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भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट दोनों ने बताया किसे नहीं लेनी चाहिए कोरोना वैक्सीन

नई दिल्ली (मा.स.स.). भारत में कोरोना वैक्सीनेशन का काम स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाने के साथ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. आम लोगों की बारी आनी अभी बाकी है. इसी बीच वैक्सीन निर्माताओं ने फैक्ट शीट जारी करके ये साफ कर दिया है कि किन किन लोगों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती.

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोवीशील्ड की फैक्ट शीट सामने आने के बाद आपको भी ये जानना चाहिए कि क्या आपका नंबर आने पर भी आपको वैक्सीन लगाई जा सकती है या नहीं. Blood Thinners यानी खून पतला करने की दवाएं ले रहे हैं तो भी वैक्सीन ना लगवाएं. इसका मतलब ये हुआ कि दिल के मरीजों के लिए वैक्सीन नहीं है. क्योंकि दिल की बीमारी के लगभग सभी मरीज खून पतला करने की दवाएं ले रहे होते हैं. डायबिटीज के भी कई मरीजों को खून पतला करने की दवाएं दी जाती हैं. जिन मरीजों को डायबिटीज़ के साथ साथ हाई ब्लड प्रेशर हो या कोलेस्ट्राल का लेवल ज्यादा हो, उन्हें भी डॉक्टरों से पूछना होगा कि क्या वो वैक्सीन लगवा सकते हैं.

यदि आप किसी ऐसी बीमारी के शिकार हैं जिससे आपकी इम्युनिटी कमजोर हो चुकी है तो आप वैक्सीन ना लगवाएं, इसका मतलब कैंसर और एचआईवी संक्रमण के शिकार मरीजों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती. यदि आपको बुखार है या किन्हीं दवाओं से एलर्जी है तो भी आप कोरोना वैक्सीन नहीं लगवा पाएंगे. इसी तरह गर्भवती महिलाएं और स्तनपान करा रही महिलाएं वैक्सीन नहीं लग सकेगी.

दिल के मरीजों के साथ साथ डॉक्टरों में भी अब संशय की स्थिति है कि क्या दिल के मरीजों को वैक्सीन दें या ना दें. दिल्ली के एम्स अस्पताल के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक – मुख्यत: दो तरह के ब्लड थिनर होते है – Mild and Severe. Mild Blood Thinner जैसे एस्परिन एंटी प्लेटलेटस होते है. ये दिल की बीमारियों के मरीजों को और डायबिटीज़ के मरीजों को दिए जाते हैं.

Severe Blood Thinner, ये हार्ट के वाल्व वाले मरीजों को दिए जाते हैं. डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक इस तथ्य पर सरकार और वैक्सीन निर्माताओं को और सफाई देनी चाहिए. जो mild blood thinner के पेशंट्स है उनके लिए वैक्सीन बहुत जरूरी है क्योंकि यही मरीज है जिन्हे कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. हालांकि severe blood thinner ले रहे मरीजों को वैक्सीन से दिक्कत हो सकती है. दरअसल जब उन्हे इंजेक्शन दिया जाता है, तो उससे खून गाढ़ा होकर जम सकता है. हालांकि दिल के मरीजों को फ्लू की वैक्सीन पहले से लगाई जाती रही है और उन्हें उससे कोई परेशानी नहीं हुई.

ICMR ने भी कोवैक्सीन को लेकर जो जानकारी दी है उसमें साफ लिखा है कि ब्लड थिनर ले रहे मरीज वैक्सीन नहीं लगवाएं. बता दें कि 20 जनवरी की शाम तक पूरे देश में 7 लाख 86 हज़ार हेल्थ केयर वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है. कोरोना वैक्सीनेशन का बुधवार को पांचवा दिन था.

हाल ही में वैक्सीन लगने के बाद दो हेल्थ केयर वर्कर की मौत हार्ट अटैक से हुई है. इसके बाद कुछ लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर डर और पुख्ता हुआ है. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि ये मौतें वैक्सीन की वजह से नहीं हुई. लेकिन मेडिकल साइंस जानने वाले ये समझ सकते हैं कि मौत की वजहों का पता लगाना इतना आसान भी नहीं होता और पुख्ता तौर पर मौत की वजह बताई भी नहीं जा सकती.

Vaccines Manufacturer द्वारा जारी इस factsheet और खासकर इसकी टाइमिंग के ऊपर काफी सवाल उठ रहे है. हाल ही में इस बात को लेकर भी विवाद हुआ कि अगर किसी को वैक्सीन  लगने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ जाए या किसी की मौत हो जाती है तो ऐसे में हर्जाना सरकार देगी या वैक्सीन निर्माता. लगता है कि उसी चक्कर से बचने के लिए Fact Sheet में साफ कर दिया गया है कि कौन लोग वैक्सीन लगने से बीमार हो सकते हैं.

जानकारी के मुताबिक भारत में तकरीबन 5 करोड़ लोग दिल की बीमारी के शिकार हैं. हर साल तकरीबन 20 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारी से हो जाती है. ऐसे में दिल की बीमारी के मरीज ये जरूर जानना चाहते हैं कि कोरोना की वैक्सीन उन्हें बचाएगी या दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा देगी. लेकिन इस बारे में अभी तक कोई साफ जवाब ना सरकार की ओर से आया है ना वैक्सीन निर्माताओं की ओर से. हालांकि फैक्ट शीट दिल के मरीजों के लिए साफ चेतावनी दे रही है.

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