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कांग्रेस के 23 नेता चाहते थे तुरंत तय हो राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम, नहीं बनी बात

नई दिल्‍ली (मा.स.स.). नए अध्‍यक्ष का चुनाव, आगे की रणनीति समेत कई सवालों के जवाब तलाशने को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक शुक्रवार को हुई। वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्‍ठ नेता जुड़े और फिर एक लंबी चर्चा का दौर शुरू हुआ। साढ़े तीन घंटे की मीटिंग के दौरान कई बार गहमागहमी की स्थिति बनी। एक वक्‍त तो ऐसा आया जब ग्रुप-23 (असहमति जाहिर कर चुके नेताओं का समूह) में शामिल नेताओं ने फौरन संगठन के चुनाव कराने की मांग रखी। इसपर गांधी परिवार के करीबी नेता भड़क गए। दोनों ओर से तर्कों के तीर छोड़े गए मगर आखिर में फिर एक तारीख मिल गई… जून 2021। पार्टी ने तय किया कि तबतक नया अध्‍यक्ष चुन लिया जाएगा मगर उससे पहले पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव निपटाने हैं।

CWC की मीटिंग में गुलाब नबी आजाद, आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक और पी चिदंबरम जैसे सीनियर नेताओं ने कथित रूप से फौरन संगठन के चुनाव कराने की मांग की। इनमें से कुछ उन 23 नेताओं में शामिल थे जिन्‍होंने सोनिया को चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। एनडीटीवी रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर नेताओं की इस डिमांड का कथित रूप से गांधी परिवार के करीबी नेताओं ने विरोध किया। इनमें अशोक गहलोत, एके एंटनी, अमरिंदर सिंह, ओमान चांडी शामिल रहे। इन्‍होंने कहा कि कांग्रेस अध्‍यक्ष का चुनाव पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव के बाद होना चाहिए। आखिर में इसी ग्रुप की बात मानी गई यानी चुनाव मई तक टाल दिए गए।

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बिहार विधानसभा चुनाव और कुछ राज्यों के उप चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के सक्रिय अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग फिर उठाई। वैसे, कांग्रेस नेताओं का एक बड़ा धड़ा लंबे समय से इस बात की पैरवी कर रहा है कि राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस की कमान संभालनी चाहिए।

शुक्रवार को मीटिंग के बाद मीडिया के सामने आकर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मई में चुनाव का प्रस्‍ताव था। उन्‍होंने कहा कि “सीडब्‍ल्‍यूसी के सभी सदस्‍यों ने एकमत से अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से अपील की कि पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए नए अध्‍यक्ष के चुनाव कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव किया जाए। CWC ने तय किया कि जून 2021 तक हर हाल में पार्टी का नया अध्‍यक्ष चुन लिया जाएगा।”

सुरजेवाला ने बताया कि CWC मीटिंग में तीन प्रस्‍ताव पास हुए। उन्‍होंने कहा, “पहला प्रस्‍ताव आंदोलनरत किसानों को लेकर है। CWC ने यह नोट किया कि मोदी सरकार एक षडयंत्रकारी तरीके से किसानों को देशद्रोही साबित करने में लगी हुई है। पार्टी ने मांग की कि फौरन तीनों कानूनों का वापस लिया जाए। दूसरा प्रस्‍ताव कोरोना वैक्‍सीन के बारे में था। जिसमें वैज्ञानिकों और हेल्‍थ वर्कर्स का धन्‍यवाद किया गया। मगर फिर ये चिंता व्‍यक्‍त की गई कि तीन करोड़ हेल्‍थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को छोड़कर बाकी लोगों को टीकाकरण का सरकार के पास कोई प्‍लान नहीं है।” समाज के दबे-कुचले और पिछड़े तबकों को मुफ्त टीके की मांग भी पार्टी ने रखी। CWC में खुले बाजार में कोविड टीका बेचने की अनुमति देने को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया गया।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्‍वामी की कथित लीक वॉट्सऐप चैट्स का मुद्दा भी CWC में खूब गूंजा। पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं ने मांग उठाई कि इसकी संयुक्‍त संसदीय समिति जांच करे। सुरजेवाला ने कहा, “जिस प्रकार राष्‍ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है, जिस प्रकार से पूरे सरकारी ढांचे की गोपनीयता को तहस-नहस किया गया, उसकी संयुक्‍त संसदीय समिति के द्वारा जांच हो।” उन्‍होंने कहा, “जो लोग सत्‍ता में रहकर राजद्रोह के दोषी हैं और जो उनके मित्र हैं जिनको ये सूचना दी गई थी, उनके खिलाफ मुकदमा चले चाहे वह प्रधानमंत्री पद पर बैठा व्‍यक्ति ही क्‍यों न हो।”

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