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कोरोना के स्टेल्थ वैरिएंट से चीन में मचाया हाहाकार, भारत में खतरा कम

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बीजिंग (मा.स.स.). भारत समेत पूरी दुनिया फिलहाल कोरोनावायरस के घटते केसों के चलते सुकून की सांस ले रही है। भारत में पिछले एक हफ्ते में कोरोना के मामले दो वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। हालांकि, जहां एक तरफ भारत में कोरोना का प्रभाव घट रहा है, वहीं जिस देश से कोरोनावायरस का पहला केस आया था वहां लगातार दो साल तक नियंत्रण में रहने के बाद संक्रमण फिर सिर उठा रहा है। पिछले तीन दिनों की ही बात कर लें तो चीन में संक्रमितों की संख्या नौ गुना तक बढ़ चुकी है।

चीन में कोरोना महामारी किस हद तक नियंत्रण में रही है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि वुहान में पहली बार कोरोना का केस मिलने के बाद पूरा देश लॉकडाउन के दायरे में चला गया था। चीन में सबसे ज्यादा 14 हजार केस 12 फरवरी 2020 को सामने आए थे। हालांकि, इसके बाद से बीच में कुछ दिन छोड़ दें तो चीन में कोरोना केस 200 के ऊपर तक नहीं जा पाए। इस साल की शुरुआत में चीन ने एक बार फिर कोरोना महामारी का प्रभाव देखा। 28 दिसंबर को चीन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 209 रही थी और तबसे लगातार हर दिन मिलने वाले कोरोना केस ऊपर बने हैं। 23 फरवरी से लेकर अब तक हर दिन चीन में संक्रमितों का आंकड़ा दो सौ के ऊपर रहा है, जबकि 10 मार्च को पीड़ितों की संख्या पहली बार 500 के ऊपर पहुंच गई।

पिछले तीन दिन की ही बात कर लें तो जहां शुक्रवार को चीन में कोरोना के 588 केस थे, वहीं शनिवार को यह आंकड़ा बढ़कर 1938 तक पहुंच गया। इसके बाद रविवार को चीन में कोरोना के 1436 केस मिले। लेकिन सोमवार को संक्रमितों की संख्या 5280 तक आ गई। यानी पिछले एक दिन में जहां संक्रमितों की संख्या में तीन गुना का इजाफा हुआ है, वहीं शुक्रवार से अब तक कोरोना के केस नौ गुना तक बढ़ चुके हैं।

चीन ने पिछले दो वर्षों से लगातार सख्त लॉकडाउन नियमों का पालन करते हुए कोरोना के मामलों पर लगातार नियंत्रण रखा। इसके चलते इस वायरस के खतरनाक अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट भी चीन में खास तबाही नहीं मचा पाए। वहीं, ओमिक्रॉन वैरिएंट आने के बाद चीन में जनवरी में संक्रमितों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन इस पर भी नियंत्रण पा लिया गया। इस बीच अब चीन में ज्यादा केस आने के पीछे कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की भी सब-वैरिएंट ‘स्टेल्थ ओमिक्रॉन’ को बड़ी वजह बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब-वैरिएंट कोई नया नहीं है और चीन से पहले कई और देश भी इससे प्रभावित हो चुके हैं।

ओमिक्रॉन के स्टेल्थ वैरिएंट को ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए चीन ने जीरो टोलरेंस नीति फिर से लागू कर दी है और सख्त लॉकडाउन लगा दिए हैं। इसके जरिए चीन हर एक केस को ढूंढकर उसे आइसोलेट करने पर जोर दे रहा है। इसके अलावा कोरोना प्रभावित क्षेत्रों और शहरों में सार्वजनिक टेस्टिंग का आंकड़ा बढ़ा दिया गया है। नई कोरोना लहर के कारण चीन के 10 शहरों में लॉकडाउन लगा दिया गया है। तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को एक बार फिर घरों में कैद किया गया है। नई लहर से सबसे ज्यादा जिलिन प्रांत पर असर हुआ है। कोरोना मामलों में उछाल के कारण कम से कम 10 शहरों और काउंटियों में लॉकडाउन किया गया है। इनमें शेनजेन का टेक हब शामिल है, जहां 1.70 करोड़ लोग रहते हैं। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) के अनुसार यह बीते दो साल में हुई एक दिन की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है। जिलिन प्रांत में सर्वाधिक 3000 नए संक्रमित मिले हैं।

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने एक महीने तक एक्टिव केसों का आंकड़ा दो लाख के पार रहा था। इस दौरान भारत में ओमिक्रॉन के दो सब-वैरिएंट देखे गए, जहां एक वैरिएंट बीए.1 ओमिक्रॉन का आधारभूत सब-वैरिएंट था, वहीं दूसरा सब-वैरिएंट बीए.2 स्टेल्थ ओमिक्रॉन वैरिएंट था। स्टेल्थ ओमिक्रॉन वैरिएंट को दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में डिटेक्ट किया गया था। इन देशों में तब दक्षिण अफ्रीका से लेकर ब्रिटेन, डेनमार्क और भारत भी शामिल था। दूसरी तरफ इस दौरान कई देशों में डेल्टा और ओमिक्रॉन वैरिएंट का मिलाजुला स्वरूप डेल्टाक्रॉन भी ततबाही मचा रहा था। यानी फिलहाल स्टेल्थ ओमिक्रॉन के अलावा जिस एक और वैरिएंट से चीन में संक्रमितों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, वे दोनों ही स्वरूप भारत को प्रभावित कर चुके हैं।

इसके चलते चीन में आई कोरोना की लहर से भारत के प्रभावित होने की संभावनाएं काफी कम हैं। इसकी पहली वजह डेल्टा और ओमिक्रॉन के खिलाफ भारतीयों में पैदा हो चुकी प्रतिरोधक क्षमता है। इसके चलते देश में कोरोना के केस लगातार घट रहे हैं। उधर चीन की अधिकतर आबादी ने ओमिक्रॉन ही नहीं, बल्कि कोरोना का सामना भी नहीं किया है। ऐसे में वहां ओमिक्रॉन का ज्यादा तेजी से फैलने वाला और जांच से भी बच निकलने वाला वैरिएंट बड़ी समस्या की वजह बन रहा है। चीन जैसी लहर भारत में अब आगे आने की संभावना इसलिए भी कम है, क्योंकि भारत की लगभग 100 फीसदी आबादी कोरोना वैक्सीन लगवा चुकी है और गंभीर संक्रमण के खतरे से सुरक्षित है। गौरतलब है कि पहले ही कई स्टडीज में दावा हो चुका है कि संक्रमण से मिलने वाली इम्युनिटी और टीकों से मिली इम्युनिटी कोरोना के खिलाफ सबसे ज्यादा कारगर हैं।

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