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बहन का सृजन : सुरक्षित रक्षाबंधन !

डॉ० घनश्याम बादल

हर साल सावन की पूर्णिमा को बहन भाई की कलाई पर राखी से रक्षा का एक ऐसा बंधन तैयार कर लेती है जो ताउम्र भाई बहन के बीच पवित्रता का अटूट रिश्ता बना देता है । यही है भारत का  रक्षाबंधन जिसे, राखी , श्रावणी और सलूनो के नाम से  भी जाना जाता है  । यह अनूठा त्यौहार अपने साथ भाई बहन  के प्यार  की भावनाएं और रक्षा का वचन  एक साथ लेकर आता है ।

चाहिएं कीमती तोहफे 

पर आधुनिक बहनें अब भाई की कलाई पर एक धागा मात्र बांध कर अपनी रक्षा का वचन नहीं लेती नहीं वरन् उसे महंगी डिजाइनर राखी बांधकर अपनी रक्षा के साथ साथ कीमती तोहफे की मांग भी करती हैं । इस तरह रक्षाबंधन पर अब फैशन और भौतिकतावाद हावी हो रहा है।

घातक  चीनी राखियां

आज रक्षाबंधन के पर्व भी बाजार और व्यापार असर डाल रहे हैं । बाजार आज डिज़ानर राखियों की मदद से भाई बहन के संबंधों को भी भुना रहा है वहां एक से बढ़कर एक महंगी और डिजानर राखियां मौजूद हैं । अब तो राखी भी ‘स्टेट्स’ सिंबल बन गयी है । एक ओर अमीर लोग महंगी राखियां खरीदते हैं तो दूसरी ओर सस्ते के चक्कर में चीनी राखियां खरीदी जाती  हैं जो खतरनाक भी हो सकती हैं । कैसे आइए देखते हैँ –

इन दिनों  बाजारों में कई तरह  की राखियां उपलब्ध हैं । कुछ राखियां स्वास्थ्य के लिए घातक भी साबित  हो सकती हैं और परिवार की खुशियों में खलल डाल सकती हैं।

हायहाय महंगाई

महंगाई की मार से परेशान लोग अब सस्ते चीनी माल को तरजीह दे रहे हैं। अच्छी‍ व सुंदर चीनी राखी महज दस-पंद्रह रुपए में मिल जाती है, तो फिर देसी राखी कोई भला क्यों खरीदेगा। पहले तो हाथ से बनने वाली राखियों की खूब बिक्री होती थी, लेकिन ग्राहक के बदलते नजरिए की वजह से हाथ से बनी राखियां आज बहुत कम रह गई हैं।

नयौतें  बीमारियां

कम लागत में ज्यादा  कमाई और कारोबारी प्रतिस्पर्धा के दौर में राखी का कारोबार भी व्यावसायिक हो गया है । विशेषज्ञों की मानें तो  चीनी राखियों को तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले उत्पादों में प्रयोग होने वाले  रसायन त्वचा के साथ दूसरे कई रोगों को आमंत्रण देते हैं। इससे चर्म रोग, दिमागी परेशानी, आंखों की बीमारी और पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। पर, सब जानते हुए भी बाजार में चीन का जलवा कायम है। चीन से तैयार राखियां तो  अब नहीं आ रहीं, पर वहां से आने वाले कच्चे  माल से स्थानीय स्तर पर राखियां तैयार की जा रही हैं। यही राखियां इन दिनों बाजार में छाई हुई हैं। पर बेहतर हो कि हम इस पावन पर्व पर बीमारियों को न न्यौतें ।

क्याक्या है खतरनाक

चीन से आने वाले उत्पादों में टैडी बीयर, लाइट वाले प्लास्टिक के छोटे खिलौने, रंग-बिरंगे प्लास्टिक  और कच्चे धागे, प्लास्टिक के मोती-मूंगा, शीशा और ऐसे ही कई दूसरे उत्पाद शामिल हैं। इन्हें तैयार  करने में कई तरह के हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है। प्रतिस्पर्धा के कारण रसायनों की  गुणवत्ता निम्न स्तर की होती है। कई रंग भी इसके जहर को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। इन्हीं का उपयोग राखियों में किया जा रहा है।

बच्चे और राखी के रसायन

बच्चों में राखियां बांधने और बंधवाने का ज्यादा शौक होता है। इन रसायनों का बच्चों पर जल्दी प्रभाव पड़ता है और त्वचा के साथ ही खाने-पीने की चीजों के  साथ ये बच्चों के पेट तक पहुंच जाते हैं। ये रसायन छोटे बच्चों के लिए जहरीले साबित हो सकते हैं। पहले राखियों में सूत के धागों, कागज, मोटी  पॉलिथीन और फोम का उपयोग किया जाता था। इसके बाद विभिन्न तरह की लकड़ी, तुलसी, चंदन और  ऐसी ही कई चीजों का चलन बढ़ा, पर आजकल प्लास्टिक का चलन ज्यादा है। इनसे बच्चों में जी मितलाना, उल्टी, दस्त, बुखार या ऐसी ही कोई समस्या दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर को  दिखाना चाहिए।  लोगों को चाहिए कि राखी की खरीदारी करने से पहले वे यह संतुष्टि कर लें कि वह बच्चों के स्वास्थ्य के  लिए घातक साबित न हो।

