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विश्व में कोरोना से मरने वाला हर पांचवां व्यक्ति भारतीय

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (मा.स.स.). देश में कोरोना से हालात बेकाबू हो चुके हैं। इसका अंदाजा ऐसे लगाएं कि दुनिया के नए मरीजों में से करीब 40-45% अकेले भारत में ही मिल रहे हैं। बीते 24 घंटे में दुनिया में 8.92 लाख लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें से अकेले भारत में 3.86 लाख मरीज मिले। महामारी से रोजाना हो रही मौतों में भी भारत टॉप पर है। बीते 24 घंटे में दुनिया में 15,142 लोगों ने जान गंवाई। इनमें से भारत में सबसे ज्यादा 3,501 मौतें हुईं।

मौत का यह आंकड़ा सरकारी है। श्मशान और कब्रिस्तान के हालात कहानी कुछ और ही बयां कर रहे हैं। देश में पॉजिटिविटी रेट भी बढ़ रहा है। बीते हफ्ते जहां हर 100 जांच पर 18 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही थी। वहीं, अब 21 लोग पॉजिटिव मिल रहे हैं। पहली बार एक दिन में 3 लाख 86 हजार 854 नए मरीजों की पुष्टि हुई। 24 घंटे में मिले नए मरीजों का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 28 अप्रैल को 3.79 लाख मरीजों की पहचान हुई थी। इसके अलावा 24 घंटे में 3,501 संक्रमितों की मौत भी हो गई। ये लगातार तीसरा दिन था जब तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इससे पहले बुधवार को 3,646 मौतें रिकॉर्ड की गईं थीं। राहत की बात ये है कि इन 24 घंटों के अंदर 2 लाख 91 हजार 484 लोग ठीक होकर अपने घर भी गए।

अगर हम दुनिया के सबसे संक्रमित 10 देशों से अपने राज्यों की तुलना करें तो टॉप 8 देशों के मुकाबले हमारे 8 राज्यों में ज्यादा केस मिले। आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनिया में अभी सबसे ज्यादा मरीज भारत में मिल रहे हैं। दूसरे नंबर पर ब्राजील है। यहां 69 हजार लोग संक्रमित पाए गए। इसके बाद अमेरिका में 59 हजार, तुर्की में 37 हजार, फ्रांस में 26 हजार, अर्जेंटीना में 26 हजार, जर्मनी में 22 हजार, ईरान में 19 हजार, कोलंबिया में 17 हजार और इटली में 14 हजार मरीज मिले।

अब भारतीय राज्यों के आंकड़ों पर नजर डाल लेते हैं। यहां सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 66159 केस मिले। यानी भारत और ब्राजील के बाद तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र है। इसके बाद केरल में 38,607 लोग संक्रमित पाए गए। मतलब केरल से पीछे तुर्की, फ्रांस, अर्जेंटीना, जर्मनी, ईरान, कोलंबिया और इटली जैसे देश हैं। इसी तरह कर्नाटक में 35,024, उत्तर प्रदेश में 35,104 केस मिले। यानी दुनिया के अन्य टॉप-6 संक्रमित देशों से भी ज्यादा मामले इन राज्यों में मिले हैं।

देश में जब 10 लाख एक्टिव केस हुए थे, तभी से अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और वेंटिलेटर की कमी होने लगी थी। अब यह आंकड़ा 31 लाख से भी ज्यादा हो चुका है। इसमें हर दिन एक लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हो रही है। अगर एक्टिव केस, यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में ऐसे ही बढ़ोतरी होती रही तो आने वाले दिनों में पूरे देश में मुश्किलें बहुत बढ़ जाएंगी। अभी जो साधन जुटाए जा रहे हैं, वह सिर्फ 10% मरीजों के ही काम आ पाएंगे। बाकी 90% मरीजों को अव्यवस्था का बोझ झेलना पड़ जाएगा।

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