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तेज हो जिंदगी बचाने की पहल

– रमेश सर्राफ धमोरा

देश में चल रही कोरोना की दूसरी लहर हर दिन विकराल होती जा रही है। पूरा देश इसकी चपेट में आ चुका है। नये कोरोना संक्रमण मरीज आने की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया हैं जो बहुत बड़ी चिंता की बात है। यदि कोरोना संक्रमित मरीजों का मिलने का सिलसिला इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले कुछ दिनों में ही भारत में प्रतिदिन चार लाख से अधिक कोरोना मरीज मिलने लगेंगे। कोरोना के बढ़ते प्रभाव को काबू में करने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाने लगे हैं। मगर सरकारी प्रयासों के बावजूद भी कोरोना संक्रमितो के आने की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है।

कोरोना विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों का मानना है कि मई मध्य तक कोरोना का कहर पीक पर होगा। उसके बाद इसकी संख्या में कमी आनी शुरू होगी। लेकिन अभी अप्रैल में ही जब प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव लोग मिल रहे हैं तो मई में तो इनकी संख्या में बहुत अधिक बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसी स्थिति का मुकाबला करने के लिए सरकार को अभी से युद्ध स्तर पर काम करना चाहिये। कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही देश में ऑक्सीजन की भयंकर कमी महसूस की जा रही है। ऑक्सीजन की कमी के चलते कई स्थानों पर कोरोना संक्रमित लोगों की मौत भी हो चुकी है। जो सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। हालांकि ऑक्सीजन संकट व्याप्त होते ही केंद्र सरकार ने शीघ्रता से आपदा नियंत्रण की दिशा में सार्थक कार्यवाही करते हुये पूरे देश में ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों का केंद्रीकरण कर उसका राज्यवार आवंटन का कोटा तय किया। ताकि देश के सभी राज्यों को समान रूप से आवश्यकतानुसार ऑक्सीजन गैस मिल सके।

इसके साथ ही सरकार ने वायु सेना के विमानों के माध्यम से विदेशों से ऑक्सीजन के कंटेनर व ऑक्सीजन उत्पादन से संबंधित मशीनों का भी तेजी से आयात करना प्रारंभ कर दिया है। इसके साथ ही देश में ऑक्सीजन के टैंकरों को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए वायु सेना के परिवहन विमानों व रेलवे की माल गाड़ियों का उपयोग किया जाने लगा। जिससे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऑक्सीजन  तेजी से पहुंचने लगी। हालांकि आज भी देश में आवश्यकता अनुसार ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है। मगर केंद्र सरकार ने देश की जनता को आश्वस्त किया है कि जरूरत पड़ने पर विदेशों से भी ऑक्सीजन का आयात किया जाएगा। सरकार ने ऑक्सीजन के निर्यात पर पूर्णतया रोक लगा दी है। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन पर रोक लगाते हुए उसे अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपयोग में लाया जा रहा है।

हाल ही में देश में उपजे ऑक्सीजन विवाद के चलते कई प्रदेशों में उच्च न्यायालय को दखल देना पड़ा। उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सामने आया कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले जनवरी माह में विभिन्न राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन बनाने के प्लांट लगाने हेतु धनराशि जारी होने के उपरांत भी राज्य सरकारों द्वारा अभी तक ऑक्सीजन संयंत्र लगाने की दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई। जबकि यदि समय रहते अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगा लिए जाते तो आज देश को विकट स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

पिछले एक साल से कोरोना महामारी का मुकाबला करने के बावजूद केंद्र व राज्य सरकारों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई विशेष कार्य नहीं किए। देश में ना तो नए अस्पताल बनाने की शुरुआत की गई ना ही चिकित्सा से संबंधित अन्य उपकरण व दवाइयों के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया। सभी सरकारों ने चिकित्सा की बजाए अपने वोट बैंक को पक्का करने के लिए अन्य विकास कार्यों पर ज्यादा ध्यान दिया। उसी का नतीजा है कि आज हम कोरोना की दूसरी लहर का मुकाबला करने में खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के बाद हालात ऐसे बन गए कि विकास कार्यों की बजाए सरकार को लोगों की जान बचाने की तरफ अधिक ध्यान देना चाहिए था। मगर ऐसा नहीं किया गया। आज भी केंद्र व राज्य सरकारें अस्पताल बनाने के स्थान पर नई सड़के बनाने, नए पावर हाउस बनाने, नई बिजली की लाइनें डालने, नए भवन बनाने व सरकार से जुड़े लोगों को अधिकाधिक सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर अधिक ध्यान दे रही है। सरकारों का अधिकांश बजट भी इन्हीं सब कार्यों पर खर्च किया जा रहा है। जबकि कोरोना की पहली लहर के समय ही केंद्र व राज्य सरकारों को सचेत होकर भविष्य में लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था।

