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भारतियों ने ट्विटर पर ट्रेंड कराया #IstandWithPutin, बना टॉप ट्रेंड

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नई दिल्ली (मा.स.स.). रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के छह दिन हो गए हैं। चूंकि इस युद्ध में रूस ने हमलावर की भूमिका निभाई है, इस कारण यूक्रेन पीड़ित जान पड़ता है और ज्यादातर लोगों की सहानुभूति उसके साथ दिख रही है। हालांकि, भारत में एक बड़ा वर्ग रूस का खुला समर्थन कर रहा है। यह वर्ग रूस-यूक्रेन वॉर का असली विलेन अमेरिका और नाटो गठबंधन को मान रहा है। रूस समर्थक तरह-तरह की दलीलें पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया ट्विटर पर तो #IStandWithPutin टॉप ट्रेंडिंग है। लोग इस हैशटैग के साथ फैक्ट, कार्टून, मीम आदि पेश कर रहे हैं।

आकाश का कहना है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति के पास रूसियों के खिलाफ अमेरिकियों का प्रॉक्सी बनने की जगह निष्पक्ष रहते हुए युद्ध टालने का बेहतर विकल्प था, लेकिन वो अमेरिकी चालबाजी का शिकार हो गए। उन्हें 100% ज्यादा मजबूत सैन्य शक्ति से लोहा लेने को लिए धकेल दिया गया। राहुल यादव ने एक ट्वीट में कार्टून शेयर किया है और लिखा है, ‘जब अमेरिका यही काम मध्य पूर्व में करता है तो किसी को चिंता नहीं होती है, लेकिन जब यूरोप की सीमा से सटा एक देश करता है तो सब चीखने लगते हैं। पश्चिमी देश खतरा महसूस कर रहे हैं और हथियारों से मदद कर रहे हैं लेकिन उन्होंने सीरिया, इराक, लीबिया और फिलिस्तीन में ऐसा नहीं किया। सच्चाई तो हमेशा सामने आती है।’ कार्टून में दिखाया गया है कि कैसे यह नैरेटिव गढ़ा गया है कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है और यूक्रेन कितना भोला है जबकि हकीकत यह है कि अमेरिका, नाटो, ब्रिटेन की शह पर यूक्रेन रूस को उकसा रहा था।

एक ट्विटर हैंडलर का मानना है कि यूक्रेन कोई दूध का धुला नहीं है। उसने एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, ‘मीडिया यह आपको नहीं दिखाएगा। पुतिन को यूक्रेन पर पश्चिमी देशों का प्रभाव खत्म करना ही होगा।’ उसने जो ट्वीट रीट्वीट किया है, उसमें एक तस्वीर के साथ लिखा है, ‘2014 से यूक्रेनियनों ने 15 हजार से ज्यादा नागरिकों को मार दिया, कुछ को तो जिंदा जला दिया गया। यह युद्ध रूसी आक्रमण नहीं बल्कि स्वजनों की मुक्ति का अभियान है।’ तस्वीर में तीन बच्चों के हाथों में दो पोस्टर हैं। एक में अंग्रेजी में लिखा है- डोनबास को यूक्रेन आर्मी से बचाइए।

राहुल यादव दुनिया के कई देशों में अमेरिकी आक्रमण का हवाला देकर लिखते हैं, ‘मैं पुतिन के समर्थन इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे पता है कि इन सबके पीछे अमेरिका है। इसने अपने फायदों के लिए कई अच्छे देशों में अस्थिरता पैदा की। अब वक्त आ गया है कि उन्हें अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी पर दोबारा से विचार करें। राहुल ने अपने ट्वीट के साथ ओबामा, जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन की तस्वीर भी साझा की है। इस तस्वीर पर लिखा है, ‘इन तीन लोगों ने 23 वर्षों में 9 इस्लामी देशों पर आक्रमण किया, 1.10 करोड़ मुसलमानों को मारा, फिर भी किसी ने उन्हें आतंकवादी नहीं कहा।’

सन्नी राजपूत ने एक कार्टून शेयर करते हुए बताया है कि कैसे पश्चिमी देश दुनियाभर में खूनी खेल करते रहते हैं। उन्होंने लिखा है, ‘हाथ में खंजर लिया हुआ व्यक्ति कहता है कि उसे शांति से बहुत प्यार है। यह सच में इस वक्त का सबसे बड़ा मजाक है।’ वो पूछते हैं कि जब पश्चिमी देश किसी देश को मिलकर तबाह करते हैं तब दुनिया में कोई भी उस वक्त उनके साथ खड़ा क्यों नहीं होता? क्या वो इंसान नहीं हैं? क्या वो इस समूह में महिलाएं और बच्चे नहीं हैं? इस ट्वीट के साथ शेयर की गई तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के साथ मास्क पहने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो दिख रहे हैं। सबके हाथ से खून की बूंदें टपक रही हैं। जॉनसन के हाथ में तो खून से भरी ग्लास ही है और बाइडेन एक हाथ उठाकर रूस की तरफ उंगलियां करते हुए कह रहे हैं कि रूसी खराब हैं।

अनुराग बंसल लिखते हैं, ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि पुतिन अमेरिका से अपनी सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। हमने देखा है कि इन देशों के साथ क्या हुआ है। इराक, ईरान, अफगानिस्तान, सीरिया, लीबिया अमेरिकी आतंकवाद के उदाहरण हैं। उन्होंने सभी शहरों का विनाश कर दिया।’ लोग हाल ही में मशहूर हुई तेलुगू फिल्म पुष्पा के डायलॉग के जरिए भी रूस का समर्थन कर रहे हैं। एक मीम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को यह कहते हुए दिखाया गया है कि पुतिन नाम सुनके पुदीना समझा क्या, पुदीना नहीं परमाणु बम है मैं। दरअसल, फिल्म में नायक पुष्पा कहता है कि पुष्पा को फ्लावर समझा क्या, फ्लावर नहीं फायर है मैं।

ध्यान रहे कि रूस, भारत का परांपरिक मित्र रहा है। युद्ध हो या वैश्विक कूटनीति का तकाजा, रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया जबकि अमेरिका एवं पश्चिमी देश का रवैया अक्सर भारत विरोधी रहा है। यह अलग बात है कि पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका भी भारत के साथ पींगे बढ़ाने को मजबूर हो रहा है। हालांकि, भारत की आम जनता में रूस के मुकाबले अमेरिका पर बहुत कम भरोसा देखा जाता है। यही रूस-यूक्रेन युद्ध में भी सामने आ रहा है। बहरहाल, इस युद्ध को लेकर भारतीयों की सोच का अंदाजा ऊपर दिए गए पोल में भी साफ-साफ लगाया जा सकता है।

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