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सिद्धू के सलाहकार ने कैप्टन के पाकिस्तानी पत्रकार से नजदीकियों पर उठाये सवाल

चंडीगढ़ (मा.स.स.). पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के सलाहकारों के बीच जंग थम नहीं रही है। सिद्धू से बैठक के बाद देर रात सलाहकार मालविंदर माली ने फिर सोशल मीडिया के जरिए कैप्टन पर हमला किया। माली ने पाकिस्तानी पत्रकार अरुसा आलम के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह, DGP दिनकर गुप्ता व चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन के साथ फोटो पोस्ट की। जिसमें माली ने पूछा कि कैप्टन के राष्ट्रीय सुरक्षा, पंजाब प्रशासक व आर्थिक सलाहकार कौन हैं? सोचो और बोलो। साफ तौर पर कैप्टन की फटकार के बाद माली ने अब उन पर व्यक्तिगत हमले शुरू कर दिए हैं।

माली ने लिखा, ”कैप्टन ने सिद्धू के सलाहकारों के साथ सियासी लड़ाई शुरू कर साबित कर दिया है कि उनका सियासी कद कितना रह गया है। आपकी राष्ट्रीय सुरक्षा व पंजाब प्रशासन की सलाहकार बीबी अरुसा आलम हैं। मैं पहले इसे आपका निजी मामला समझता था और कभी यह सवाल नहीं उठाया। अब आपने सिद्धू के सलाहकारों का मुद्दा कांग्रेस पार्टी की सियासत व देश की सुरक्षा के साथ जोड़ लिया है तो कुछ भी निजी नहीं होता। इस वजह से मैं यह पोस्ट डालने के लिए मजबूर हुआ हूं।”

उन्होंने लिखा, “यह तस्वीरें संकेत दे रही हैं कि आपने अरुसा आलम को कभी कांग्रेस में शामिल नहीं किया, तो फिर DGP व चीफ सेक्रेटरी पाकिस्तानी नागरिक अरुसा का आशीर्वाद क्यों ले रहे हैं?। अरुसा आलम के बारे में सुना है कि वह डिफेंस मामलों की माहिर पत्रकार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी उनके अच्छे संबंध हैं। इस वजह से उन्हें भारत के वीजा पर आपके सिसवां फार्म में लगातार रहने में कोई मुश्किल नहीं है।

लोग यह भी कहते हैं कि करतारपुर कॉरिडोर के वक्त सिद्धू के खिलाफ आपका डटकर साथ देने वाली हरसिमरत कौर बादल भी अरुसा के भारत वीजा के लिए बहुत मददगार रही हैं। भारत सरकार के पाकिस्तान के नागरिकों को वीजा देने के नियम हैं। उनको वीजा ठोस मकसद व तय जगहों पर जाने के लिए निश्चित समय के लिए दिया जाता है। अरुसा आलम को भारत के अंदर आने, घूमने व रहने के लिए इतनी छूट किन नियमों के तहत दी जाती रही है। मोदी सरकार के पास इसका कोई जवाब है?

कैप्टन के आर्थिक सलाहकार भरत इंदर चहल के बारे में मुझे इतनी जानकारी है कि आप वह सुनकर खुद हैरान रह जाओगे। जब मैं आपके इस मीडिया सलाहकार के साथ लोक संपर्क अफसर था तो हिमाचल में ऐसा घर बनाया था, जिसका सारा सामान विदेश से मंगवाया था। जब विजिलेंस ने चहल को गिरफ्तार किया तो इस घर का जिक्र भी हुआ था। मैंने भी शोर मचाया था कि यह कोठी हिमाचल के किसी बड़े अफसर के बेटे के नाम पर चहल साहब की बेनामी संपत्ति है। अब भी चर्चा है कि अब पंजाब प्रशासन में सभी तब्दीलियां मोदी व सुखबीर बादल की इच्छा के अनुसार हो रही हैं और आपके दस्तखत हो रहे हैं। सच्चाई क्या है? यह आप जानों..। अभी इतना ही।”

अरुसा आलम पेशे से पाकिस्तानी पत्रकार हैं। वह 2004 में कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिली थीं, जब वो पाकिस्तान गए थे। हालांकि, उनके रिश्तों की चर्चा 2007 में हुई। दोनों ने तब एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बताया था। अरुसा 1970 के दशक में पाकिस्तानी राजनीति में दबदबा जमाने वाली रानी जनरल के नाम से मशहूर अकलीन अख्तर की बेटी हैं। अरुसा की मिलिट्री में मजबूत पकड़ थी इसलिए उन्होंने डिफेंस जर्नलिस्ट बन मिलिट्री के बारे में लिखना शुरू किया। अरुसा को उनकी अगस्ता-90B सबमरीन डील की रिपोर्ट के लिए भी जाना जाता है, जिसकी वजह से पाकिस्तानी नौसेना अध्यक्ष मनसुरुल हक को 1997 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने पाकिस्तान स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन में तैनात ब्रिगेडियर एंड्रयू डरकन के बारे में कुछ खुलासे किए थे, जिसे लेकर वहां खूब हंगामा मचा था। विवाद को बढ़ते देखकर ब्रिटिश गर्वमेंट ने अपने इस अफसर को वापस बुला लिया था।

आलम शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। बड़े बेटे का नाम फख्र-ए-आलम है, जो एक्टर और सिंगर है, वहीं छोटा बेटा ढाका में लॉयर है। अरुसा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इस्लामाबाद के ‘डेली मुस्लिम फर्स्ट एवर’ अंग्रेजी न्यूजपेपर से की थी। इसके अलावा वो पॉलिटिकल रिपोर्टर के रूप में उर्दू के न्यूजपेपर Hurrmat, पाकिस्तान ऑब्जर्वर आदि के साथ काम कर चुकी हैं। अरुसा पाकिस्तान की जर्नलिस्ट एसोसिएशन ‘साफमा’ की प्रेसिडेंट रह चुकी हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की बायोग्राफी ‘द पीपुल्स महाराजा’ के एक हिस्से में भी अरुसा का जिक्र है। जिसमें इस दोस्ती को कैप्टन ने बेहद खास बताते हुए गर्व होने की बात कही। हालांकि कैप्टन व अरुसा के रिश्ते को लेकर विरोधी अक्सर निशाना साधते रहे हैं। कैप्टन की सांसद पत्नी महारानी परनीत कौर ने कभी इस पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा। अरुसा कभी पटियाला नहीं जातीं और चंडीगढ़ में ही रहती हैं। 2018 के दौरान चंडीगढ़ में उन्होंने कहा था कि यह रिश्ता मेरे घर में भी एक संवेदनशील मसला है। मैं एक मुस्लिम महिला हूं और आप जानते हैं कि हमारे घर पर लोग किस तरह की सोच रखते हैं।

सिद्धू के सलाहकार माली ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का स्वागत किया। फिर कश्मीर को अलग देश बता दिया। यही नहीं, अपने सोशल मीडिया पर सिख दंगों से जुड़ी इंदिरा गांधी की खोपड़ियों के ढ़ेर व हाथ में पकड़ी खोपड़ी टंगी बंदूक की फोटो डाल दी। वहीं, दूसरे सलाहकार प्यारे लाल गर्ग ने कैप्टन की पाकिस्तान विरोधी बयानबाजी को पंजाब के हितों के उलट बता डाला। इसके बाद कैप्टन ने दोनों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उनके बयान देश हित में नहीं हैं।

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