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महंत नरेंद्र गिरी की मौत के ठीक बाद के वीडियो से उठे कई सवाल

प्रयागराज (मा.स.स.). अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरी की मौत के मामले की गुत्थी उलझती ही जा रही है। अब उनकी आत्महत्या के फौरन बाद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें महंत नरेंद्र का शरीर फर्श पर दिखाई दे रहा है। इसमें फंदा बनी रस्सी के तीन टुकड़े और पंखे के चलते रहने से कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। वीडियो घटना के फौरन बाद का है। महंत नरेंद्र गिरी का का पार्थिव शरीर फर्श पर पड़ा दिखाई दे रहा है। जिस पंखे से महंत लटके थे, वह चलता हुआ दिखाई दे रहा है। कमरे में पुलिस और कुछ साधु भी हैं। और सबसे बड़ी बात फंदे की रस्सी तीन हिस्सों में नजर आ रही है।

फंदे के तौर पर इस्तेमाल की गई रस्सी का एक हिस्सा महंत गिरि के गले में, दूसरा टुकड़ा पास में मेज पर और तीसरा टुकड़ा पंखे के सबसे ऊपरी सिरे में छत से लगने वाली रॉड में दिखाई दे रहा है। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गठिया यानी कि पैरों के जोड़ में तकलीफ के बावजूद महंत ने इतनी ऊंचाई तक खड़े होकर रस्सी कैसे बांधी होगी। रस्सी का दूसरा हिस्सा मेज पर है, जिसके पास में ही वसीयत के कागज भी दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मी भी सवालों के दायरे में हैं। क्राइम सीन की घेराबंदी क्यों नहीं की गई। लोग पैरों में जूते पहनकर कमरे में चहलकदमी करते दिखाई दे रहे हैं। और पंखा भी चलता हुआ दिखाई दे रहा है। महंत नरेंद्र गिरि को संतों ने मंत्रोच्चार के साथ समाधि दे दी है। गिरी ने अपने सुइसाइड नोट में यह इच्छा जताई थी कि उन्हें बाघंबरी मठ में ही उनके गुरु की समाधि के पास भू-समाधि दी जाए।

महंत नरेंद्र नरेंद्र गिरी के सुसाइड मामले में बुधवार को एसआईटी टीम ने आनंद गिरी और आद्या तिवारी को कोर्ट में पेश किया। जहां से दोनों आरोपियों को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया है। वहीं, सदीप तिवारी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सीजेएम कोर्ट को बताया कि नरेंद्र गिरी ने मरने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसमें उन्होंने आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी का नाम लेते हुए कहा था कि इन लोगों ने मुझे आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया।

कमरे से मिला नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट सही है या फर्जी, इसको लेकर भी तरह-तरह की बातें की जा रही है। अनेक संतों का कहना है कि नरेंद्र गिरी हस्ताक्षर तक ठीक से नहीं कर पाते थे, ऐसे में 13 पन्‍ने का सुसाइड नोट लिख पाना समझ के बाहर है। निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी का साफ तौर पर कहना है कि सुसाइड लेटर में कई खामियां हैं, इसलिए हमें बिल्कुल विश्वास नहीं है कि उसे महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा होगा।

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