 खुद बनाएं सुरक्षित राखी

राखी से सजे बाजारों में हर किसी का मन राखी खरीदने को ललचाता है। लेकिन जरूरी नहीं कि आप राखी बाजार से ही खरीदें। आपकी थोड़ी-सी मेहनत और थोड़ी-सी सृजनात्मकता से आप घर पर ही कई प्रकार की सुंदर राखियाँ बना सकती हैं। ये राखियाँ खूबसूरत तो होंगी ही साथ ही अपने लोगों से आपको खूब प्रशंसा भी मिलेगी ।

मोती  चावल की राखी

सामग्री :  कुछ  चावल के दाने, मोती जड़े नग, अलग-अलग कलर के कपड़े के टुकड़े, गोंद अथवा फेविकोल,  और रेशमी धागा।

वि‍धि :  चावल के दानों को चार-चार की फूल वाली‍ डिजाइन में रखकर फेविकोल की सहायता से आपस में चिपका लें। उसके ऊपर मोती जड़ा नग भी चिपकाएँ। अब कपड़े को फूल के आकार में काटकर उस पर तैयार चावल की डिजाइन वाली राखी चिपका दें। कपड़े के नीचे फूँदे वाला रेशमी धागा फेविकोल की सहायता से चिपका दें। तैयार चावल की रा‍खी को अपने भाई के कलाई पर सजाएँ।

जरी की राखी

सामग्री :  जरी, गोटा, कलरफुल रेशमी धागे, मोती जड़े नग, तरह-तरह के बारीक व बड़े मोती।

विधि :  सारी सामग्री जुटा कर रेशमी धागे में सुई की सहायता से बड़े मोती को पिरोकर उसके आसपास जरी लपेटकर दोनों तरफ छोटे मोती लगा कर गांठ बाँध दें। तैयार है  अपने ‍प्यारे भाई की कलाई पर तजने के लिए फैंसी जरीवाली राखी ।

रेशम की राखी

सामग्री : रेशमी डोरियाँ, जरी धागा, पतला स्पंज, सितारे, मोती, रंगीन कागज, गोद अथवा फेविकोल।

विधि :  रेशम की डोरी को पहले चोटी की तरह गूँथ लीजिए। इसके दोनों सिरों को बंद करने के लिए जरी का धागा इस पर सफाई से लपेट दीजिए। आपकी राखी का बेस तैयार है।

इस बेस पर स्पंज की पतली परत चिपकाएँ। स्पंज को उसी आकार में काटें जिस आकार में जड़ाऊ सितारे चिपकाना चाहती हैं। इसके ऊपर गोंद या फेवीकोल की सहायता से रंग-बिरंगा कागज चिपकाएँ। ऊपर से मनचाहे सितारे या मोती चिपका दें। लीजिए तैयार है आपके प्यारे भाई के कलाई पर  बंधने क् लिए रेशम की राखी।

 रजत राखी

सामग्री : एल्युमिनियम अथवा पीतल से निर्मित फूल, रेशमी धागा ।

विधि : घर पर राखी बनाने के लिए बाजार में तैयार एल्युमिनियम और पीतल के साँचों में ढ़ले फूल मिलते हैं जिन पर चाँदी का पानी चढ़ा होता है। उन्हें रेशमी धागे की सहायता से गूँथ लें। तैयार सिल्वर राखी को  अपने पास रह रहे या दूर परदेस में बैठे अपने भाई की कलाई पर सजाएँ।

क्ले की राखी

सामग्री :  रेशमी डोरी, अलग-अलग रंगों के क्ले, जरी धागा, पतला स्पंज, रंगीन कागज, गोंद अथवा फेविकोल।

विधि :  रेशमी धागों को अच्छी तरह से मरोड़ लें। फिर धागे के दोनों सिरे को मनचाहे रंग के रेशम या जरी से बाँध दीजिए। अब क्ले की सहायता से मनचाहे आकार के मोरपंख, सुंदर से फूल बनाएँ। उनको सुखाकर राखी के बेस पर पहले स्पंज व रंगीन कागज चिपकाकर लगा दें। फिर क्ले से बनाए फूल चिपका दीजिए। यह सुंदर सी राखी आपके कलाई पर खूब जंचेगी।

लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं

नोट : लेख में लेखक द्वारा व्यक्त विचारों से मातृभूमि समाचार का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

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