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मोदी सरकार जारी रखेगी अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन देवी शक्ति

नई दिल्ली (मा.स.स.). अफगानिस्तान से सुरक्षित बाहर निकलने की जद्दोजहद में जुटी काबुल एयरपोर्ट पर हजारों की भीड़ के बीच गुरुवार को हुए दो आत्मघाती हमलों ने कई जिंदगियां छीन ली। तालिबान की बर्बरता के बचने के लिए देश से निकलने की आस में एयरपोर्ट पर जुटे इन लोगों को क्या पता था कि ISIS के हैवान उनकी जान ले लेंगे। काबुल एयरपोर्ट पर हुए इस आतंकी हमले ने भारत की चिंताएं भी बढ़ा दी है। इससे ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ की राह में बड़ा खतरा पैदा हो गया है। भारत फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति पर चल रहा है।

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ चला रहा है। कल तक काबुल एयरपोर्ट पर अफरातफरी, अव्यवस्था और सुरक्षा खतरे की वजह से इस ऑपरेशन में मुश्किलें आ रही थीं। अब एयरपोर्ट पर हुए आत्मघाती आतंकी हमलों से भारत की चुनौती और बढ़ गई है। दरअसल इस हमले को ISIS ने अंजाम दिया है। इसके साथ ही अब अफगानिस्तान आईएसआईएस और तालिबान के बीच सत्ता संघर्ष और वर्चस्व की खूनी जंग का मैदान बन सकता है, जिससे वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना मुश्किल हो सकता है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल मोदी सरकार ने अफगानिस्तान में फंसे भारतियों, सिखों और हिन्दुओं को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन देवी शक्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है।

‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ के तहत भारत ने अबतक कुल 565 लोगों को अफगानिस्तान से रेस्क्यू किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में बताया कि इस अभियान के तहत अब तक 175 दूतावास कर्मियों, 263 भारतीय नागरिकों, हिंदू और सिख समुदायों के 112 अफगान नागरिकों और अन्य यानी तीसरे देशों के 15 नागरिकों को अफगानिस्तान से निकाला गया है। इन लोगों को कतर के दोहा, ताजिकिस्तान के दुशांबे और अन्य पड़ोसी देशों से एयर इंडिया की विशेष उड़ानों से नई दिल्ली लाया गया है। ऑपरेशन की घोषणा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 24 अगस्त को की थी।

विदेश मंत्री ने सर्वदलीय बैठक में बताया कि मंत्रालय ने 16 अगस्त को एक चौबीसों घंटे काम करने वाले अफगानिस्तान सेल की स्थापना की, ताकि फंसे भारतीयों और अन्य अफगान नागरिकों की मदद की जा सके, जो तालिबान के डर से वहां से निकलना चाहते हैं और भारत आना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय के 20 से अधिक अधिकारियों की तरफ से संचालित अफगान सेल ने 3,014 डिस्ट्रेस कॉल स्वीकार की और 7,826 वॉट्सऐप संदेशों और 3,101 ईमेल का जवाब दिया है।

सर्वदलीय बैठक के बाद दोपहर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ‘मीटिंग से ये बात निकल कर सामने आई है कि सरकार भारतीय हितों के लिए कटिबद्ध है। आने वाले समय में कुछ और मीटिंग होंगी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जर्मनी की चांसलर मर्केल से पीएम मोदी ने बात की है। कुछ और हाई लेवल बातचीत होगी। इस समय हमारा फोकस भारतीयों की सुरक्षा पर है।’ उन्‍होंने कहा कि ‘काबुल की स्थिति को सब देख रहे हैं। अभी स्थिति डांवाडोल है। हमें अभी धैर्य रखना होगा।’ अब काबुल एयरपोर्ट पर आतंकी हमले से स्थितियां और खराब हो गई हैं।

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