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सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर क्षमा याचिका खारिज करना हास्यास्पद : सुप्रीम कोर्ट

लखनऊ (मा.स.स.). सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले को ‘हास्यास्पद’ बताया जिसमें तीन कैदियों की क्षमा याचिका खारिज करने के पीछे उनके सामाजिक आर्थिक स्थिति ठीक न होने का हवाला दिया गया।

आजीवन कारावास की सजा काट रहे तीन कैदियों की क्षमा याचिका यूपी सरकार की ओर से यह कहकर खारिज कर दी गई कि उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति ठीक नहीं। सुप्रीम कोर्ट में जजों ने इस दलील पर सवाल खड़े किए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस फैसले को हास्यास्पद बताया गया और इन तीन कैदियों को अंतरिम जमानत दी गई। 16 साल बाद यह कैदी बाहर आएंगे। तीनों ही कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

जस्टिस संजय किशन कौल और आर सुभाष रेड्डी की बेंच ने राज्य अधिकारियों के फैसले पर सवाल खड़े किए। साथ ही कहा कि ऐसा लगता है कि यह फैसला अधिकारियों की ओर से बिना दिमाग का इस्तेमाल किए किया गया। यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी ने दोबारा से याचिका स्वीकार करने की बात कही।

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