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तालिबान ने भारतीय कॉन्सुलेट की ली तलाशी, हर जगह खोज रहा है सेना समर्थकों को

काबुल (मा.स.स.). अफगानिस्तान में पंजशीर से शुरू हुआ तालिबान के विरोध का सिलसिला राजधानी काबुल तक पहुंचने से तालिबानी परेशान नजर आ रहे हैं। विरोध के स्वरों को दबाने के लिए अब उसने अफगानिस्तान के इमामों से अपील की है कि लोगों को समझाकर एकजुट करें। तालिबान की चिंता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि अफगानिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रदर्शन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। तालिबान ने दो दिन पहले जलालाबाद में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां भी चलाईं, लेकिन विरोध कम नहीं हो रहा। काबुल में भी लोगों ने अफगानी झंडे के साथ प्रदर्शन किया है।

तालिबान ने दावा किया था कि किसी भी देश के दूतावास को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि तालिबान ने कंधार और हेरात में भारतीय कॉन्सुलेट की तलाशी ली है। तालिबानियों ने बुधवार को दोनों कॉन्सुलेट में पहुंचकर दस्तावेज खंगाले और वहां खड़ी कारें भी ले गए। तालिबान भले ही दावा करे कि वह किसी से बदला नहीं लेगा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में हकीकत सामने आ गई है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका या उसकी अगुवाई वाली NATO सेना का साथ देने वाले अफगानियों की खोज में तालिबान घर-घर जाकर तलाशी ले रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तालिबान ने उन लोगों की लिस्ट तैयार की जिन्हें वह गिरफ्तार करना चाहता है। साथ ही इन लोगों को धमकी दे रहा है कि वे सामने नहीं आए तो उनके परिवार के लोगों को मार दिया जाएगा या गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान पत्रकारों और उनके परिवारों को लगातार निशाना बना रहा है। ताजा मामला जर्मन न्यूज चैनल DW से जुड़े एक अफगानी पत्रकार का है। इस पत्रकार को काबुल में घर-घर जाकर तलाश रहे तालिबान ने बौखलाहट में पत्रकार के परिवार के एक सदस्य की हत्या कर दी और दूसरे को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया है। पत्रकार के परिवार के बाकी लोग पिछले महीने किसी तरह बच निकले थे। DW के डायरेक्टर जनरल पीटर लिमबर्ग का कहना है कि तालिबान की क्रूरता से पता चलता है कि अफगानिस्तान में हमारे कर्मचारी और उनके परिवार कितना खतरा महसूस कर रहे हैं। यह साफ हो गया है कि तालिबान पहले से ही काबुल और दूसरे शहरों में पत्रकारों को तलाश कर उन्हें निशाना बना रहा है।

लिमबर्ग का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में तालिबान ने DW के कम से कम तीन पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की है। आशंका है कि तालिबान ने निजी चैनल घरगाश्त टीवी के नेमातुल्ला हेमत का अपहरण कर लिया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक तालिबान ने पिछले दिनों पक्तिया घाग रेडियो के प्रमुख तूफान उमर की भी हत्या कर दी थी। तालिबान ने जर्मनी के डाई जीट अखबार से जुड़े ट्रांसलेटर अमदादुल्लाह हमदर्द की भी 2 अगस्त को जलालाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं भारत के पुलित्जर अवॉर्डी फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत भी तालिबान की गोलियां लगने से हुई थी।

तालिबान के खौफ से काबुल एयरपोर्ट पर अफरातफरी लगातार बनी हुई है। लोग देश छोड़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। एयरपोर्ट से लगातार ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जिनमें लोग अमेरिकी सैनिकों के सामने रोते-बिलखते दिख रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उन्हें अंदर जाने दें, नहीं तो तालिबान मार देगा। यहां तक कि कई लोग अपने बच्चों को दीवार के ऊपर से फेंककर एयरपोर्ट के अंदर दाखिल करवा रहे हैं।अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान का क्रूर चेहरा हर दिन सामने आ रहा है। तालिबान ने बदगीस प्रांत के पुलिस प्रमुख हाजी मुल्ला को सरेआम गोलियों ने भून डाला। हाजी मुल्ला ने कुछ दिन पहले ही तालिबान के सामने सरेंडर किया था।

इस घटना का वीडियो सामने आया है। इसमें तालिबानियों ने हाजी मुल्ला को उनके दोनों हाथ बांधकर घुटनों के बल किसी सुनसान जगह पर बैठा रखा है। तालिबानी स्थानीय भाषा में कुछ बोल रहे हैं। कुछ देर बाद हाजी मुल्ला पर दनादन गोलियां दाग दी जाती हैं। अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में हुए प्रदर्शन के बाद तालिबान ने वहां कर्फ्यू लगा दिया है। तालिबानी लड़ाके यहां सर्च ऑपरेशन चला कर पता कर रहे हैं कि उनका विरोध करने वाले लोग कौन-कौन हैं। बता दें खोस्त के लोग तालिबान के खिलाफ रहे हैं, हालांकि अब यह तालिबान के कब्जे में ही है।

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