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तालिबान ने 50 लाख डॉलर के इनामी आतंकवादी हक्कानी को सौंपा सुरक्षा का जिम्मा

काबुल (मा.स.स.). अफगानिस्तान की जमीन पर दशकों से खूनी खेल खेलने वाले तालिबान ने शांति की दुहाई देना तो शुरू कर दिया लेकिन उसकी हरकतों से नहीं लग रहा कि वह शांति कायम करने की राह पर है। इस कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन ने राजधानी काबुल की कमान हक्कानी नेटवर्क को सौंप दी है जिसकी नजदीकियां अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों से हैं और खुद कई घातक हमलों को अंजाम दे चुका है। इस कदम से एक बार फिर साफ हो गया है कि अफगानिस्तान की जमीन पर आतंकी संगठनों को ना पलने देने का तालिबान का दावा तो दिखावा है ही, पाकिस्तान का भी इसमें पूरा दखल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान की नैशनल रीकंसीलियेशन काउंसिल के अध्यक्ष अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने खलील अल-रहमान हक्कानी से मुलाकात की थी। इसके बाद अब्दुल्लाह ने ऐसे संकेत दिए थे कि हक्कानी काबुल की सुरक्षा देखेंगे। उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया था कि काबुल के लोगों को सही से सुरक्षा पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। इसके कुछ घंटों बाद तालिबान ने ‘अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात’ का ऐलान किया था। संगठन के नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात भी की थी।

दूसरी ओर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है कि क्या अल-कायदा का एक बार फिर अफगानिस्तान की जमीन पर स्वागत किया जा रहा है। अमेरिका के साथ दोहा में हुई बातचीत में तालिबान ने वादा किया था कि विदेशी जिहादियों को देश की जमीन पर पनपने नहीं दिया जाएगा। यह भी सवाल किया जा रहा है कि क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान को चला रहा है? हक्कानी नेटवर्क पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम तक लगा रखा है।

दरअसल, हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान से ही ऑपरेट किया जाता है और पूरा सहयोग भी मिलता है। वजीरिस्तान में इसके कैंप भी हैं जहां इसके लड़ाकों को ट्रेनिंग दी जाती है। पहले भी इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि पाकिस्तान यही चाहता है कि हक्कानी नेटवर्क को तालिबान शासन में अहम स्थान मिले। इसके जरिए पाकिस्तान अफगानिस्तान में पूरा दखल चाहता है। उसकी कोशिश है कि वह अपनी जमीन से आतंकी कैंप पड़ोसी मुल्क में भेजकर खुद FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आ सके।

हक्कानी परिवार अफगानिस्तान के दक्षिणपूर्वी हिस्से से आता है जो पाकिस्तान की सीमा के पास है। इस संगठन के ऊपर अफगानिस्तान में कई घातक आतंकी हमलों के आरोप हैं। साल 2008 में काबुल के सेरेना होटेल, साल 2012 में खोस्त, साल 2017 में काबुल हमलों से लेकर 2008 में अमेरिकी पत्रकार की किडनैपिंग तक कई आरोप इस संगठन पर लगे हैं। 1980 में यह रूसी सेना के खिलाफ खड़ा हुआ था और जब ओसामा बिन लादेन ने अल-कायदा की स्थापना की तो दोनों संगठन एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ते रहे।

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