दिए जाते हैं और उनके हिसाब से देशों की सूची बनाई जाती है । रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में समग्र विश्व खुशहाली में गिरावट आई है, जो ज्यादातर भारत में निरंतर गिरावट से बढ़ी है। 2021 के लिए  हैप्पीनेस डे की थीम है ‘हैप्पीनेस फॉर ऑल, टुगेदर यानि सभी के लिए खुशी, एक साथ।’ यह अभियान संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस आज एक वैश्विक उत्सव बन गया है।

भारत के संबंध में इस दिवस का महत्व

प्रसन्नता के स्तर को नापने वाले मानकों की माने तो भारत की अधिकतर आबादी तनावग्रसित है और संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट  के अनुसार, भारत खुशहाल देशों की सूची मे 140वें स्थान पर है । इस सूची में 156 देशों को शामिल किया गया है जिसमें फिनलैंड शीर्ष पर और नीदरलैंड दूसरे स्थान पर है जबकि अमेरिका दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होने के बावजूद खुशहाली के मामले में 19वें स्थान पर है ।प्रसन्नता के मामले में भारत की स्थिति अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान एवं बांग्लादेश से भी बहुत खराब आंकी गई है। भारत 2018 में इस‌ सूची में  में 133 वें स्थान पर था, जबकि इस वर्ष 140वें स्थान पर रहा. पाकिस्तान 67वें, बांग्लादेश 125वें और चीन 93वें स्थान पर हैं । फिनलैंड को लगातार दूसरे वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना गया है ।उसके बाद डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड और नीदरलैंड का स्थान है । दक्षिण सूडान के लोग अपने जीवन से सबसे अधिक नाखुश हैं, इसके बाद मध्य अफ्रीकी गणराज्य (155), अफगानिस्तान (154), तंजानिया (153) और रवांडा (152) हैं। ज्ञात हो कि इस सूची में भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट देखी गयी है. 2017 में भारत 4 पायदान नीचे लुढ़ककर 122वें स्थान पर पहुंचा था। गौर करने वाली बात है कि भारत में कई राज्य सरकारों ने अपने यहां खुशहाली मंत्रालय बनाये हैं। मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश के बाद अब यही पहल महाराष्ट्र में भी की जा रही यानी भौतिक प्रगति के साथ-साथ अब हमारी सरकारें भी आम आदमी की खुशी की चिंता करने लगी है जो एक अच्छी बात है।

अब सरकारें कुछ करें या ना करें इसकी चिंता आप न करें, बस आप तो खुश रहने के बहाने तलाशते रहे मौके ढूंढते रहें और जब भी हो, जैसे भी हो कभी अपने लिए तो कभी दूसरों के लिए खुश होते रहें ।  वैसे खुशी का सकारात्मक चिंतन से बड़ा गहरा नाता है । जब हमारी सोच सकारात्मक होती है तो एक आनंद की अनुभूति स्वयमेव हो जाती है । दूसरों की खुशी में खुश होना, छोटी-छोटी बातों पर बधाई देना, किसी की सफलता पर उसके घर मिठाई लेकर जाना या मिठाई खाने ही पहुंच जाना , परीक्षा में सफल हुए तो खुश, दोस्त सफल हुए तो खुश, कोई उपलब्धि प्राप्त हुई तो खुश, पापा कोई चीज खरीद कर लाए पसंद की हो न हो तो भी खुश होइए और आप कमाते हैं तो अपनों के लिए और जरूरतमंदों के लिए कुछ खरीद कर दीजिए देखिए कितनी खुशी मिलेगी। पर हां, बनावटी खुशी आप  दिखा तो सकते हैं पर वह आपको खुश नहीं करेगी । तो इस वर्ष की हैप्पीनेस की थीम ‘हैप्पीनेस विद ऑल टूगेदर’ को अपने जीवन में उतारिए और खुश होते हुए खुशियां बांटिए।

लेखक हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार हैं ।

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