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संघ की गतिविधियों द्वारा देश का सर्वांगीण विकास संभव : डॉ. मोहन भागवत

पणजी (मा.स.स.). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छह गतिविधियों (उपक्रम) द्वारा समाज के आचरण में बदलाव लाया जा सकता है. इन बदलावों से देश का सर्वांगीण विकास करना संभव है. यात्रा के पहले दिन डॉ. भागवत ने छह गतिविधियों के कार्यकर्ताओं से वार्तालाप की. कार्य की दृष्टी से पर्यावरण संरक्षण, समरसता, गोसेवा, ग्रामविकास, कुटुंबा प्रबोधन, धर्मजागरण ऐसे उपक्रम गतिविधि कें अंतर्गत तैयार किये है. इन गतिविधियों के अंतर्गत अलग-अलग उपक्रम कोकण प्रांत के अंतर्गत चलाए जाते है. इन उपक्रमों की जानकारी लेने के साथ ही यह कार्य अधिक समाजोपयेगी हो इस दृष्टी से कुछ सूचनाएँ सरसंघचालक ने किया.

पर्यावरण संरक्षण के दृष्टि से सरसंघचालक ने कहा कि हरित घर संकल्पना के अंतर्गत हर एक परिवार द्वारा वृक्षारोपण किया जाए. जल एवं ऊर्जा की बचत हो, गीले कचरे से कंपोस्ट बनाया जाए, हर घर में पक्षीघर हो. पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अंतर्गत हरित घर संकल्पना का विस्तार किया जाए. हर एक घर में सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा जमा न हो इसलिये इको ब्रीक्स के उपयोग की मात्रा बढाने का प्रचार किया जाए. पर्यावरण गतिविधि अंतर्गत पानी बचाए, पेड लगाए और प्लास्टिक का कम उपयोग करें इन तीन बिंदूओं का अधिकाधिक कार्यविस्तार हो ऐसा भी उन्होंने सूचित किया.

समरसता गतिविधि के कार्य कि जानकारी लेते समय उन्होने इस गतिविधि का उद्देश्य स्पष्ट किया. भेदभाव रहित समाज रचना तैयार करना, विषमता फैलाने वाले घटनाओं को रोकने के लिये प्रयास करना, विविध महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथी के कार्यक्रम सभी समाजबांधवों के साथ मनाना, उसके लिये समाजमानस तैयार करना, उसके लिये अपने आचरण में योग्य बदलाव लाना और भेदभावरहित परिवार रचना खडी करने के लिये प्रयत्नशील रहना इन उद्दिष्टों के लिये उपयोगी ऐसे उपक्रमों का आयोजन गतिविधि के अंतर्गत किया जाए, ऐसा सरसंघचालक ने कहा.

ग्राम विकास गतिविधि के अंतर्गत कोकण प्रांत में 71 गावों मे 1362 कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित किये गए. सरसंघचालक ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जन, ऊर्जा, जीव एवं गोविकास इस सप्तसंपदापर आधारित शाश्वत ग्रामविकास करना आवश्यक है. कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत 27 जिलों के 667 किसानों को गो आधारित खेती अर्थात जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया, ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है. लगभग 135 कार्यकर्ता इस उपक्रम के लिये प्रांत में कार्यरत है. हर एक किसान के घर में एक देसी गाय का पालन हो ऐसा उद्देश्य रखा गया है. दीपावली के कालखंड में 41 गोपालक किसान परिवारों ने 1,02,776 गोमय दिये तैयार किये. हर परिवार में एक देसी गाय के पालन के तरह गर एक घर में देसी गाय का घी और दूध पहुँचे इसलिये सभी प्रयत्नशील हो इसलिये सरसंघचालक ने सूचित किया.

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