गुरुवार , जनवरी 20 2022 | 07:22:10 PM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / दान पुण्य एवं सूर्य उपासना का पर्व मकर संक्रांति

दान पुण्य एवं सूर्य उपासना का पर्व मकर संक्रांति

डॉ० घनश्याम बादल

 हिंदू धर्म में दान और पुण्य का बड़ा महत्व है और मकर संक्रांति का पर्व अमीरों को दान देने का, तो गरीबों को कुछ पाने का माध्यम बनता  है । विज्ञान व धर्म को जोड़ता है, यह अकेला हिंदू पर्व है जो सौर गति के आधार पर मनाया जाता है जबकि हिन्दू धर्म के दूसरे त्यौहार चंद्र कलाओं के आधार पर तय होते हैं । कुल मिलाकर धर्म , विज्ञान , दान स्नान , पुण्य कमाने व मोक्ष पाने का अनूठा मिश्रण है मकर संक्रांति व का पर्व , जिसके पीछे वैज्ञानिक व भौगोलिक कारणों के साथ- साथ  पौराणिक कथाएं व मिथ भी जुड़े हैं । ।

 मिथ कथाएं :

पुराणों के अनुसार महाभारत के यु़द्ध में  अर्जुन के बाणों से घायल , भीष्म शरशैया पर पड़े थे और उनके प्राण निकलने ही वाले थे पर,  सूर्य उस समय दक्षिणायण था और हिंदू धर्म के मुताबिक इस स्थिति में मृत्यु होने पर मुक्ति नहीं मिलती । सो ,  दृढ़व्रती भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने तक प्राण नहीं त्यागे । सूर्य उत्तरायण होते ही मकर संक्रांति पर उन्होने  प्राण त्याग मोक्ष प्राप्त किया । इसीलिये  मकर संक्रान्ति को मोक्षदायी पर्व कहते  हैं । मान्यता यह भी है कि  है कि आज के ही दिन भगवान विष्णु वामन के वेश में दैत्यराज राजा बलि का अभिमान तोड़ने कि लिए उनकी परीक्षा लेने गए थे । उन्होने बलि से तीन पग ज़मीन मांगी और उसके ‘‘हां’’ कह देने पर तीन कदम में उन्होने धरती व आकाश नाप लिए तथा पृथ्वी को दैत्य मुक्त करने के लिए वामनावतार विष्णु ने बलि को पाताल का राज्य दे दिया ।

पोंगल संक्रांति :

आज के ही दिन दक्षिण भारत में पोंगल मनता है , दक्षिण भारत में पोंगल का वही महत्व है जो उत्तरी भारत में दीवाली का है इस दिन वहां दीप जला कर रोशनी की जाती है व नावों की दौड़ भी आयोजित की जाती है ।उत्तरी भारत में  मकर संक्रांति के दिन लोग अपने पशुओं को सजाते हैं । मकर संक्रांति के पर्व का बखान कहां तक किया जाए सचमुच ही ये अनोखा  व अनुपम पर्व है जो अमीरों को दान देने का , तो गरीबों को कुछ पाने का अवसर दे जाता है । कुल मिलाकर दान  स्नान ,पुण्य व विज्ञान का अनूठा मिश्रण है ये पर्व ।

सूर्य का उत्तराय :

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है । इस दिन से सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाता है जिससे उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु का प्रकोप धीरे धीरे कम होना शुरू हो जाता है और स्वास्थ्य की दृष्टिसे भी मौसम अनुकूल होने लगता है । भूगोल के नज़रिए से देखें तो भारत में शीत ऋतु की विदाई की तैयारी आज से ही शुरु होती है ।

देश भर में मनता है पर्व

मकर संक्रांति के दिन खास तौर पर राजस्थान व गुजरात में पतंगें  जोर शोर से उड़ाई जाती हैं । ‘‘ चील चील पुआ ले ’’ के शोर से तो आसमान गूंजता ही है ‘‘ वो मारा वो काटा ’’ का शोर भी चारों तरफ सुनाई देता है ।

 उत्तरप्रदेश :

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा स्नान का खास जोर रहता है इस दिन हर की पौड़ी पर स्नान करने वालों को मुक्ति पाने के से भाव लाखों लोग गंगा  स्नान करते हैैं । शायद तिलों के महंगे होने की वजह से या किसी और कारण से इस क्षेत्र में उड़द की काली दाल की खिचड़ी बनाने ,खाने व दान करने की परम्परा मिलती है । पूर्वी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के संगम पर इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है । एक तरफ मांगने वालों तो दूसरी तरफ दान करने वाले लोगों का हुजूम देखा जा सकता है । राजस्थानी व गुजराती लोग मालपुआ बनवा कर बांटते हैं ।

महाराष्ट्र:

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन सुहागिन महिलाएं इकट्ठी होकर एक दूसरे को कुंकुम व हल्दी लगाती हैं तथा तिल व गुड़ भेंट करती हैं तथा हमेशा मीठे वचन बोलने की शपथ उठाती हैं  हैं । रथ सप्तमी तक यह पर्व बड़े ही उत्साह से वहां मनाया जाता है ।एक दिन पूर्व ही 13 अप्रैल को पंजाब में लोहड़ी का पर्व भी जोशो खरोश के साथ सम्पन्न होता है जो नई फसल के आने की खुशी में मनाया जाता है । उधर तमिलनाडु में पोंगल का पर्व भी इसी समय  मनाया जाता है ।

तिल का महत्व :

कहा जाता है कि मकर संक्रांति से प्रत्येक दिन , एक एक तिल बढ़ने लगता है । इस दिन तिल का खास महत्व होता है ,आज के दिन तिल के लड्डू बनाए जाते हैं , तिल का दान किया जाता हैं व व्यंजनों में खास तौर पर तिल के तेल का ही उपयोग करने की परम्परा है । आज के दिन को सूर्य की उपासना की जाती है और सूर्यनमस्कार करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति का मिथ भी  है ।

संतान कल्याण का पर्व  :

महिलाओं में इस पर्व के प्रति खास उत्साह देखा जाता है वें बड़ी उमंग के साथ आज के दिन व्रत , जप , तप , दान व धर्म के काम करती हैं और अपनी संतान के सुख समृद्धि , सुरक्षा व कल्याण की कामना करती हैं । कहा जाता है कि आज के  दिन ही माता यशोदा ने कृष्ण को पुत्र  के रूप  में पाने के लिए व्रत किया था । पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए मकर संक्रांति का पर्व अति शुभ माना जाता है ।

लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं.

नोट : लेखक द्वारा व्यक्त विचारों से मातृभूमि समाचार का सहमत होना आवश्यक नहीं है

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

आतंकवादी 26 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बना सकते हैं निशाना

नई दिल्ली (मा.स.स.). खुफिया एजेंसियों को गणतंत्र दिवस पर संभावित आतंकी साजिश के बारे में अलर्ट मिला …