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वित्त मंत्रालय ने ट्रेडिंग बंद होने पर मांगा सेबी से जवाब

मुंबई (मा.स.स.). NSE में तकनीकी दिक्कत की वजह से ट्रेडर्स के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि गुरुवार को सौदों की एक्सपायरी है, इसके ठीक एक दिन पहले ट्रेडिगं के ठप होने से उनके सौदे फंस गए हैं. लेकिन अब NSE में ट्रेडिंग एक बार फिर 3:45 बजे शुरू हो चुकी है, इधर वित्त मंत्रालय ने मार्केट रेगुलेटर SEBI से इस मामले पर जवाब मांगा है. वित्त मंत्रालय SEBI के साथ लगातार संपर्क में है. सेबी अब इस मामले पर फैसला करेगा.

NSE ट्रेडिंग एक बार फिर से चल रही है, जो 5 बजे तक जारी रहेगी. आपको बता दें कि आज सुबह सवा 10 बजे के करीब NSE में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद इंडेक्स में अपडेट होना बंद हो गया. इसे देखते हुए पहले तो सुबह 11.40 पर NSE ने फ्चूयर एंड ऑप्शन में ट्रेडिंग को बंद कर दिया, फिर 11.43 पर कैश मार्केट को भी बंद कर दिया गया. ट्रेडिंग बंद होने की खबर से ट्रेडर्स में हड़कंप मच गया, क्योंकि कल वायदा की एक्सपायरी के ठीक पहले ट्रेडिंग ठप होने से उनके सौदे अटक गए.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तकनीकी खराबी से ट्रेडर्स को बड़ा नुकसान होने का अनुमान है, क्योंकि स्टॉक्स तो अपडेट हो रहे थे, लेकिन इंडेक्स में कोई अपडेट नहीं दिख रहा. ये अपने आप में एक अलग समस्या है, जो NSE में पहले कभी नहीं देखी गई. ट्रेडर्स परेशान हैं कि उनका ट्रेड अटका है तो अब वो क्या करें. हालांकि इंटरऑपरेबिलिटी की वजह से एक्सपर्ट्स ने लोगों को BSE जाने की सलाह भी दी, लेकिन इसमें शिकायतें आईं कि सौदे सेटल नहीं हो रहे हैं.

आपको बता दें कि NSE में तकनीकी गड़बड़ी का ये पहला मामला नहीं है, पिछले साल भी ऐसी ही दिक्कत आई थी, तब सेबी ने NSE पर पेनाल्टी भी लगाई थी. इसके पहले हमारे सहयोगी चैनल ज़ी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने कहा कि एक्सपायरी को एक दिन आगे बढ़ा देना चाहिए, यानी गुरुवार की जगह अब शुक्रवार को एक्सपायरी कर देना चाहिए. NSE में आई इस गड़बड़ी पर सवाल उठता है कि रिकवरी साइट पर ट्रेडिंग शिफ्ट क्यों नहीं की गई, क्यों समय से इनवेस्टर्स और ट्रेडर्स को जानकारी नहीं दी गई, जिनके सौदे खुले रह गए उनका क्या होगा और नुकसान की भरपाई कैसे होगी और कौन करेगा?

किसी भी एक्सचेंज में अगर कोई दिक्कत आती है तो एक्सचेंज को पूरी रिपोर्ट बनाकर सेबी को देनी होती है. रूट कॉज़ एनालिसिस और सॉल्यूशन भी बताना होता है. अगली बार दिक्कत नहीं आए इसका प्लान देना होता है. सेबी अगर दिए गए वजहों से संतुष्ट नहीं तो सवाल जवाब भी होता है. सेबी अपनी टेक्निकल एडवाइज़री कमेटी से भी मदद लेती है.

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