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लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी दलों का खतरा विषय पर आयोजित होगी राष्ट्रीय संगोष्ठी

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मुंबई (मा.स.स.). रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी (आरएमपी), मुंबई स्थित एक थिंक-टैंक, के तत्वाधान में लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी राजनीतिक दलों के खतरे पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 19 मई को सुबह 10:30 बजे से 5 बजे के बीच, नेहरू मेमोरियल, ऑडिटोरियम नई दिल्ली में करेगा। यह जानकारी आरएमपी के महानिदेशक रवींद्र साठे ने मीडिया को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने बताया कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा इस तरह के पहले संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। इस संगोष्ठी के विचार-विमर्श में वंशवादी दलों के कारण लोकतांत्रिक खतरे और वंश आधारित राजनीतिक दलों को पनपने से रोकने के लिए संभावित नियामक ढांचे जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे और महा निदेशक रवींद्र साठे ने इस संगोष्ठी के बारे में मीडिया को जानकारी दी।

यह परिभाषित करते हुए कि वंशवादी दल, वे हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक विशेष वंश द्वारा नियंत्रित होते हैं, और जहां न केवल अध्यक्ष का पद एक वंश के पास होता है, बल्कि अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी उसी परिवार से आते हैं, संगोष्ठी के आयोजकों ने कहा कि इस तरह की प्रथाओं से लोकतांत्रिक साख कमजोर होती हैं और राजनीतिक दलों को संस्थागत नुकसान पहुंचता है। इस तरह के वंशवाद संचालित पार्टियों में मौजूदा तंत्र के तहत एक ही परिवार व्यावहारिक रूप से सब कुछ नियंत्रित करता है, पार्टी वित्त, पार्टी सदस्यता, पार्टी उम्मीदवारी, और गठबंधन और राजनीतिक भागीदारी के बारे में निर्णय भी वही लेते हैं। विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि इस तरह की पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।’ अपने नेताओं के बेटे-बेटियों को उम्मीदवारी देना एक बात है और एक पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने वाला परिवार पूरी तरह से अलग है। दूसरी वाली प्रचलन लोकतंत्र के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है। सहस्रबुद्धे ने कहा, इसमें कोई भी भविष्यवाणी कर सकता है कि परिवार संचालित पार्टी में मुखिया के परिवार का एक बच्चा तीन दशक बाद पार्टी अध्यक्ष बनना निश्चित है और यह गंभीर रूप से आपत्तिजनक है।

इस एक दिवसीय संगोष्ठी में, इस महत्वपूर्ण विषय पर पहला; वंशवादी दलों द्वारा उत्पन्न लोकतांत्रिक खतरे की समीक्षा करेगा और राजनीतिक दल के गठन को विनियमित करने के तरीकों और साधनों का भी पता लगाएगा ताकि किसी भी लोकतांत्रिक राज्य में परिवार नियंत्रित उद्यमों को रोका जा सके। भारत में, 2700 पंजीकृत और मान्यता प्राप्त दलों में से 50 प्रमुख राजनीतिक दलों में से कम से कम 4/5 वंशवाद आधारित हैं। यह तथ्य मतदाता के लिए उपलब्ध विकल्पों को गंभीरता से कम करती है क्योंकि यह संघर्ष को प्रभावित करती है।

जेपी नड्डा के अलावा, आरएमपी के अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी के साथ-साथ गैर-वंशवादी दलों के प्रतिनिधि जैसे जद (यू) के केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह, अन्नाद्रमुक के तांबी दुरई और असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य, वंशवाद पर अपने विचार साझा करेंगे। राजनेताओं के अलावा, प्रोफेसर आनंद रंगनाथन, प्रोफेसर संदीप शास्त्री, वकील — जैसे शिक्षाविद भी इस संगोष्ठी में बोलेंगे। जेएनयू की कुलपति शांतिश्री पंडित समापन भाषण देंगी। इस संगोष्ठी के सिफारिशों को बाद में भारत के चुनाव आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा।

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