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आर्थिक-सामाजिक समृद्धि लाने के लिए सहकार भारती चलाएगी स्वावलंबी भारत अभियान

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अहमदाबाद (मा.स.स.). सहकारिता के इतने व्यापक क्षेत्र के लिए लंबे समय से  प्रशासनिक नियमन और सक्षम नीतिगत ढांचे की मांग हो रही थी।देश में सहकारिता क्षेत्र की सबसे बड़ी संस्था सहकार भारती ने पिछले वर्ष लखनऊ में आयोजित सातवे राष्ट्रीय अधिवेशन में सहकारिता मंत्रालय का गठन करने पर प्रधानमंत्री जी का अभिवादन किया और एक प्रस्ताव भी पारित किया था।ऐसे में सहकारिता मंत्रालय का गठन सहकारिता से जुड़ी करोडों जिंदगियो के लिए सुखद भविष्य की तरफ ले जाने वाला संदेश है। सहकारिता मंत्रालय की आवश्यकता को समझने से पहले हमें सहकारिता आंदोलन, सहकारी गतिविधियों की क्षमता और कमजोरियों का विश्लेषण करना होगा।सहकारिता मानव जीवन के उत्थान के लिए नैसर्गिक रूप से व्यवहार में लाई गई वह कार्य संस्कृति है।सबकी भागीदारी और सह स्वामित्व किसी भी सहकारिता की आत्मा होती हैं।सहकार आधारित व्यवस्था में अभावग्रस्त एवं शोषित वर्ग को स्वामित्व के साथ आर्थिक प्रकल्प संचालित करने की सुविधा मिलती हैं।

यह बात सहकार भारती के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. उदय जोशी ने सहकार भारती की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी समिति की अहमदाबाद में आरएसएस कार्यालय पर आयोजित बैठक में गुजरात के सभी जिलों से आये पदाधिकारी, कार्यकर्ताओ को मार्गदर्शन देते हुए कहा था। आगे डॉ. जोशी ने कहा कि “बिना संस्कार, नहीं सहकार” धोष वाक्य के साथ सहकारिता क्षेत्र में, राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाला “सहकार भारती” एक मात्र स्वयंसेवी संगठन है। संपूर्ण भारत में २७ राज्यों तथा 600 से अधिक जिलों में सहकारिता शुद्धि,वृद्धि तथा गुणात्मक विकास की प्रक्रिया में सहकार भारती आज कार्यरत हैं।सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत कार्यकर्ता तथा सहकारी समितियों का यह एक सशक्त संगठन है। उन्होंने कहा कि देश का स्थायी रूप से आर्थिक विकास सहकारिता के माध्यम से करने की मा. प्रधानमंत्री द्वारा आजादी के ७५ वे स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा हो गई हैं तब संगठन के साथ जुड़े सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बनती हैं कि सहकारिता को गांव गांव तक पहुचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा कर समाज और राष्ट्र को अपना समय इस कार्य के लिए दे।

आज राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत बहुराज्यीय सहकारी समितियों की शिखर संस्थाए जैसे कि NAFCUB ,NCUI, NCDFI, Labour Federation, National Fisheries Development Federation में सहकार भारती के प्रमुख कार्यकर्ताओं का प्रवेश तथा सहकार भारती की सहकारिता के राष्ट्रीय परिदृश्य में संयोगिता बढ़ गई हैं। नेफक्रॉब के अध्यक्ष तथा सहकार भारती के संरक्षक, मार्गदर्शक ज्योतिंद्रभाई महेता ने नई सहकारिता नीति पर बोलते हुए कहा कि जनता को सहकारी प्रणाली के बारे में बताने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोगों को सहकारी क्षेत्र से जोड़ा जा सके। ज्योतिंद्र भाई ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में नवगठित सहकारिता मंत्रालय ने विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों का शुभारंभ किया है और नई सहकारी नीति बनाना ऐसी पहलो में से एक है। सहकारिता से समृद्धि के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। ज्योतिंद्र भाई ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ग्राहक आधार में इजाफा करने की जरूरत है।

उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राहक आधार बढ़ाने के लिए शहरी सहकारी बैंकों और क्रेडिट समितियों को मासिक आधार पर जागरूकता शिविर या प्रशिक्षण का आयोजन करना चाहिए।महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं देशका लगभग ५०% हिस्सा हैं और उन्हें सहकारी प्रणाली से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और क्रेडिट समितियों को सदस्यों के रूप में अधिक से अधिक महिला को नामांकित करने और वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास में तेजी लाने के लिए अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।”आजादी के अमृत महोत्सव” पर बड़े शहरी सहकारी बैंक स्टार्टअप को बढ़ावा दे,”अमृत काल” के दौरान सहकारिता को बढ़ावा देने और अधिक रोजगार पैदा करने के लिए हम सभी शहरी सहकारी बैंकों-क्रेडिट सोसायटी से अनुरोध करते हैं कि वे सहकार से समृद्धि को साकार करने के लिए उपरोक्त गतिविधियों के साथ साथ २५ प्रकार के विविध सहकारी प्रकोष्ठों में सक्रिय रूप से भाग ले।

प्रदेश कार्यकारिणी समिति की इस बैठक में आरएसएस-गुजरात के प्रान्त कार्यवाह शैलेशभाई पटेल ने स्वावलंबी भारत अभियान में संध के छह आर्थिक संगठनों द्वारा आगामी दो साल तक चलाये जाने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान में सहकार भारती भी सामेल हैं तब गुजरात के कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बन जाती हैं कि इस अभियान को समाज के निचले स्तर तक, गाँव गाँव तक पहुचाया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाए ताकि कोई अपना घर या गाँव छोड़कर पलायन न करें। इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और प्रदेश कोषाध्यक्ष पिनाकिन भाई विट्ठलानी ने गुजरात में चल रहे सहकार भारती के कार्यो की जानकारी दी और उपस्थित सभी सदस्यों को आह्वान किया कि इस क्षेत्र में नये लोगों को जोड़ा जाए, सहकारी समितियों का अच्छी तरह संचालन हो, उसके वहीवट में पारदर्शिता आये और उसमें कार्यरत कर्मचारियों और संचालकों की कार्य कुशलता बढ़े ऐसा प्रयास किया जाएगा।

सहकार भारती के प्रदेश संगठन मंत्री जीवण भाई गोले ने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि पदाधिकारियो द्वारा ज्यादा से ज्यादा प्रवास किया जाए, नए नए लोगों का संपर्क करके उन्हें इस क्षेत्र में जोड़ा जाए, जिल्ला स्तर की टीम जल्द से जल्द बनाई जाए, सहकार भारती के सभी प्रकोष्ठों को सक्रिय कर राज्य के ३३ जिलों में संगठनात्मक रचना खडी की जाए।इस सब कार्यो के लिए हमारे पास संगठन शक्ति बढ़ाने के अलावा सभी संस्थाओं में १०० प्रतिशत सदस्यता दर्ज हो।संस्थागत सदस्यता बढ़ानी,आजीवन सदस्यों की संख्या बढ़ाने, सभी प्रकोष्ठों के कार्यक्रम करने एवं सदस्यता संमेलनो का जिला स्तर पर आयोजन कर स्वावलंबी भारत अभियान में अपना योगदान देना होगा। प्रदेश महामंत्री विनोद भाई बरोचिया ने प्रदेश में चल रहे सहकार भारती के कार्यो का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि २४९ तहसील में से १२५ तहसीलों में संगठन का कार्य शुरू हो गया है और सभी २५ प्रकोष्ठों में आगे चलकर प्रान्त और जिला स्तर तक संगठनात्मक टीम बनाकर कार्य विस्तार करने की योजना बनाई गई हैं।

प्रदेश महिला अध्यक्षा इरवाबेन शुक्ला ने प्रान्त के सभी जिलों में महिला इकाई का संगठन का कार्य विस्तर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस क्षेत्र में जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनी योजनाए कार्यकर्ताओं को बताई। इस कार्यक्रम में FPO पर भी एक प्रान्त स्तर की योजना बनाकर कार्य करने की सभी कार्यकर्ताओं ने सहमति जताई थी।बैठक के समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितु भाई व्यास ने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को नई सहकारी समितियों का गठन करने और इस क्षेत्र में जन आंदोलन चला कर ज्यादा लोगों को संगठन में जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करने हेतु मार्गदर्शन दिया था। इस बैठक में  प्रदेश के ३३जिलों में से १५० सहकारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे थे।

साभार : मिहिर कुमार शिकारी

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