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अमेरिकी खुफिया एजेंसी के डायरेक्टर ने काबुल में तालिबान से की मुलाकात

काबुल (मा.स.स.). अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स ने 23 अगस्त को तालिबान ने वरिष्ठ नेता मुल्ला गनी बरादर से अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मुलाकात की है। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर वॉशिंगटन पोस्ट को इस बात की जानकारी दी है। ऐसे वक्त में जब अमेरिका, अफगानिस्तान से लोगों को निकाल रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रेस्क्यू मिशन को सबसे बड़ा और सबसे कठिन बताया है। ऐसे में टॉप अमेरिकी जासूस को काबुल भेजने के फैसले को लेकर कई तरह की बातें की जा रही है।

अमेरिका ने 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से पूरी तरह से निकलने की बात की थी। लेकिन अमेरिका अब डेडलाइन को मिस करता हुआ दिख रहा है। कई यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका से अपने देशों के नागरिक को अफगानिस्तान से निकालने की अपील की है। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने कहा है कि उन्हें लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए और समय की ज़रूरत है। लेकिन तालिबान 31 अगस्त की तारीख की जिद पर अड़ा हुआ है। तालिबान ने कहा है कि अमेरिका अगर 31 अगस्त के डेडलाइन को पार करता है तो इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसे में कई एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स बता रहे हैं कि बर्न्स 31 अगस्त की डेडलाइन और तालिबान सरकार के गठन को लेकर बातचीत करने को बरादर के पास पहुंचे हैं।

यह दिलचस्प है कि मुल्ला गनी बरादर को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तान ने साल 2010 में एक ऑपरेशन में गिरफ्तार किया था। इसके बाद बरादर 8 साल तक पाकिस्तान की जेल में रहे। 2018 में अमेरिकी दबाव के बाद पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया। फिर बरादर को कतर स्थानांतरित कर दिया गया जहां बरादर दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख नियुक्त किए गए। यहां उन्होंने उस समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके कारण अमेरिकी सेना को अपने 20 साल के अभियान को वापस लेने का समझौता करना पड़ा। नवंबर 2020 में वह तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के साथ भी नज़र आए थे।

विलियम जे बर्न्स ने इससे पहले अप्रैल में भी अफगानिस्तान की अघोषित यात्रा की थी। बर्न्स का यह दौरा अमेरिकी सैनिकों की वापसी और उसके बाद अफगानिस्तान सरकार और भविष्य पर चर्चा को लेकर थी। माना जाता है कि मुल्ला गनी बरादर तालिबान के संस्थापक मुहम्मद उमर के बेहद करीबी और नजदीकी दोस्त रहे। उनका संगठन पर पकड़ है। कई एक्सपर्ट्स मुल्ला बरादर को अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति के तौर पर भी देखते हैं। उन्होंने अफगानिस्तान पर सोवियत के कब्जे के दौरान सोवियत सेना से लड़ाई लड़ी थी। आख़िरी बार तालिबान शासन के दौरान बरादर कई प्रदेशों के गवर्नर रह चुके हैं। ऐसे में अमेरिका बरादर से बात कर रहा है।

समावेशी सरकार के गठन के लिए जिहादी नेताओं और राजनेताओं से मिलने बरादर 21 आगस्त को काबुल पहुंचे थे। बरादर 17 अगस्त को दोहा की राजधानी कतर से अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पहुंचे थे। कंधार तालिबान का गढ़ रहा है। कंधार पहुंचकर बरादर ने कहा था कि तालिबान का शासन अबकी अलग तरह का रहेगा। तालिबान ने कहा है कि वह चाहते है कि अबकी उनकी सरकार समावेशी रहे लेकिन इस सरकार में कौन-कौन शामिल होगा इसके लेकर चींजें साफ़ नहीं की है।

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