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कांग्रेस में शामिल होंगे कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी

पटना (मा.स.स.). दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार 28 सितंबर को कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लेंगे। कांग्रेस मुख्यालय में कन्हैया और गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी को पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है। कई चुनाव हार चुकी कांग्रेस अब खुद को बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की नजर लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव पर भी है। जीत हासिल करने के लिए पार्टी जातीय समीकरणों के साथ युवाओं पर दांव लगाने जा रही। 2024 के चुनाव में जीत के लिए हिसाब-किताब बैठाए जा रहे हैं। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को पार्टी में शामिल किया जा रहा है। माना जा रहा है कि कन्हैया को बिहार कांग्रेस की अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बिहार के बेगूसराय से कन्हैया कुमार की ताल्लुक है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने किस्मत भी आजमाई थी। वहां से बीजेपी के गिरिराज सिंह से हार गए थे। बेगूसराय में भूमिहार जाति के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है और कन्हैया कुमार भी भूमिहार हैं। कांग्रेस को बिहार में नए चेहरे की जरुरत है। कांग्रेस को लगता है कि छात्र नेता के तौर पर कन्हैया को संगठन का अनुभव है। बिहार कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मदन मोहन झा का कार्यकाल 17 सितंबर को पूरा हो गया। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रभारी भक्त चरण दास ने कुंटुंबा विधायक राजेश राम का नाम दिल्ली दरबार में अध्यक्ष पद के लिए बढ़ाया था। लेकिन ढाई महीने बाद भी इस पर मंजूरी नहीं मिली।

सहमति क्यों नहीं मिली ये अपने आप में बड़ा खेल है। बिहार प्रभारी पद पर दलित (भक्त चरण दास), विधायक दल का नेता सवर्ण (अजीत शर्मा) और अध्यक्ष पद पर या तो कोई अतिपिछड़ा या फिर अल्पसंख्यक गुणा-गणित बिठाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक यही वजह थी कि बिहार प्रभारी के राजेश राम वाले प्रस्ताव को हाईकमान से दो बार मंजूरी नहीं मिली। अब पार्टी हाईकमान की ओर से कन्हैया कुमार को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई जा रही है। भक्त चरण दास के सामने सबसे बड़ी चुनौती कन्हैया कुमार को संभालने की होगी।

साल 2017 में जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर की तिगड़ी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। हार्दिक पटेल पहले से ही कांग्रेस में हैं। अल्पेश ठाकोर बीजेपी में चले गए। मगर जिग्नेश मेवाणी ने समझौता नहीं किया। राज्य में सात फीसदी दलित हैं और गुजरात में 13 सीटें आरक्षित हैं। पिछले चुनाव में ज्यादातर आरक्षित सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा था। पार्टी का मानना है कि मेवाणी के कांग्रेस में आने से पार्टी मजबूत होगी।

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