शुक्रवार , अप्रेल 16 2021 | 01:21:46 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जगी पाक अधिकृत कश्मीर वापस आने की आस

बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जगी पाक अधिकृत कश्मीर वापस आने की आस

–  सारांश कनौजिया

भारत स्वतंत्रता के बाद से अब तक सिर्फ चीन के साथ 1962 का युद्ध हारा है। लेकिन उस समय भी हमारी सेनाओं ने जो पराक्रम दिखाया था, वह अतुलनीय था। उनके बलिदान ने भी हमें उतना ही गौरवांवित किया, जितना अन्य किसी युद्ध में। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले हमने पाकिस्तान को उसके दुस्साहस का जवाब कई बार दिया, लेकिन अपनी सरहदों में रहकर। मोदी सरकार बनने के बाद से हमने दुश्मन को कहीं भी समाप्त करने की क्षमता को दिखाया। हमारी सेनाओं ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान के होश उड़ा दिये थे।

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जो कायराना हरकत की थी, उसका बदला भारत जरुर लेगा। यह विश्वास पाकिस्तान को भी था। उसने भारत से लगी सीमा पर चौकसी बढ़ा दी थी। नरेंद्र मोदी सरकार ने भी एनएसए अजीत डोभाल और सेना के अधिकारियों के साथ मिलकर एयर स्ट्राइक की योजना बना ली। जब भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में लगभग 300 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया, तो पाकिस्तान ने कहा कि कोई नहीं मरा। तब से लेकर आज तक विभिन्न अवसरों पर उनके लोग ही कई बार मान चुके हैं, बालाकोट में बहुत सी जाने गईं।

पहले भारतीय सेना ने जमीन पर ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों को मारा, फिर एयर स्ट्राइक कर जो कारनाम दिखाया, उससे एक बार फिर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के भारत में वापस मिलने की उम्मीद बढ़ गयी। पाकिस्तान को भी यह डर लगातार सताता रहा है। उसके कई नेता और पूर्व रक्षा अधिकारी पाकिस्तानी मीडिया पर इस डर को स्वीकार करते रहे हैं।

भारत में पहले कई विपक्षी नेताओं ने बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाये। उसमें आतंकवादी मारे भी गये थे या नहीं, इस पर भी सवालिया निशान लगाने का असफल प्रयास किया। भारतीय सेना ने कहा कि उनकी एयर स्ट्राइक सफल रही, लेकिन कुल कितने आतंकवादी मौजूद थे, यह गिनना उनका काम नहीं है। जबकि केंद्र सरकार और भाजपा के कई नेताओं का विभिन्न तथ्यों के आधार पर दावा कर रहे थे कि 350 आतंकवादी मारे गये। इसको लेकर भी मोदी सरकार पर हमले हुये। लेकिन बाद में पाकिस्तान ने भी बालाकोट एयर स्ट्राइक को स्वीकार कर लिया, तब भी इन विरोधियों को विश्वास नहीं हुआ। लेकिन देश के एक बड़े वर्ग ने इसे स्वीकार भी किया और यह भी माना कि मोदी सरकार ही पीओके को वापस ला सकती है।

जब हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की बात करते हैं, तो उसमें गिलगित बालिस्तान और वह भूभाग भी आता है, जिसे पाकिस्तान ने गलत तरीके से चीन को दे दिया था। गिलगित को कुछ स्थानों पर गिलगिट भी कहा गया है। बलिस्तान वह भू भाग है, जिसे हम बलूचिस्तान के नाम से भी जानते है। इस क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन का भारी विरोध है। चीन चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के नाम से यहां अपना सैन्य विस्तार कर रहा है। पाकिस्तान से परेशान बलूचों को अब चीन से भी सिर्फ दर्द ही मिल रहा है। इस कारण यह हिस्सा कभी भी अलग होने के लिये बड़ा विद्रोह कर सकता है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारतीय खुफिया एजेंसी आईबी इन विद्रोहों को हवा दे रही है।

बालाकोट के बाद अब पाकिस्तान और भारत के अधिकांश लोगों को विश्वास हो गया है कि इन पीओके जल्द भारत के अधिकार क्षेत्र में होगा। संसद में अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त करने के समय गृहमंत्री अमित शाह के एक बयान से भी इसे बल मिलता है। वहीं भारतीय सेना जो पहले भी पीओके हासिल करने में सक्षम थी, उसे भारत सरकार से मिली स्वतंत्रता ने भी बालाकोट के बाद हमारी उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

दावा : छूने से नहीं फैलता है कोरोना संक्रमण

वाशिंगटन (मा.स.स.). पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों ने जहां हर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *