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पिछले 50 सालों में बांग्लादेश बढ़ा, पाकिस्तान का कद घटा

– सारांश कनौजिया

वैसे तो पाकिस्तान को स्वतंत्र हुए लगभग 75 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन आज से 50 वर्ष पूर्व उसका एक हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश के रुप में अस्तित्व में आया था। आज पाकिस्तान की स्थिति खराब है। जहां पाकिस्तान चीन की दया पर जिंदा है, वहीं बांग्लादेश एशिया की सबसे उभरती हुई अर्थव्यवस्था में से एक बन चुका है। कुछ अमेरिकी जानकारों के अनुसार बांग्लादेश यदि इसी प्रकार प्रगति करता रहा, तो वर्ष 2024 तक विकसित देशों की कतार में पहुंचने की काबलियत हासिल कर सकता है।

बांग्लादेश जब 1971 में पाकिस्तान से अलग हुआ या कहें कि भारत ने बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलायी, तो उस समय वहां अकाल और भुखमरी जैसा माहौल था। इसका कारण था कि 1947 से 1971 तक लगभग 24 वर्ष पाकिस्तान ने सिर्फ बांग्लादेश के संसाधनों का दोहन किया, बल्कि उसने कभी इस क्षेत्र के विकास के लिये भी कुछ नहीं किया। यही कारण था कि बांग्लादेश जो उस समय पूर्वी पाकिस्तान था, वहां पर पाकिस्तानी सत्ताधारियों के विरुद्ध विद्रोह का माहौल बन गया। भारत ने इन असहाय लोगों की मदद करके इस क्षेत्र को मुक्त कराया। पाकिस्तान आज के बांग्लादेश पर किस तरह निर्भर था, यह उसके बाद दोनों क्षेत्रों की प्रगति से समझा जा सकता है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही इस्लाम के सिद्धांत को मानते हैं। बांग्लादेश मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी वाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है। इसलिये सैद्धांतिक रुप से पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों एक ही विचारपथ पर चलने वाले देश कहे जा सकते हैं। जहां एक ओर पाकिस्तान प्रारंभ से ही एक गरीब देश था, वहीं 1971 में अस्तित्व में आया बांग्लादेश 2006 तक गरीब देश के रुप में ही जाना जाता था। इसके बाद वह इतनी तेज प्रगति कैसे करने लगा। तो पाकिक्स्तान और बांग्लादेश में सबसे बड़ा अंतर यह है कि पाकिस्तान में सत्ता सेना के हाथ में होती है प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से, जबकि बांग्लादेश में सत्ता राजनेताओं के हाथ में होती है। यह अलग बात है कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश के प्रारम्भिक कुछ दशक बहुत खराब रहे। बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या स्वतंत्रता के एक साल के अंदर ही 12 जनवरी 1972 को कर दी गयी थी।

इन सबके बीच बांग्लादेश के संस्थापक की पुत्री शेख हसीना 6 जनवरी 2009 को प्रधानमंत्री बनी। वे अभी तक बांग्लादेश का नेतृत्व कर रही हैं। 2009 के बाद जब भी चुनाव हुये, उनकी पार्टी को ही बहुमत मिला। इस राजनीतिक स्थिरता का असर यह हुआ कि बांग्लादेश तेजी से आगे बढ़ने लगा। शेख हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को हुआ था अर्थात लगभग उसी समय जब यह क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान बना। इसलिये हसीना ने जन्म के साथ ही अपने पिता को क्षेत्र के लिये संघर्ष करते और पाकिस्तान को अत्याचार करते हुए देखा है। इस माहौल ने उन्हें बांग्लादेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिये प्रेरित किया और उन्होंने ऐसा करने के लिये जी जान लगा दी।

बांग्लादेश लगभग हर मामले में पाकिस्तान से आगे है। यदि जनसंख्या वृद्धि दर की बात करें, तो बांग्लादेश में यह दर 1.1 प्रतिशत, वहीं पाकिस्तान में 2 प्रतिशत है। पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 3.3 प्रतिशत प्रति वर्ष अधिक तेजी से बढ़ रही है अर्थात यह अंतर हर साल और ज्यादा होता चला जा रहा है। बांग्लादेश के लोगों का स्वास्थ कैसा है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि वहां लोगों की औसत आयु 72 वर्ष है, जबकि पाकिस्तान में 66 वर्ष। एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश के 34.1 प्रतिशत लोग 2017 तक डिजिटल लेन-देन करते थे, जबकि एशिया का औसत 27 प्रतिशत के लगभग है। बांग्लादेश में सिर्फ 10 प्रतिशत के लगभग बैंक खाते निष्क्रिय हैं।

जब से शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी हैं, उन्होंने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने पर जोर दिया। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद इस ओर तेजी से दोनों देशों ने कदम बढ़ाए। इसका परिणाम भी देखने को मिला। जब बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान पर बायोपिक बनाने की बात आई, तो भारत इसका निर्माण करने के लिये तैयार हुआ। बांग्लादेश ने इसे मिलकर बनाने की बात कही। एक बायोपिक बहुत मंहगी नहीं बनती, लेकिन इतने छोटे से विषय पर भी साथ मिलकर चलने की इच्छा संबंधों में निकटता को दिखाता है।

जिस तरह चीन पीओके से गुजरते हुए एक अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग बना रहा है, उसी तरह भारत भी म्यांमार और थाईलैंड के साथ मिलकर त्रिपक्षीय राजमार्ग बनाने का प्रयास कर रहा है। इस प्रोजेक्ट में बाद में कंबोडिया और वियतनाम भी जुड़ गए थे। बांग्लादेश भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ने वाला है। ऐसे ही अनेक प्रोजेक्ट हैं, जो भारत बांग्लादेश में चला रहा है, इससे उसे चीन के दबाव को कम करने में भी मदद मिल रही है। इस आपसी सहयोग ने भी बांग्लादेश को उभरती हुई अर्थव्यवस्था बनने में मदद किया है।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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