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तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट संचालन के लिए तुर्की से मांगी मदद

काबुल (मा.स.स.). तालिबान ने तुर्की से काबुल एयरपोर्ट के लिए तकनीकी मदद मांगी है। तालिबान ने तुर्की से अपील की है कि वो अमेरिका समेत विदेशी सेनाओं की यहां से वापसी के बाद एयरपोर्ट के संचालन के लिए तकनीकी मदद दे। लेकिन तुर्की के अधिकारियों ने रायटर्स से कहा है कि वो खुद अफगानिस्‍तान से अपनी सेनाओं की वापसी 31 अगस्‍त तक कर लेना चाहते हैं। तालिबान ने इस बारे में फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह से तुर्की को दिया है। तालिबान की तरफ से कहा गया है कि हमनें ये फैसला तुर्की सरकार पर छोड़ा है कि वो मुश्किल घड़ी में इस काम के लिए अपनी मदद देगा या नहीं।

आपको बता दें कि बीते दो दशक से तुर्की की सेना नाटो सेना के तहत अफगानिस्‍तान में मौजूद थी। लेकिन क्‍योंकि अब नाटो की सेनाएं धीरे-धीरे वापस जा रही हैं और इसके लिए अमेरिका ने 31 अगस्‍त तक की समय सीमा तय की हुई है, तो तुर्की भी यहां से निकलने का मन बना चुका है। हालांकि जुलाई में तालिबान ने खुद की इस बात की पेशकश की थी वो काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी ले सकता है। इस बात की इच्‍छा खुद तुर्की राष्‍ट्रपति रैसेप तैयप इर्दोगन ने जताई थी। उनका कहना था कि यदि उनसे इस बारे में अपील की जाएगी तो वो ऐसा कर सकते हैं। लेकिन अब जबकि तालिबान अफगानिस्‍तान पर कब्‍जा कर चुका है तो स्थिति काफी बदल चुकी है। अब तुर्की की तरफ से ये भी कहा जा चुका है कि वो कम समय के नोटिस पर भी यहां से अपनी सेना को निकाल सकता है।

तुर्की अधिकारियों के मुताबिक तालिबान ने तुर्की सेना को यहां पर बने रहने को नहीं कहा है बल्कि केवल तकनीकी सहायता देने को कहा है। इन अधिकारियों का कहना है कि जब तक तालिबान की तरफ से इन लोगों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा ती है तब तक ये जोखिम भरा कदम होगा। उनके मुताबिक ये बड़ी ही असमंजस की स्थिति है। इस बारे में तुर्की से बातचीत चल रही है। वहीं तुर्की ने अपने यहां से जाने की तैयारी कर ली है। तुर्की इस बात को लेकर सोच‍ विचार में लगा है कि बिना उसकी सेना की मौजूदगी के काबुल एयरपोर्ट पर तकनीकी सहायता देना कितना सही होगा। तुर्की अधिकारी का ये भी कहना है कि इस बारे में कोई फैसला 31 अगस्‍त तक ले लिया जाएगा।

गौरतलब है कि तालिबान के प्रवक्‍ता जबीहुल्‍लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि वो तुर्की सरकार और वहां की मुस्लिम आबादी के साथ बेहतर संबध चाहते हैं। उन्‍होंने ये भी साफ कर दिया है कि तालिबान को तुर्की सेना की कोई जरूरत नहीं है। एक बार विदेशी सेनाएं यहां से चली जाएं तो एयरपोर्ट की सुरक्षा हम खुद संभाल लेंगे।

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