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सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी से पश्चिम बंगाल हिंसा से जुड़ी जानकारियां

कोलकाता (मा.स.स.). पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों को लेकर सीबीआई एक्टिव हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बंगाल चुनाव के बाद हुए रेप और मर्डर केसों की जानकारी राज्य के डीजीपी से मांगी है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने डीजीपी से हत्या, हत्या के प्रयास और रेप के दर्ज मामलों की जानकारी मांगी है। इसके तहत एजेंसी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स, घटनाओं के सीक्वेंस की जानकारी, संदिग्धों और गवाहों के बयान आदि भी मांगे हैं। सीबीआई के निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने मामलों की जांच के लिए 4 स्पेशल टीमों का गठन किया है। हर टीम में 7 सदस्यों को शामिल किया गया है।

इन टीमों को सीबीआई के कोलकाता स्थित स्थानीय दफ्तर के अधिकारी सपोर्ट करेंगे। इन 4 स्पेशल टीमों का हेड जॉइन डायरेक्टर्स के पद पर तैनात अनुराग, रमनीशन, विनीत विनायक और सम्पत मीणा को बनाया गया है। इस पूरी जांच की निगरानी का जिम्मा अडिशनल डायरेक्टर अजय भटनागर को सौंपा गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को ही सीबीआई और एसआईटी को बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों की जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि रेप और मर्डर के मामलों की जांच सीबीआई करेगी और उससे इतर अन्य मामलों की जांच एसआईटी करेगी। राज्य की टीएमसी सरकार शुरू से ही सीबीआई जांच का विरोध कर रही थी, लेकिन उसे दरकिनार करते हुए हाई कोर्ट ने जांच का आदेश दिया है।

हालांकि अब ममता बनर्जी सरकार का कहना है कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेगी। टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा था कि पार्टी की ओर से शीर्ष अदालत में इस निर्णय को चुनौती दी जा सकती है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो राज्य में चुनाव के बाद हिंसा की घटनाओं की जांच सीबीआई और एसआईटी को सौंपा जाना ममता बनर्जी और उसकी सरकार के लिए झटके की तरह है। इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की 7 सदस्यों की टीम ने भी बंगाल में हिंसा की जांच की थी।

अब उच्च न्यायालय ने सीबीआई को चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान रेप और मर्डर के मामलों की जांच करने का आदेश दिया है। इसके अलावा एसआईटी को अन्य मामलों की जांच किए जाने की बात कही गई है। ममता बनर्जी सरकार की ओर से मानवाधिकार आयोग की जांच के अलावा सीबीआई और एसआईटी को भी जांच सौंपे जाने का विरोध किया था। हालांकि इसके बाद भी उच्च न्यायालय के आदेश के तहत एजेंसियों को जांच का काम सौंपा गया है।

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