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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने करवाया था काबुल एयरपोर्ट पर हमला

– सारांश कनौजिया

काबुल एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस – खुरासान ने ली है। लेकिन इस हमले के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई है। खुरासान तो सिर्फ उसका आतंकी चेहरा है। मेरे पास ऐसा कहने का कारण है। इस हमले के बाद अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा था कि आईएसआईएस – खुरासान, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादियों से मिलकर बना है। इसलिये हमले के लिये तालिबान जिम्मेदार है।

इस हमले के पीछे आईएसआई का हाथ होने की वजह जानने से पहले हमें खुरासान, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बारे में समझना होगा। दरअसल खुरासान का आईएसआईएस से कोई भी संबंध नहीं है। यह आतंकी संगठन प्राचीन खुरासान प्रांत की मांग करता है, जिसका एक बड़ा भाग वर्तमान अफगानिस्तान भी था। आईएसआई और पाकिस्तानी सेना ने इस आतंकी संगठन का पोषण अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिये किया था, जिससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान की सत्ता पर अप्रत्यक्ष रुप से शासन कर सके।

तालिबान स्वयं यह बात कह चुका है कि पाकिस्तान उसके लिये दूसरे घर जैसा है। इससे स्पष्ट है कि ताबिलान को पालने वाला पाकिस्तान ही है अर्थात वहां की खूफिया एजेंसी आईएसआई। तीसरा संगठन है हक्कानी आतंकी नेटवर्क है। इसके प्रमुख आतंकी खलील हक्कानी के आईएसआई से संबंधों का कई बार खुलासा हो चुका है। अमेरिका का यह मोस्टवांटेड आतंकी अभी तक आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के संरक्षण में छुपा बैठा था, जो अब तालिबानी सत्ता के प्रमुख चेहरों में से एक है।

भारतीय न्यूज चैनल इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार आईएसआई आतंकवादियों को संरक्षण देने के साथ ही इनका एक-दूसरे आतंकी संगठन में ट्रांसफर भी करती है। इस समय आईएसआई यह चाहती है कि तालिबान की साफ-सुथरी छवि बने, जिससे उसकी अफगानिस्तान की सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने में मदद मिले। इसलिए उसने अब आतंकी हमलों की जिम्मेदारी खुरासान को दे दी है। पहले भी तालिबान और हक्कानी नेटवर्क कई बार इसी आतंकी संगठन के नाम से आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते थे। इसी कारण अफगानिस्तान में हुये कई हमलों में खुरासान का नाम आता रहा है।

हमें ऐसा दिखाने का प्रयास किया जाता है कि खुरासान और तालिबान एक-दूसरे के दुश्मन हैं। वास्तव में इसके पीछे का एक कारण मैं पहले स्पष्ट कर चुका हू। इंडिया टीवी के अनुसार इसका एक कारण यह है आईएसआई कभी नहीं चाहती है कि कोई भी आतंकवादी संगठन उससे अधिक ताकतवर हो जाये। इस कारण वो इनमें मतभेद हमेशा बनाये रखना चाहती है और इसी कारण कभी-कभी इन आतंकवादी संगठनों को एक-दूसरे के सामने भी कर देती है।

इन बातों से स्पष्ट है कि तीनों आतंकवादी संगठन आईएसआई के इशारे पर काम करते हैं। एक प्रश्न यह भी उठता है कि इतने आतंकवादी संगठनों की आईएसआई को क्या जरुरत है। तो इसका उत्तर यह है कि अंतरराष्ट्रीय कारणों से यदि एक आतंकवादी संगठन प्रतिबंधित हो जाये, तो दूसरे नाम से आतंक का कारोबार जारी रखना उसके लिये आसान होगा। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकवादी संगठन का नाम कुछ भी हो, उसको दिशा-निर्देश आईएसआई से ही मिलते हैं। फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि काबुल एयरपोर्ट पर हमले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ न हो।

लेखक मातृभूमि समाचार के संपादक हैं।

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