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कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए उ.प्र. में बंद किये गए स्कूल

नई दिल्ली (मा.स.स.). कोरोना वायरस के प्रसार से हालात फिर खतरनाक होते जा रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक समेत पांच राज्यों ने भारत में संक्रमण को बेकाबू कर दिया है। इन राज्यों में ही अकेले 80 फीसद से अधित नए मामले हैं। देश में पिछले 24 घंटे में में कोरोना के 40 हजार से अधिक नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1.16 करोड़ हो गई हुई। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, जबकि कुल ने लॉकडाउन की घोषणा की है। इसके अलावा स्कूलों में होने वाली ऑफलाइन क्लासेज को एहतियातन बंद कर दिया गया है।

कोरोना की रफ्तार को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में 31 मार्च लॉकडाउन लगाया है। इसके अलावा पुणे, औरंगाबाद और अमरावती समेत कई जगहों पर नाइट कर्फ्यू लगा हुआ है। महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, गुजरात में भा पाबंदियां लगाई गई हैं। गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 31 मार्च तक नाइट कर्फ्यू है, जबकि पंजाब के लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब सहित कई शहरों में रात 9 से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू है।

संक्रमण के मामले बढ़ते देखते हुए अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश सरकार ने भी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। यूपी में कक्षा एक से आठ तक के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को बुधवार से 31 मार्च तक बंद करने का आदेश है। इसके साथ ही जुलूस, कार्यक्रम और सार्वजनिक समारोह के लिए अब प्रशासन की अनुमति जरूर कर दी गई है। इससे पहले महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और तमिलनाडु ने कोरोना के कारण स्कूलों को फिर से बंद कर दिया है।

मध्य प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महामारी की रफ्तार को देखते हुए जिला प्रशासन ने शहर में फिर सख्त कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। इससे पहले तीन शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर में हर रविवार लॉकडाउन लगाया गया है। होली के बाद रंगपंचमी के दिन शहर में निकलने वाली परंपरागत गेर के आयोजन पर भी रोक लगा दी गई है। मास्क मुंह के नीचे लटकाकर चलने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच टीकाकरण अभियान तेज हो गया है। देश में अब तक लाभार्थियों को वैक्सीन की 4.72 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। इनमें 78.30 लाख स्वास्थ्यकर्मी (पहली खुराक), 49.30 लाख स्वास्थ्यकर्मी (दूसरी खुराक), 81.72 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स (पहली खुराक) और 27.93 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स (दूसरी खुराक) शामिल हैं। इनके अलावा लाभार्थियों में 1.94 करोड़ 60 साल से अधिक उम्र के और 40.72 लाख 45-60 साल आयु वर्ग के गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक पहली खुराक दी गई है।

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