कहने को तो केंद्र सरकार व राज्य सरकारों ने अपने बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च करने के लिए पहले से अधिक राशि का आवंटन किया है। मगर सरकारों को चाहिए था कि अधिक के बजाय सबसे अधिक राशि इस साल के बजट में चिकित्सा के क्षेत्र पर खर्च की जानी चाहिए थी। ताकि हमारी चिकित्सा व्यवस्था इतनी मजबूत हो सके कि हम आने वाली किसी भी बीमारी का अपने संसाधनों के बल पर सुदृढ़ता से मुकाबला कर सकें।

देश में कोरोना की वैक्सीन लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। लेकिन उसमें भी केंद्र व राज्य सरकारों में टकराव देखने को मिल रहा है। राज्यों की मांग पर केंद्र सरकार ने 18 वर्ष से अधिक की उम्र के सभी लोगों को टीका लगवाने की इजाजत दे दी है। मगर उसके साथ ही केंद्र सरकार ने वैक्सीन उत्पादन करने वाली कंपनियों से आधा वैक्सीन केंद्र सरकार को व आधा वैक्सीन राज्य सरकारों व खुले बाजार में बेचने की छूट प्रदान कर दी है। उसमें कई राज्य सरकारें वैक्सीन का खर्च उठाने में असमर्थता जता रही है। जिसको लेकर भी आए दिन आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।

देश की जनता को अभी सबसे अधिक चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है। लोगों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के समय में यदि हम जान बचाने में सफल हो जाते हैं तो विकास कार्य करवाने के लिए आगे बहुत समय मिलेगा। इस समय तो केंद्र व सभी राज्य सरकारों को अपना पूरा बजट चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने पर खर्च किया जाना चाहिए। अन्य मदों पर खर्च की जाने वाली राशि पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।

देश के सभी जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि उनको मिलने वाली वाले वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाओं का आगामी एक वर्ष तक परित्याग कर उस राशि को भी जनहित में चिकित्सा पर खर्च करने के लिए सरकार को सौंप दें। देखने में आ रहा है कि कई जगह पर जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए नए वाहन खरीदे जा रहें हैं नये भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है। जिनको कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। ताकि उस राशि का उपयोग भी चिकित्सा तंत्र को सुदृढ़ करने पर किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम केयर फंड से देश के सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित 551 सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन बनाने वाले प्लांट लगाने के लिये राशि स्वीकृत कर दी है। 162 जिलों में गत जनवरी में ही स्वीकृत किया गया था। राज्य सरकारों को चाहिये की सभी अस्पतालों में आक्सीजन उत्पादन संयंत्रो की स्थापना शिघ्रता से करवायें जिससे आक्सीजन की किल्लत समाप्त हो सके। अस्पतालों में आक्सीजन उत्पादन संयंत्र लगाने की दिशा में तमिलनाड़ू व केरल की सरकार ने अवश्य ही काबिले तारिफ सार्थक प्रयास किये हैं।

इसके साथ ही सरकार को ऐसा नियम बनाना चाहिए कि सभी बड़े निजी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन बनाने का संयंत्र लगाना आवश्यक हो। ताकि ऑक्सीजन को लेकर जैसा संकट इस वक्त देश की जनता झेल रही है। वैसी स्थिति फिर कभी नहीं देखनी पड़े। देश में एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान, मेडिकल कॉलेज और अधिक संख्या में स्थापित किए जाने चाहिए। ताकि लोगों को अपने क्षेत्र में ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा सुलभता से मिल सके।

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.

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